होर्मुज ! चीन-ब्रिटेन समेत भारत ने भी दिया ट्रंप को तगड़ा झटका

हॉर्मूस पर अलग-ठलग पड़े ट्रंप। जहाजों की तैनाती पर भारत का जवाब। चीन, ब्रिटेन समेत इन देशों ने भी किया इंकार। ईरान में नहीं पड़ेगा ब्रिटेन। चीन दौरा टाल सकते हैं ट्रंप। इजराइल ईरान के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मोज स्ट्रीट की सुरक्षा के नाम पर चीन और सहयोगी देशों से मदद की अपील की है। लेकिन वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ऑस्ट्रेलिया और जापान ने अपने नौसैनिक मदद मुहैया कराने से मना कर दिया है।

तो वहीं और अन्य सहयोगी देशों ने भी कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। ब्रिटेन का कहना है कि वह ईरान के में नहीं पड़ेगा। वहीं इधर ट्रंप ने यह चेतावनी दे दी कि अगर सहयोगियों ने मदद नहीं की तो नाटो को भविष्य में संकट का सामना करना पड़ेगा।

.आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में 2 सप्ताह से ज्यादा यानी कि लगभग 14 दिनों से जारी के कारण तेल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं क्योंकि ईरान ने स्टेट ऑफ हॉर्मोस को बंद कर रखा है। वहीं वैश्विक तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। वहीं एपी के अनुसार ट्रंप ने फ्लोरिडा से वाशिंगटन लौटने के दौरान एयरफोर्स में पत्रकारों से बातचीत की और बातचीत के दौरान उन्होंने कहा उन्होंने सात देशों से भेजने की मांग की है ताकि स्टेट ऑफ हॉर्मोस को खुला रखा जा सके। वह आगे कहते हैं कि मैं इन देशों से मांग करता हूं कि वे आगे आए और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।

बहरहाल ईरान के बीच तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद उनकी अपील पर किसी देश ने कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं जताई है। हालांकि ट्रंप ने उन देशों का नाम बताने से इंकार कर दिया। पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर काफी हद तक निर्भर है और जिनसे ट्रंप प्रशासन इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने को लेकर बातचीत करना चाहते हैं। उन्होंने केवल इतना कहा है कि चीन लगभग 90% तेल इसी क्षेत्र से पाता है। जबकि अमेरिका को बहुत कम मात्रा में तेल मिलता है।

इससे पहले उन्होंने एक इंटरनेट मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इसमें शामिल होंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार आपको जानकारी दे दें कि ट्रंप ने उन देशों पर दबाव बढ़ाना भी शुरू कर दिया है जिनसे उन्होंने हॉर्मूस में युद्धपोत भेजने की अपील की है।

उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में बताया है कि अगर कोई जवाब नहीं आता है या नकारात्मक जवाब आता है तो मुझे लगता है कि यह नाटो के भविष्य के लिए बहुत बुरा होगा। ट्रंप ने कहा है कि खाड़ी की सुरक्षा के लिए चीन को भी मदद के लिए भेजने चाहिए। वहीं रटर्स के मुताबिक जापान और ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों को स्कॉट करने के लिए पश्चिम एशिया में नौसैनिक पोत भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं।

वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केयर स्टारमर ने यह कहा है कि उनका देश ईरान में नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन हॉर्मोज स्टेट को फिर से खोलने के लिए एक सामूहिक योजना पर सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेगा। लेकिन यह कोई आसान काम नहीं होगा।

वहीं इधर जर्मनी का कहना है कि ईरान से नाटो का कोई लेना देना नहीं है। जर्मन सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा है कि उनका देश ना तो में शामिल होगा और ना ही सैन्य बल पर हॉर्मोस को खुला रखने की अभियान में शामिल होगा। जबकि डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लॉके ने कहा है कि उनके देश को खुले दिमाग से सोचना चाहिए कि इस मामले में कैसे योगदान दिया जा सकता है।

वहीं ट्रंप की हॉर्न मजिस्ट्रेट में युद्धपोत भेजने की मांग पर चीन ने सभी पक्षों से पश्चिम एशिया में सैन्य अभियान तुरंत रोकने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जयान ने कहा है कि हॉर्मूद स्टेट और आसपास के क्षेत्र में तनाव ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित किया है और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नुकसान भी पहुंचाया है।

चीन फिर से सभी पक्षों से सैन्य अभियानों को तत्काल रोकने की अपील करता है। वहीं एएनआई के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिजशकियान से फोन पर बातचीत की और उनसे पश्चिम एशिया में हमले बंद करने और स्टेट ऑफ हॉरमोन से आवाजाही बहाल करने की अपील की है।

मैक्रो ने एक्स पर एक पोस्ट कर यह जानकारी साझा की है। वहीं आपको बड़ी जानकारी दे दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की अपनी बहुप्रक्षित यात्रा को टाल भी सकते हैं। उन्होंने खुद इस बात के संकेत दिए हैं।

वहीं यह माना जा रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस को खुलवाने में मदद के लिए बेंजिंग पर दबाव बढ़ाने का प्रयास भी कर रहे हैं। ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि पश्चिम एशिया के तेल पर चीन की निर्भरता का मतलब है कि उसे उस गठबंधन की मदद करनी चाहिए जिससे वह तेल टैंकरों की हॉर्मूज स्टेट से आवाजाही आवाजाही फिर से शुरू कराने की कोशिश में आगे बढ़ रहा है क्योंकि ईरान ने वैश्विक तेल प्रवाह को रोक दिया है। उन्होंने आगे कहा कि हम दौरे से पहले यह जानना चाहते हैं कि क्या बिंजिंग मदद करेगा। हम इसको टाल सकते हैं। उनका 31 मार्च से 2 अप्रैल तक चीनी दौरे का कार्यक्रम निर्धारित है।

वहीं अगर अब बात करें भारत के जवाब की तो आपको जानकारी दे दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ हॉर्मोस को खुला और सुरक्षित रखने के लिए कई देशों से अपने युद्धपोत भेजने की अपील की है। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने अमेरिका के साथ इस बारे में कोई बातचीत फिलहाल नहीं की है। तो यह बड़ी जानकारी सामने आई है जहां स्टेट ऑफ हॉर्मोस को लेकर ट्रंप अलग-थलग पड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

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