ट्रंप ने नेतन्याहू से की फोन पर बात, दे दी ये बड़ी सलाह! |

अमेरिकी चैनल एनबीसी के हवाले से यह बड़ी जानकारी। ट्रंप ने नैतन्याहू को फोन किया है और लेबनान पर हमले कम करने को कहा है। ईरान वार्ता के मद्देनजर ट्रंप का यह फोन है। अब देखने वाली बात होगी कि इस पर प्रतिक्रिया इजराइल की क्या आती है।

क्या हालांकि प्रतिक्रियाएं तो सामने आ रही है लेकिन एक्शन क्या आता है? ये दुनिया देखेगी इस वक्त क्योंकि इजराइल कहता तो है कि हम सीज फायर का समर्थन कर रहे हैं लेकिन उसके एक्शन उसके शब्दों से मैच मैच नहीं खाते और एकदम उलट नजर आते हैं। पूरी तौर पर ज्यादा जानकारी के साथ राजीव रंजन हमारे साथ जुड़ गए न्यूज़ रूम से। राजीव एक बार फिर से फोन कॉल पर बातचीत हुई है।

मनाने की कोशिश की है। क्या नितिनू इस बार मानेंगे? क्योंकि उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर नजर आता है। बिल्कुल अंतर नजर आता है। और यही यही बात समझने की बात है कि जब अमेरिका और या ईरान के बीच में सीज फायर होता है 14 दिन के बाद तो उसके बाद नेतनानू जो जिस तरह से इजराइल जो है लेबनान पर हमला करता है 10 मिनट के अंदर 100 जागता है 200 से ज्यादा लोगों की हो जाती है और सबसे बड़ा प्रहार का दावा इजराइल करता है तो जाहिर सी बात है कि इससे समझ में आता है कि आखिर जो सीज फायर जो हो रहा है उसे ये लग रहा है कि इजराइल की जो मंशा जो थी जो टारगेट जो था लक्ष्य जो था वो शायद हासिल नहीं कर पाए हैं।

इजराइल का यह सोच है और यही वजह है कि जिस तरह से हिजबुल्ला को टारगेट किया जा रहा है व ईरान साफ तौर पर यह कह रहा है कि जब तक आप लेबनान में सीज फायर नहीं करेंगे लेबनान में हमले बंद नहीं करेंगे तब तक हम बात नहीं करेंगे तो अब समझा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के कहने के बाद जो है नेतनाहू के तेवर जो है कुछ नरम पड़े और कम से कम लेबनान में कुछ शांति स्थापित हो।

लेकिन लेबनान सीसार का हिस्सा राजीव नहीं रहेगा ये तो अमेरिका भी कह चुका है फिर फोन कॉल करके किस प्रकार की खानापूर्ति वो करना चाहता है यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

छ हफ्तों तक जारी हमलों के बाद अब इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत होने वाली है। सीधे बातचीत की लेबनान की अपील है। इजराइल के प्रधानमंत्री नित्या इसके लिए तैयार हो गए हैं। अगले हफ्ते इजराइल लेबनान की सीधी बातचीत होगी और वाशिंगटन के स्टेट डिपार्टमेंट में यह बैठक होगी। लेबनान में अमेरिकी राजदूत मिशेल ईसा बातचीत का नेतृत्व करेंगे। तो व इजराइल की ओर से राजदूत यही एंड लेटर यहां पर मौजूद रहेंगे।

व लेबनान की ओर से राजदूत नाडा मुआबाद शामिल होंगे। राजीव रंजन हमारे साथ लगातार बने हुए हैं। राजीव लेबनान से तो बात हो जाएगी लेकिन हिजबुल्ला का क्या होगा? क्योंकि ये तो बेंजामिन नतना कह रहे हैं कि हम लेबनान पर हमले रोकने के लिए तैयार हैं। लेकिन हिजबुल्लाह से हमला बाकी है। लेबनान को हिजबुल्ला से अलग कैसे कर पाएंगे? देखिए लेबनान को हिजबुल्लाह से अलग नहीं किया जा सकता है। दुनिया का एक मुझे लगता है कि इकलौता एक सैन्य संगठन है कि जो किसी स्टेट का नहीं है लेकिन स्टेट जितनी उतनी ताकत है।

तो हिजबुल्ला और लेबनान को अलग करके नहीं देखा जा सकता है। हिजबुल्लाह का ये कहना है कि उसका गठन ही लेबनान की हिफाजत के लिए हुआ है और इजराइल के जो आक्रमक रवैया है उसको रोकने के लिए होता है। यहां सबसे बड़ी बात यह होगी कि लेबनान लेबनान बातचीत के लिए बेशक तैयार हो जाएगा।

लेकिन जो लिबनान का ये भी कहना है कि हम सीधे तौर पर जो है इजराइल के साथ बातचीत नहीं करेंगे। अभी भी कई सारे मामलों को लेके पेच फंसा हुआ है। कोशिश जरूर हो रही है कि जो अमेरिका और ईरान के बीच में जो सीज फायर हुआ है उसका जो असर जो है यहां लेबनान पर भी देखे और दुनिया भर के जो तमाम नेता है।

वो इजराइल पर दबाव डाल रहे हैं कि आप जो है गोलाबारी बंद कीजिए और लेबनान के साथ सीधे बातचीत कीजिए ताकि हर जगह अमन चैन शांति स्थापित हो सके। बिल्कुल ये तो ठीक वैसी ही बात हो गई राजीव कि हम तो डूबे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे। कुछ ऐसा इजराइल इस वक्त अमेरिका के साथ कर रहा है। लेकिन अमेरिका को अपनी स्थिति को विश्व के मानचित्र पर समझने की जरूरत है कि एक गंभीरता से इस पूरे मामले में अपने रुख को सामने रखने की जरूरत है। जिस पर दुनिया की निगाहें लगातार बनी हुई है।

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