कभी-कभी कोई जाता है लेकिन उसके पीछे रह जाती है अनगिनत दुआएं। ना मिटने वाले निशान और एक ऐसी खामोशी जो उम्र भर बोलती रहती है। बीती रात कंगपोगपी की हवा में बस एक ही नाम गूंज रहा था लेमनोनथम सिंगसन का जिन्हें प्यार से परिवार वाले नेनू भी कहते थे। 19 जून की रात करीब 9:20 पर जब बेयर इंडिया की केबिन क्रू और कंगपोकपी की बेटी लामन थेम सिंगसन का पार्थिव शरीर घर लौटा तो पूरा शहर थम गया। हर आंख नम थी। हर दिल भारी क्योंकि लौट आई थी वो बेटी जो गई तो थी ड्यूटी पर पर अब वापस लौटी एक ताबूत में बंद।
इस राष्ट्रीय राजमार्ग दो के दोनों तरफ कई किलोमीटर तक फैली मोमबत्तियां इंसानियत की एक दीवार की तरह खड़ी थी। जिसमें कोई जात कोई धर्म नहीं था। बस नेनू के लिए एक साझा शोक था। नेनू के घर पर प्रार्थना सभा हुई। पारंपरिक रीति से शॉल ओढ़ाकर ताबूत को सम्मानित किया गया।
लेकिन सबसे दिल दहला देने वाला दृश्य था उनकी मां जो अकेली रह गई। अपनी बेटी के पार्थिव शरीर के पास बैठी रही। चेहरे पर गहरा दुख, हाथ ताबूत पर टिके हुए। नेनू की मां जो सालों पहले पति को खो चुकी थी, अब अपनी इकलौती बेटी को भी खो बैठी। उनकी आंखों से बहते आंसू वो सब कुछ कह गए जो शब्द नहीं कह सकते। उनके हाथों की कंपन,ताबूत पर आखिरी बार टिकी वो उंगलियां और वो खामोश चीख शायद ही कोई भूल पाएगा। 13 नवंबर 1998 को जन्मी नेऊन एक साधारण परिवार की असाधारण बेटी थी। मणिपुर की बाद उनका परिवार इंफाल छोड़कर कंगप पे आ बसा।
एक किराए के घर में उनके बड़े भाई बीमार है। छोटा भाई अभी बच्चा है। इन तमाम संघर्षों के बावजूद नेनू अपने परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य थी। नेनू ही वह रोशनी थी जो अंधेरे में घर जलाती थी। वो उस विमान पर नहीं जाने वाली थी। लेकिन एक बीमार सहकर्मी के लिए उन्होंने अपनी ड्यूटी बदली। अपना कर्तव्य निभाया और हमेशा के लिए अमर हो गई।
दुर्घटना से एक रात पहले उन्होंने अपनी मां से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने कहा था कि वह जल्दी सोना चाहती हैं क्योंकि अगली सुबह ड्यूटी है। हर रात की तरह मां बेटी ने मिलकर फोन पर प्रार्थना की। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। आज न्यूनो का अंतिम संस्कार किया जाएगा। दोपहर को कंगपोकपी की मिट्टी में नेनू को सुपुर्दे खाक किया जाएगा। लेकिन उनकी मुस्कान, उनका साहस और उनका त्याग हर कंगपोकपी वासी के दिल में हमेशा जीवित रहेगा। नेनू अब नहीं रही लेकिन उनकी कहानी, उनका बलिदान, उनकी मुस्कान और उनकी यादें हमेशा इस शहर की आत्मा में जिंदा रहेगी।
