इजरायल ने भारतीयों को मरने के लिए छोड़ा? राजू पारुलेकर ने मोदी को मारा ताना !

इस समय सोशल मीडिया में एक फोटो काफी तेजी से वायरल है। आप सबको मालूम है कि किस तरह से इजराइल और ईरान के बीच हो रहा है और इस बीच सोशल मीडिया पे एक फोटो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस फोटो में आपको क्या है?

हम बताते हैं आगे कि इस फोटो में है क्या और इस समय सोशल मीडिया पे यह फोटो क्यों वायरल हो रही है। इजराइल और ईरान के बीच जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है वैसे-वैसे दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई है। दोनों देश अपने के दम पर एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं। दागी जा रही हैं। हवाई हमले हो रहे हैं और हर तरफ भय और असुरक्षा का माहौल है। इस बीच खबर निकल कर के ये आई कि हमारे प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के प्रधानमंत्री नितनया से बातचीत भी किए हैं।

लेकिन वहीं सोशल मीडिया पर एक तस्वीर इस समय काफी तेजी से वायरल है। जिसमें साफ लिखा है कि इजराइल में में शेल्टर मिलने से इंकार किए जाने के बाद भारतीय लोग मेट्रो स्टेशनों में सोने को मजबूर हैं।

जी हां, वही देश जहां प्रधानमंत्री मोदी को इजराइल में सबसे बड़ा सम्मान मिला और मंच से उन्होंने गर्व से कहा कि भारत इजराइल के साथ है। अब सवाल उठता है अगर प्रधानमंत्री इजराइल के साथ है तो क्या हमारे देश के नागरिक भी उनके साथ नहीं है? क्या यह सुरक्षा का मतलब केवल राजनैक फोटो ऑफ और सेल्फी लेने तक सीमित है?

सोशल मीडिया की तस्वीरें खुद बयां कर रही है कि भारतीय प्रवासी बंकरों और शेल्टर से वंचित हैं और उन्हें मेट्रो स्टेशन और खुले में सोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट राजू पारुलेकर ने इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए कैप्शन में लिखा इजराइल की गुलामी और सचमुच यही बात हमारे लिए चिंता का विषय है। क्या हमारी विदेश नीति इतनी असहाय हो गई है कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा भी विदेश में दूसरे देश के रहम और मर्जी पर निर्भर हो गई है?

वहीं डनियल नाम के एक यूजर इस फोटो को शेयर करते हुए लिखते हैं इस बीच नरेंद्र मोदी ने तन्याहू की तारीफ की। भारत के लिए कितनी शर्म की बात है। क्या उनमें कोई सेल्फ रिस्पेक्ट नहीं है? सोचिए वही प्रधानमंत्री जो अपनी 56 इंच की छाती और विश्वगुरु की उपाधि के दम पर बड़े-बड़े भाषण देते हैं।

क्या वह इन तस्वीरों और रिपोर्टों को देखकर सिर्फ मौन साधे बैठे हैं? क्या यह वही विश्वगुरु है जो अपने देश की सुरक्षा के लिए गर्व से विदेश दौरे करते हैं। लेकिन जब उनके नागरिक खतरे में हो तो चुप रह जाते हैं। यह पूरी स्थिति ना केवल सवाल खड़ी करती है बल्कि व्यंग भी है। जब हमारे प्रधानमंत्री गर्व से इजराइल की सुरक्षा की बात करते हैं और मंच से कहते हैं कि भारत हमेशा उसके साथ है। वहीं हमारे लोग मेट्रो स्टेशन और खुले में सोने को मजबूर हैं।

अगर यही राजनीतिक साझेदारी है तो भारत की विदेश नीति किसके लिए काम कर रही है? अपने नागरिकों के लिए या सिर्फ दिखावे के लिए?

इजराइल और ईरान का युद्ध ना केवल मध्य पूर्व के लिए खतरा है बल्कि भारत में रहने वालों लाखों प्रवासियों और व्यापारियों के लिए भी खतरा है। लेकिन इस गंभीर स्थिति में भी हमारे प्रधानमंत्री की चुप्पी बताती है कि क्या हमारी विदेश नीति वास्तव में स्वतंत्र और सशक्त है या यह केवल विदेशों में दोस्ती निभाने और अपने इज्जत के लिए खेली जा रही दिखावे की राजनीति है।

सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें और रीट्वीट जैसे राजू पारूलेकर का साफ तौर पर संकेत देते हैं कि भारत के नागरिक जिनकी सुरक्षा सबसे अहम होनी चाहिए वे अपने ही देश के नेता की चुप्पी का शिकार हो रहे हैं। क्या यही वह विश्व गुरु है जिसे हमने अपनी उम्मीदों के सहारे चुना है? क्या यही वो प्रधानमंत्री है जो इजराइल और अमेरिका के सामने झुक कर दिखावा कर रहे हैं?

लेकिन जब बात अपने लोगों की सुरक्षा की आती है तो नजरें झुकी रहती है। इस पूरे मामले को देखकर हमें यह भी सवाल उठाना चाहिए कि क्या यह विदेश नीति है या केवल फोटोग्राफ और भाषणों का खेल। क्या भारत की विदेश नीति अब भी नागरिकों की सुरक्षा और उनकी भलाई पर केंद्रित है या सिर्फ विदेशी मित्रों को खुश करने और अपने अंतरराष्ट्रीय चेहरे को चमकाने की सीमित हो गई है चमकाने तक सीमित हो गई है अगर प्रधानमंत्री इजराइल के साथ गर्व से खड़े हैं तो क्यों नहीं भारत के प्रवासियों के लिए तुरंत कार्रवाई हुई क्या केवल राजनीतिक दिखावा ही काफी है और असली सुरक्षा केवल दूसरे देश के निर्णयों पर निर्भर है इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि हमारी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति केवल फोटो ऑफ मंचों पर भाषण और दिखावटी रिश्तों तक सीमित नहीं रह सकती है।

जब देश के नागरिक खतरे में हो तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह तुरंत सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करें। राजू पारुलेकर जैसे निडर ब्लॉगर और नागरिक पत्रकार हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और जवाब मांगना हमारा अधिकार है। इजराइल की गुलामी सिर्फ एक मजाक या सोशल मीडिया पोस्ट नहीं है बल्कि वास्तविक चेतावनी है।

कि हमारी विदेश नीति और नागरिक सुरक्षा में कितनी खामी है। अंत में इस पूरे मामले में यह सीखने की जरूरत है कि दुनिया में किसी भी l या संकट के बीच सरकार की प्राथमिकता जिम्मेदारी अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होनी चाहिए। अगर सोशल मीडिया पर वायरल यह फोटो हकीकत है तो सरकार को एक्शन लेना चाहिए।

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