लोको पायलट ने इग्नोर किया था रेड सिग्नल… कैसे हुआ बिलासपुर में हादसा?

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सोमवार शाम हुए भीषण रेल हादसे के बाद जांच अब इस दिशा में केंद्रित हो गई है कि मेमू लोकल ट्रेन ने आखिर सिग्नल क्यों तोड़ा? प्रारंभिक जांच में जो संकेत मिले हैं, वह बताते हैं कि ट्रेन ने निर्धारित सिग्नल पार कर दिया और सामने खड़ी मालगाड़ी के पिछले हिस्से से टकरा गई। यही वजह इस दुर्घटना की प्रमुख मानी जा रही है। दरअसल मंगलवार दोपहर मेमो पैसेंजर ट्रेन ने मालगाड़ी को पीछे से टक्कर मार दी।

यह हादसा बिलासपुर स्टेशन के पास शाम करीब 4:00 बजे हुआ जिसमें इस टक्कर से 15 लोगों की मौत हो गई। जबकि कई लोग घायल हुए हैं। टक्कर इतनी भीषण थी कि पैसेंजर ट्रेन का एक कोंच मालगाड़ी के ऊपर ही चढ़ गया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सूत्रों ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या हादसे का कारण मेमो ट्रेन का सिग्नल ओवरशूट करना प्रतीत होता है। रेलवे के ऑपरेशन विभाग के मुताबिक जब ट्रेन बिलासपुर स्टेशन के पास पहुंची उस वक्त सामने वाली लाइन पर एक मालगाड़ी पहले से ही खड़ी थी। ममू ट्रेन का चालक संभवत सिग्नल पर रुक नहीं सका और ट्रेन सीधे मालगाड़ी से जा टकराई।

जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सिग्नल ओवरशूट होने के पीछे तकनीकी खामी थी या मानवीय गलती। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मेमो ट्रेनों में आधुनिक सिग्नलिंग और ब्रेकिंग सिस्टम होता है जिससे इस तरह की चूक कम ही होती है। फिर भी हादसे के वक्त ट्रेन की स्पीड कितनी थी और क्या ब्रेकिंग सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा था इसकी जांच की जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि लोको पायलट की गलती थी या सिस्टम फेलर। हादसे का विश्लेषण किया जा रहा है।

टक्कर के बाद बिलासपुर स्टेशन यारार्ड में अफरातफरी मच गई। राहत और बचाव टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। छह यात्रियों की मौत और दर्जन भर के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। मौके पर रेलवे के उच्च अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद हैं। घटना के बाद रेलवे ने सिग्नलिंग सिस्टम की समग्र जांच के आदेश दिए हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या मेमो ट्रेन के चालक को सही सिग्नल जानकारी समय पर मिली थी या नहीं।

बता दें कि हादसा बिलासपुर स्टेशन से महज कुछ किलोमीटर दूर लाल खदान के पास हुआ। चश्मदीदों के अनुसार मेमो ट्रेन हावड़ा की ओर जा रही तभी विपरीत दिशा से आ रही मालगाड़ी से उसकी भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद मेमो ट्रेन का आगे का डिब्बा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। जबकि मालगाड़ी के इंजन में भी गंभीर नुकसान हुआ है। पटरी से उतरे डिब्बों ने आसपास के क्षेत्रों को युद्ध क्षेत्र जैसा बना दिया। यात्रियों के चीखने चिल्लाने की आवाजें और धुएं का गुब्बार पूरे इलाके में फैल गया। कई यात्री डिब्बों में फंस गए थे। जिन्हें स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों ने किसी तरह बाहर निकाला। रेलवे प्रशासन ने तुरंत हादसे की सूचना मिलते ही आपातकालीन टीमों को रवाना कर दिया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार घायलों के इलाज के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। बिलासपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं।

जहां डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों की देखभाल कर रही है। रेलवे ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि परिजन अपने यात्रियों की जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अलावा एनडीआरएफ और स्थानीय रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हुई हैं। पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने और क्षतिग्रस्त ट्रैक की मरम्मत के लिए ट्रेन और मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हादसे के कारण हावड़ा रूट पर ट्रेन परिचालन पूरी तरह से ठप हो गया है। कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

जबकि कुछ को वैकल्पिक रूटों से डायवर्ट किया गया है। रेलवे ने यात्रियों से धैर्य बनाए रखने और अपडेट्स के लिए आधिकारिक वेबसाइट या ऐप चेक करने की अपील की है। प्रारंभिक जांच में सिग्नल फेल्योर या फिर मानवीय भूल को हादसे का कारण माना जा रहा है। लेकिन विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है। रेल मंत्री ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा भी की है। बिलासपुर रेल हादसे के बाद राहत कार्य में तेजी आ गई है।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें रेलवे और जिला प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। 140 टन की हाईटेक कन से पटरी से उतरे डिब्बों को हटाया जा रहा है। फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने का अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। यात्रियों एवं उनके परिजनों की सुविधा हेतु हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जो आपकी स्क्रीन पर फ्लैश हो रहे हैं। बिलासपुर में इस वक्त बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है कि जैसा कि आप मेरे पीछे देख सकते हैं। यहां मैं यहां मैं दिखाने की कोशिश करूंगा। अभी फिलहाल जो है रेस्क्यू का काम चल रहा है। वहां तीन लोगों के फंसे होने की बात कही जा रही है। तीन लोग 15 लोग वहां पहले फंसे हुए थे जो कि अभी 12 लोगों को निकाल लिया गया है। तीन लोग अभी भी फंसे हुए हैं और बहुत बुरी तरीके से फंसे हुए हैं। जिसकी वजह से गैस कटर वेल्डिंग वाली मशीन जो है उससे उन्हें निकाला जा रहा है। यहां आसपास हमारे काफी सारे ग्रामीण भी मौजूद हैं।

आप थे क्या मौके पे? नहीं अभी हम लोग नहीं था। हम लोग तो अभी आया है। अच्छा अभी आए? हां हम लोग वर्कर है काम करने आए हैं। कितने बजे की घटना है ये? लमसम 4:00 बजे का। 4 बजे का 4:00 बजे का। 4:00 बजे की घटना है। आप लोगों को कब जानकारी हुई इसकी? इस 10 मिनट पहले हम लोगों को जानकारी हुआ। 10 मिनट पहले मतलब अभी आए हुए हैं। हां हां। तो कुछ आसपास जो है वो प्रत्यक्षदर्शी भी ये नहीं बता पा रहे हैं। क्लियर क्लियर कि कितने बजे की घटना है।

क्या हुई थी। लेकिन अभी जितना अभी सामने जो प्रत्यक्ष रूप से देखा जा रहा है सभी घायलों का रेस्क्यू कर लिया गया है। मृतकों की संख्या रजनीश सिंह जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक है उन्होंने चार बताई है। चार लोगों के अभी तक के मरने की बात आई है। जिसमें कुछ बच्चे, कुछ बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल है। लगातार हम यहां पे जुड़े हुए हैं। अभी वहां का ऊपर का जो है वो खोल लिया गया है। कटर से निकाल लिया गया है।

अंदर लोग गए हैं और देखने वाली बात यह होगी कि वहां कितने लोग जो है अंदर से निकालने निकाले जा रहे हैं अभी तो कुल मिलाकर के अभी भी रेस्क्यू का रेस्क्यू का वो चल रहा है और यही एकमात्र अगर कहा जाए तो पूरे रेल रेल मालगाड़ी और जो है यात्री पैसेंजर में यही जगह है जो अभी भी विवादास्पद बनी हुई है क्योंकि फंसे हुए जो लोग हैं वो यहीं है बाकी बाकी सारे लोगों की घायलों की जो है वो रेस्क्यू की जा चुकी है।

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