ईरान इजराइल जंग को थोड़े समय के लिए भूल जाइए क्योंकि पूरे भारत को इस खतरनाक सीक्रेट एजेंट के बारे में पता होना चाहिए। इस वक्त भारत के लिए इससे बड़ी कोई और खबर नहीं हो सकती। भारत ने दुनिया के सबसे खतरनाक जासूस को दबोच लिया है।
इस जासूस ने सीरिया, लीबिया, अफगानिस्तान, इराक और वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिकी सेना की मदद की और अब इसका अगला टारगेट भारत था। शायद पीएम मोदी भी। यह खतरनाक व्यक्ति कौन है और भारत को कितनी बड़ी सफलता मिली है।
हमने आपको खबर दिखाई थी कि भारत की सुरक्षा एजेंसी एनआईए ने सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक अमेरिकन और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल थे। अमेरिकी नागरिक को इमीग्रेशन ब्यूरो ने कोलकाता के हवाई अड्डे पर पकड़ा तो वहीं लखनऊ और दिल्ली के हवाई अड्डों से तीन-तीन यूक्रेनी नागरिकों को दबोचा गया। सूत्रों के मुताबिक इन सभी पर भारत के खिलाफ गतिविधियों की साजिश रचने का आरोप है।
भारत के लिए यह बहुत बड़ी खबर है लेकिन उससे भी बड़ी खबर यह अमेरिकी व्यक्ति है। इसका नाम मैथ्य वेंडाइक है। पकड़े गए सात लोगों में से जो एक अमेरिकी है वो यही मैथ्य वेंडाइक है। आपको बता दें कि मैथ्य वेंडाइक अमेरिकी नागरिक है और अमेरिकी मर्सनरी भी। मर्सरी यानी भाड़े का सैनिक। मैथ्य वेंडाइक को आप अमेरिका का प्राइवेट मिलिट्री ऑपरेटर भी कह सकते हैं। यह पर्दे के पीछे रहकर अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ काम करता था।
मैथ्यू वेंडाइक सनंस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल नाम का एक संगठन चलाता था जो अलग-अलग मिलिटेंट ग्रुप्स को ड्रोन वॉरफेयर और की ट्रेनिंग देता था। यह हथियार भी सप्लाई करता था और चलाने की ट्रेनिंग भी देता था। मैथ्य वेंडाइक ने 2011 में लीबिया के गृह से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसने अमेरिका की सेना के साथ मिलकर गद्दाफी को मरवाया था।
इसके बाद मैथ्यु वेंडाइक ने सीरिया, अफगानिस्तान, इराक और अब वेनेजुएला में गृह युद्ध और सत्ता परिवर्तन कराने में भी अमेरिकी सेना की मदद की। जिस देश में अमेरिकी सेना मैथ्य वेंडाइक को मिशन पर भेजती थी, वहां पर इसका काम उन लोगों और संगठनों की पहचान करना होता था जो अपने देश को ही बर्बाद करने के लिए तैयार थे।
मैथ्यू वेंडाइक का अगला टारगेट भारत था। मैथ्यू वेंडाइक और छह यूक्रेनी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। यह पहले असम पहुंचे और उसके बाद इन्होंने मिजोरम के रिस्ट्रिक्टेड इलाके में प्रवेश किया और फिर यह म्यांमार में दाखिल हो गए। मैथ्य वेंडाइक के नेतृत्व में छह यूक्रेनी जासूसों ने म्यांमार में सक्रिय भारत विरोधी मिलिटेंट ग्रुप से संपर्क किया। म्यांमार के मिलिटेंट्स को और हथियार पहुंचाए गए। भारत से जंग लड़ने की ट्रेनिंग दी गई।
लेकिन अमेरिकी सेना डीप स्टेट और सीआईए के लिए काम करने वाला मैथ्य वेंडायक भारत में दबोचा गया। जो कई देश नहीं कर पाए वो भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने कर दिया। मैथ्य वेंडाइक अगर पकड़ा नहीं जाता तो भारत में बहुत बड़ा बवाल हो सकता था। पिछले साल से जो मणिपुर जल रहा था उसमें ऐसे ही लोगों का हाथ था। इसके टारगेट पर पीएम मोदी भी हो सकते थे। यह भारत के नॉर्थ ईस्ट में आग लगाकर पूरे भारत में गृह जैसी स्थिति पैदा करने की फिराक में था। लेकिन मैथ्यू वेंडायक अब भारत की गिरफ्त में है।
