भगत सिंह की बहन प्रकाश कौर का निधन, भाई की जयंती के दिन ही छोड़ा दुनिया कोस्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद भगत सिंह की सबसे छोटी बहन प्रकाश कौर अब हमारे बीच नहीं रहीं।
96 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, वो भी भाई भगत सिंह की जयंती—28 सितंबर—के ठीक दिन। ये संयोग इतना मार्मिक है कि पूरा देश शोक में डूब गया। प्रकाश कौर ने अपने भाई के सपनों को जिया, उनकी यादों को संजोया और आजादी की लड़ाई की गाथा को जीवंत रखा। उनके जाने से इतिहास का एक अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया।
शहीद भाई की सबसे प्यारी बहनप्रकाश कौर का जन्म 1929 में लायलपुर (अब पाकिस्तान) के भगत सिंह के परिवार में हुआ। भगत सिंह मात्र 23 साल की उम्र में 1931 में फांसी पर चढ़ गए, जब प्रकाश मात्र दो साल की थीं। लेकिन भाई की शहादत की कहानियां उन्होंने मां विद्या वती और परिवार से सुनीं। बड़ा भाई कुलतार सिंह, छोटे भाई कुलवंत सिंह के साथ उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन को करीब से देखा। प्रकाश कौर ने हमेशा कहा, “भाई ने कहा था—देश के लिए जीना ही असली जिंदगी है। मैंने वैसा ही किया।” उनकी आंखों में भगत सिंह की चमक हमेशा बरकरार रही।जीवनभर देश सेवा और संघर्षविभाजन के बाद परिवार भारत आया। प्रकाश कौर ने कभी शादी नहीं की—पूरे जीवन भगत सिंह की विरासत को समर्पित रहीं। जालंधर में रहकर उन्होंने शहीदों के परिवारों की मदद की, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।
भगत सिंह की जयंती पर हर साल कार्यक्रम आयोजित करतीं, युवाओं को देशभक्ति की प्रेरणा देतीं। 2020 में उनकी आत्मकथा भगत सिंह की छोटी बहन की जुबानी छपी, जिसमें बचपन की अनसुनी कहानियां हैं। उन्होंने कभी सरकारी मदद नहीं ली—सादगी से जिया।जयंती के दिन अलविदा28 सितंबर 2026 को जयंती के दिन सुबह सादगीपूर्ण अंतिम संस्कार हुआ।
बेटे अश्वनी कुमार ने बताया, “मां ने कहा था—मैं भाई के पास जा रही हूं।” पंजाब के CM भगवंत मान, BJP नेता ने श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर ट्रिब्यूट की बौछार: “प्रकाश कौर अमर हैं!” भगत सिंह का संदेश—”इंकलाब जिंदाबाद”—उनके जीवन में उतरा। ये निधन सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 1940 के दशक की क्रांति का अंत है।
