भारत को 30 दिनों के लिए राशियन ऑयल खरीदने की इजाजत, क्या ट्रंप चला रहा है देश?

इसी साल फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉन्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदने पर राजी हो गया है। इसीलिए भारत पर 50% से घटाकर सिर्फ 18% टेरिफ लगा रहे हैं। हालांकि बाद में यह 15% हो गया था। बहरहाल अब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसिन का कहना है कि यूएस ने भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति दे दी है।

लेकिन सिर्फ 30 दिनों के लिए। अमेरिका के बयान पर भारत में विपक्ष का सवाल है कि अमेरिका होता कौन है? भारत को इजाजत देने वाला। विपक्ष का सरकार से सवाल है कि क्या अब अमेरिका तय करेगा कि हमें किसके साथ और कितने दिनों के लिए व्यापार करना है। 6 मार्च की सुबह अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसन ने एक्सपर्ट लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा नीति की वजह से तेल और गैस का उत्पादन अब तक के सबसे अच्छे स्तर पर है। ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को बनाए रखने के लिए अमेरिकी वित्त विभाग भारतीय रिफाइनरीज को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे रहा है। रूस से तेल खरीदने की अस्थाई छूट सिर्फ 30 दिनों के लिए है।

हमारा फैसला कम समय के लिए है। इसीलिए इससे रूसी सरकार को कोई फायदा नहीं मिलेगा। यह फैसला उन तेल सौदों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में फंसे हुए हैं। यह बयान आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा, अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारत को 30 दिन के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है। यह हमारी स्वतंत्रता और संप्रभुता पर करारा तमाचा है। अमेरिका कौन होता है? हमें अनुमति देने वाला। इसी एनर्जी सिक्योरिटी के बारे में राहुल गांधी लगातार आगाह कर रहे हैं। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी सरकार में भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता को प्रतिदिन खतरे में डाला जा रहा है। रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अमेरिका की अनुमति की आवश्यकता क्यों है? ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका युद्ध विराम की घोषणा करेगा। अमेरिका भारत को ईरान से तेल ना खरीदने का निर्देश देगा। अमेरिका भारत को रूस से तेल ना खरीदने का निर्देश देगा और तब तक प्रतिबंध लगाएगा जब तक मोदी सरकार झुककर रूस से तेल नहीं खरीदने की घोषणा ना कर दे।

क्या अब अमेरिका मोदी सरकार को 30 दिनों की अवधि के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति देगा? अमेरिका पहले भारत के साथ फ्रेमवर्क व्यापार समझौता की घोषणा करेगा। क्या दिल्ली में कोई सरकार है? राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तंज कसते हुए लिखा कि भारत लोकतंत्र की जननी है। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए तेल खरीदने की अनुमति दी। हमारा आत्मनिर्भर भारत, हमारी स्वतंत्र विदेश नीति। याद दिला दें कि अमेरिका ने भारत पर 50% टेरिफ लगाया था। 25% रेसिप्रोकल टेरिफ और बाकी का 25% पेनल्टी के तौर पर। क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता था। फिर इसी साल टेरिफ को घटाकर 50 से 15% कर दिया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदने पर राजी हो गया है। इसीलिए ट्रेड डील की जा रही है और इसीलिए टेरिफ को कम किया जा रहा है।

ट्रंप के इसी दावे के दम पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हैं कि वह अमेरिका के दबाव में झुक गए हैं। हालांकि भारत को 30 दिन की छूट ऐसे समय में मिली है जब दुनिया एनर्जी सप्लाई को लेकर कमजोर है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष चल रहा है। ईरान ने कथित तौर पर स्टेट ऑफ हॉर्मोस को ब्लॉक कर रखा है। यह वही रास्ता है जहां से ज्यादातर तेल दुनिया भर में सप्लाई होता है। भारत में भी लगभग 40% तेल इसी रूट से आता है जिसे ब्लॉक किए जाने की खबर है। अब ऐसे में अगर भारत के लिए दूसरा रास्ता खुल रहा है तो यह राहत की बात है क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के पास सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल बचा है।

इससे पहले कि देश में तेल की किल्लत शुरू हो जाए 30 दिनों के लिए दूसरा ऑप्शन खुल गया है। हालांकि विपक्ष का अभी भी सरकार से यही सवाल है कि हमें व्यापार की इजाजत देने वाला अमेरिका कौन होता है?

Leave a Comment