सरकार की जिद पर क्रिकेट की कुर्बानीः बांग्लादेश का विश्वकप से हटने का फैसला, बीसीबी की आय 60% घटने की आशंका

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए आगामी विश्वकप से हटने का ऐलान कर दिया। इसका कारण बताया जा रहा है सरकार की जिद, जिसने क्रिकेट गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी। इस कदम से BCB की आय में 60% तक की कमी आने की आशंका है, जो बांग्लादेश क्रिकेट के भविष्य के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।सरकार की जिद और क्रिकेट का बलिदानबांग्लादेश में चल रही राजनीतिक अस्थिरता के बीच सरकार ने क्रिकेट को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला देकर रोक दिया।

BCB ने ICC को पत्र लिखकर बताया कि सरकारी आदेशों के चलते विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेना असंभव हो गया।

क्रिकेटरों की ट्रेनिंग, मैच और विदेशी दौरों पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई है। BCB चीफ ने कहा, “हम क्रिकेट के लिए कुर्बान हो रहे हैं, लेकिन सरकार की जिद के आगे मजबूर हैं।” यह फैसला 2026 विश्वकप के लिए बड़ा झटका है, जहां बांग्लादेश ग्रुप स्टेज तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा था।BCB की आय पर 60% का असरक्रिकेट बांग्लादेश की सबसे बड़ी कमाई का जरिया है।

BCB की सालाना आय का बड़ा हिस्सा ब्रॉडकास्टिंग राइट्स, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से आता है। विश्वकप से हटने से मैच फीस, सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और इंटरनेशनल सीरीज की कमाई रुक जाएगी। अनुमान है कि 60% रेवेन्यू लॉस होगा, जिससे युवा क्रिकेटरों का सफर मुश्किल हो जाएगा। BCB ने ICC से फाइनेंशियल हेल्प मांगी है, लेकिन जवाब का इंतजार।

घरेलू लीग BPL भी खतरे में है, जो BCB की कमर तोड़ सकती है।क्रिकेटरों और फैंस का गुस्साताशकीन अहमद, शाकिब अल हसन जैसे स्टार्स ने फैसले पर निराशा जताई। शाकिब ने सोशल मीडिया पर लिखा, “क्रिकेट हमारा जुनून है, इसे राजनीति से दूर रखो।” फैंस सड़कों पर उतर आए, #SaveBangladeshCricket ट्रेंड कर रहा।

पूर्व कप्तान मशरफे मुर्तजा ने सरकार से अपील की, “क्रिकेट राष्ट्र का गौरव है।” विश्वकप से बाहर होने से बांग्लादेश का रैंकिंग भी गिरेगा।भविष्य की राहत की उम्मीदयह फैसला एशियाई क्रिकेट के लिए खतरे की घंटी है।

पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश सतर्क हो गए। BCB अब डिप्लोमेसी की कोशिश कर रहा, लेकिन सरकार नरम होने को तैयार नहीं। विशेषज्ञ कहते हैं, “क्रिकेट ने बांग्लादेश को पहचान दी, अब उसी की कुर्बानी हो रही।” उम्मीद है राजनीतिक हालात सुधरें और क्रिकेट लौटे।

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