बांग्लादेश में हिंदू के साथ हुई घटना, आरोपी बोला ‘वो मजाक था’

बांग्लादेश में उसी जिले में एक और जहा दीपू चंद्र दास को भीड़ ने कर मार डाला था। शख्स का नाम है बजेंद्र बिश्वास। बजेंद्र बांग्लादेश के मैम सिंह जिले में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक बजेंद्र विश्वास की फैक्ट्री के अंदर ही मारकर कर दी गई।

बताया जा रहा है कि यह पिछले दो हफ्तों में उस इलाके में किसी हिंदू की तीसरी है। बजेंद्र की निधन के बाद एक सवाल है। क्या बांग्लादेश की यह घटना टारगेटेड किलिंग है? क्या धर्म देखकर बजेंद्र को मार दिया गया?

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 पर मेहराबाड़ी इलाके में सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड की फैक्ट्री में यह वारदात हुई। पुलिस का कहना है कि बजेंद्र विश्वास और नोमान मियां दोनों फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में सिक्योरिटी ड्यूटी पर तैनात थे। बातचीत के दौरान नुमान मियां ने सरकारी मजाक में बजेंद्र की ओर तान दी। इसी दौरान अचानक चल गई जो बजेंद्र की बाई जांघ में लग गई। लगते ही बजेंद्र को अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। पुलिस पूछताछ में आरोपी नोमान मियां ने कहा कि मैं तो मजाक कर रहा था।

इलाके के थाना प्रभारी एमडी जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और घटना में इस्तेमाल की गई सरकारी बंदूक भी ज्त कर ली गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मैम सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले में आगे की कानूनी कारवाई की जा रही है।

इस घटना के बाद से बालुका इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। मेहराबाड़ी का यह इलाका जहां बजेंद्र की मौत हुई वह मास्टरबाड़ी इलाके से महज 20 कि.मी. की दूरी पर है।

मास्टरबाड़ी इलाके की एक फैक्ट्री में काम करने वाले दीपपू चंद्र दास को ई निंदा के आरोप में भीड़ ने पीट कर मार डाला था। उनकी हत्या के बाद शव को पेड़ पर लटकाया गया था। फिर शव को दिया गया था। बांग्लादेश में 24 दिसंबर की रात अमृत मंडल नाम के शख्स की भीड़ ने पीटकर कर दी थी। अंतरिम सरकार की ओर से दावा किया गया था कि अमृत अपराधी था। उस पर केस भी दर्ज था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजाबाड़ी जिले का रहने वाला अमृत मंडल अपने साथियों के साथ शहीद के घर पहुंचा।

वहां फिरौती मांगने लगा। इसके घर वालों ने शोर मचाया तो ग्रामीण इकट्ठा हो गए। बांग्लादेश प्रशासन की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक अमृत मंडल की के बाकी सदस्य तो भाग गए लेकिन अमृत मंडल उर्फ़ सम्राट पकड़ा गया। जिसके [संगीत] बाद भीड़ ने उसे बुरी तरह पीटा। जब पुलिस को इस मामले की सूचना मिली तो मौके पर टीम पहुंची। वहां से उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान अमृत मंडल की मौत हो गई।

ऐसी और भी कई खबरें बांग्लादेश से सामने आई। कभी अखबारों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया जाता है। कभी भीड़ किसी को निशाना बनाकर मार डालती है। क्योंकि दीपू चंद्र दास के मामले में जब जांच की गई तो एजेंसियों ने कहा कि ई निंदा का कोई सबूत नहीं मिला। पर अंतरिम सरकार अफसोस को माथे पर लादकर खुद को साफ सुथरा दिखाने की कोशिश करती है।

लेकिन कब तक यह सब कुछ चलता रहेगा? अल्पसंख्यकों को कब तक निशाना बनाया जाता रहेगा? बस्तियों को जलाया जाता रहेगा। पोस्टर्स छपवाकर हिंदू मोहल्लों को चेतावनी दी जाती रहेगी। बहरहाल बजेंद्र केस में क्या उसे जानबूझकर मौत के घाट उतारा गया या सच में यह हादसा था। कैसे ही पता चलेगा?

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