कहा गई वो मासूम परी? बेबी फरीदा की पूरी जिंदगी की कहानी

बेबी फरीदा, 60 साल के दशक के बाल कलाकारों में एक बड़ा नाम। एक दशक के इतिहास में 60 साल की 60 फिल्मों में प्रदर्शन करने वाली इस बाल कलाकार को भला कौन भूल सकता है? 60-70 के दशक में इन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। गुरुदत्त, देवानंद साहब, शम्मी कपूर, वहीदा रहमान, आशा पारिक जैसे मशहूर कलाकारों के साथ काम किया। लेकिन आज हम आपको हमारी वीडियो में इनके हाथ से रूबरू करवाने वाले हैं कि आखिर यह बाल कलाकार आज कहां और किस हाल में हैं। तो चलिए बिना वक्त गवाए शुरू करते हैं आज की हमारी इस वीडियो को।

लेकिन उससे पहले अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें। बेबी फरीदा जी का जन्म 8 जून 1952 को एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता भी डेमोक्रेट ही थे और पले भड़े थे। लेकिन मूल रूप से वे दोनों उत्तर प्रदेश के थे। मां का परिवार नोएडा से था और पिता का ताल्लुक तत्कालीन इलांगला से। तीन भाई और तीन राजपूताना में फरीदा जी तीसरे नंबर पर रही। फरीदा जी बताती हैं फिल्मों से हमारे परिवार का दूर तक कोई रिश्ता नहीं था। ना ही किसी फिल्म वाले से हमारा कोई परिचय था।

फिल्मों में करने का कभी मन में अभिनय तक नहीं आया था। लेकिन अनोखे नमूने ऐसे बने कि किसी खास कोशिश के ही फिल्मों में मेरी एंट्री हुई और फिर मैंने बिना शिशलाकार का शो छोड़ दिया। हम सब बच्चे रोज शामपुरी पश्चिम के लल्लू भाई पार्क में काम करते थे। वहां ही प्रसिद्ध अभिनेता के नाम अदीप थे। वह रोजाना मुझे पार्क में रोज देखते थे। एक वो बात मेरी मां से मिली और देखने लगी कि फिल्म में बाल कलाकारों की जरूरत है।

मां मुझे वहां लेकर आई थी। शशिधर मुखर्जी ने फिल्मस्तान में से अलग साल 1958 में अंधेरी के अंबोली इलाके में फिल्म की बुनियाद रखी थी। फरीदा जी के अनुसार उन दिनों फिल्म के बैनर की पहली फिल्म चैरिटी मास्टर बन रही थी। उस फिल्म के मुख्य किरदार में दिलीप कुमार और शांता आपटे थे और फरीदा जी को शांता आपटे की बेटी की भूमिका के लिए चुना गया था। लेकिन कुछ वजहों से फिल्म चैरिटी मास्टर बन नहीं पाई। पुराने दिनों में फरीदा जी को गुरुदत्त की फिल्म कागज के फूल के बालगीत 1 2 3 4 और पांच में काम करने का मौका मिला। फरीदा जी कहती हैं, पहली नजर में तो गुरुदत्त ने मुझे यह किरदार वापस दे दिया था कि गीत की मांग के अनुसार मैं गरीब घर की नहीं बनी। लेकिन फिर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। इस गीत में मेरे साथ बेबी नास भी थी। नास के पता के जरिए मैं विमल रॉय तक पहुंची। उन्होंने मुझे फिल्म सुजाता की एक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना। कागज के फूल और सुजाता दोनों ही फिल्में साल 1959 में रिलीज़ हुई थी। लेकिन सुजाता पहले रिलीज़ हुई। इसीलिए इसे बेबी फरीदा की पहली फिल्म माना जाता है। सुजाता की सफलता का फरीदा जी को बहुत लाभ मिला और उन्हें लगातार फिल्में मिलने लगी। इनमें महबूद की सन ऑफ इंडिया राज कपूर की संगम एलवी प्रसाद की बेटे बेटे और राजश्री की दोस्ती के अलावा कल्पना उसने कहा था छाया काबुली वाला मनमौजी जानवर जबजब फूल खिले राम और श्याम और रात और दिन जैसी हिट फिल्में भी शामिल थी।

1962 के भारत चीन की पृष्ठभूमि पर बनी बालचित्र समिति के फिल्म दिल्ली की कहानी के लिए फरीदा जी को डॉ. राजेंद्र प्रसाद के हाथों राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। जिसे वह अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। फिल्म बेटे-बेटे के लिए उन्होंने रूसी सरकार का और जब-जब फूल खिले के लिए आंध्र प्रदेश सरकार का पुरस्कार हासिल किया। राम और श्याम तीन बहू रानियां और ब्रह्मचारी उनके बचपन के दौर की अंतिम प्रदर्शित फिल्में थी। फरीदा जी बताती हैं डॉक्टर का पेशा मुझे शुरू से ही अपनी ओर आकर्षित करता था। इसीलिए एक समय ऐसा आया जब मैंने सब कुछ भुलाकर अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया। उन दिनों सर पर बस एक ही धुन सवार थी कि मुझे डॉक्टर बनना है।

यही वजह है कि मैंने राज कपूर की फिल्म बॉबी और आचरी प्रोडक्शन की फिल्म उपहार की मुख्य भूमिकाएं ठुकराने में देर नहीं की। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर बनने का मेरा सपना पूरा नहीं हो पाया। उस दौर में फरीदा जी की बहन बेबी गुड्डी और भाई मास्टर शाहिद और मास्टर जावेद भी हिंदी फिल्मों में बतौर बाल कलाकार अपनी खासी पहचान बना चुके थे। मास्टर शाहिद ने फिल्म लव इन टोक्यो और बेबी गुड्डी ने फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा समेत कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थी। बेबी फरीदा, मास्टर शाहिद और बेबी गुड्डी इन तीनों भाई बहनों ने फिल्म ब्रह्मचारी में एक साथ काम किया था। उधर मास्टर जावेद ने सट्टा बाजार मुझे जीने दो और वक्त जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई। बेबी गुड्डी जिनका असली नाम फौजिया है। अब भोपाल में रहती हैं। मास्टर शाहिद चार्टर्ड अकाउंट हैं और वह सऊदी अरेबिया में रहते हैं। मास्टर जावेद इंटीरियर डिजाइनर थे जो अब जीवित नहीं हैं। साल 2006 में उनका निधन हो गया। फरीदा जी बताती हैं साल 1971 में मेरा विवाह हुआ तो मैं पूरी तरह से अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त थी। दिलीप साहब और सायरा बानो से पारिवारिक संबंध थे।

इसीलिए जब सायरा जी ने इस दुनिया के सितारे और जरा देखो तो इनका कमाल जैसे टेलीविजन कार्यक्रम बनाए तो मैं इनके साथ कैमरे के पीछे रहकर काम करती रही। और जब बेटी और बेटे की शादी होने के बाद जिम्मेदारी से मुक्त हुई तो समय बिताने के लिए एक बार फिर से कैमरे के सामने आ खड़ी हुई। साल 2003 में सिनेविस्टा कंपनी के धारा संजीवनी से मैंने अभिनय के दूसरे दौर की शुरुआत की और देखते ही देखते कब व्यस्त हो गई पता ही नहीं चला। छोटे पर्दे पर किसे अपना कहें साथिया क्राइम पेट्रोल यही तो है वह कभी तो नजर मिलाओ। बाली उम्र को सलाम से लेकर इच्छाधारी नागिन और तंत्र जैसे धारावाहिकों और ढोल, सावरिया, थ्री इडियट्स, रहस्य और जलेबी जैसी फिल्मों में काम कर चुकी हूं और अभी भी कर रही हूं। फरीदा जी के पति गुजराती हैं और पेशे से बिल्डर हैं। उनकी बेटी अपने पति और दो बच्चों के साथ कुवैत में रहती हैं। बेटे की शादी फौजिया की बेटी से हुई है और बेटे बहू की तीन बेटियां हैं। फरीदा जी का कहना है, वक्त के साथ-साथ जो कुछ मिलता गया, मैं उसे कबूल करती चली गई।

यही वजह है कि जो नहीं मिल पाया मुझे उसका अफसोस नहीं है। खुशी इस बात की है कि अभिनय के इस दूसरे दौर में भी अच्छा काम और सम्मान मिल रहा है। बस इससे ज्यादा और क्या ही चाहिए। उन्होंने 60 के दशक में फिल्मों में एक बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया और वह सबसे अधिक मांगी वाली बाल कलाकार अभिनेत्री भी रही हैं। उन्होंने फिल्म सुजाता 1960 में युवा सुशला के रूप में अपनी शुरुआत की जब वह 8 साल की थी। एक बाल कलाकार के रूप में उनकी सबसे यादगार भूमिकाएं दोस्ती, राम और श्याम, ब्रह्मचारी, संगम, काबुलीवाला, जब-जब फूल खिले, फूल और पत्थर और विमल रॉय, राज कपूर के आसिफ, महबूब खान और गुरुदत्त जैसे निर्देशकों के साथ काम किया। और इन फिल्मों से खूब लोकप्रियता हासिल की। लेकिन आज फरीदा दादी की उम्र 72 साल की हो चुकी है। जैसा कि आप इनकी तस्वीरों में उनकी उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं। आज भी इन्होंने अपने करियर को जारी रखा है और इन्हें धारावाहिकों में दादी नानी के किरदारों में दिखा जाता रहा है। तो दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगले वीडियो

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