आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दिन है। मेरा अग्निवेश, मेरा 49 साल का बेटा आज हमारे बीच नहीं रहा। एक पिता के कंधे पर बेटी की अर्थी जाना इससे बड़ा दुख शायद जीवन में कुछ नहीं हो सकता। यह सिर्फ एक पोस्ट नहीं, यह एक पिता की टूटती हुई सांसों की आवाज है। जिस अनिल अग्रवाल ने खाली हाथ मुंबई जाकर अरबों का साम्राज्य खड़ा किया।
आज उसी मेटल किंग की दुनिया उजड़ गई है। अमेरिका में हुए स्किन हादसे के बाद 49 साल की उम्र में अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया। देश आज एक सफल कारोबारी को नहीं बल्कि एक ऐसे पिता को देख रहा है जो अपने बेटे को नहीं अपने भविष्य को खो बैठा है। देश के दिग्गज उद्योगपति और वेदता ग्रुप के फाउंडर चेयरमैन अनिल अग्रवाल के जीवन में ऐसा दुख आया है जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं। 49 साल की उम्र में उनके इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया।
बताया जा रहा है कि स्कीम के दौरान हुए हादसे के बाद अग्निवेश का न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि खतरा टल चुका है। लेकिन तभी अचानक आए कार्डियक आरेस्ट से सब कुछ छीन गया। इस असहनीय दर्द को अनिल अग्रवाल ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर शब्दों में उतारा। बेटे के साथ तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने लिखा आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधेरा दिन है। मेरा बेटा मुझसे बहुत जल्दी चला गया। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख कुछ नहीं हो सकता। बेटा पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। यह पोस्ट सिर्फ एक कारोबारी का बयान नहीं बल्कि एक टूटे हुए पिता की चीख थी।
अनिल अग्रवाल ने उस पल को भी याद किया जब 3 जून 1976 को पटना में अग्निवेश का जन्म हुआ था। एक मिडिल क्लास बिहारी परिवार में जन्मा हुआ यह बच्चा आगे चलकर वैश्विक कारोबारी दुनिया में अपनी पहचान बनाएगा शायद तब किसी ने नहीं सोचा था। अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश सिर्फ एक सफल कारोबारी नहीं बल्कि एक संवेदनशील इंसान थे।
एक खिलाड़ी, एक संगीत प्रेमी, एक लीडर मायो कॉलेज अजमेर से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने फ्यूजेरा गोल्ड जैसी प्रतिष्ठित कंपनी खड़ी की। वे हिंदुस्तान जिंग के चेयरमैन रहे और वेदांता समूह की कई इकाइयों से जुड़े रहे। पर इन सब उपलब्धियों से ऊपर वे अपने पिता के लिए एक दोस्त थे। अनिल अग्रवाल के शब्दों में अगर कहें तो वो मेरे लिए सिर्फ बेटा नहीं मेरा गर्व मेरी दुनिया था। इस गहरे दुख के बीच अनिल अग्रवाल और उनकी पत्नी किरण अग्रवाल पूरी तरह टूट चुके हैं। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि इस दुख में भी वे खुद को याद दिला रहे हैं कि वेदांता में काम करने वाले हजारों युवा भी उनके बच्चे जैसे हैं। अग्निवेश का सपना था आत्मनिर्भर भारत। वे अक्सर अपने पिता से कहा करते थे पापा हमारे देश में किसी चीज की कमी नहीं है।
फिर हम पीछे क्यों रह रहे? पिता पुत्र का सपना था कि कोई बच्चा भूखा ना सोए। कोई बच्चा शिक्षा से वंचित ना रहे। हर महिला आत्मनिर्भर बने। हर युवा को सम्मानजनक रोजगार मिले। अनिल अग्रवाल ने यह भी लिखा कि उन्होंने अग्निवेश से वादा किया था कि वे अपनी कमाई का 75% समाज को लौटाएंगे। बेटे की मौत के बाद उन्होंने इस संकल्प को दोहराया और कहा कि वे और भी सादा जीवन जिएंगे। इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा अग्निवेश अग्रवाल का असमय निधन बेहद चौंकाने वाला और दुखद है। अपनी भावुक श्रद्धांजलि में आपके दुख की गहराई साफ झलकती है। ईश्वर आपको और आपके परिवार को शक्ति दे। ओम शांति। परिवार और कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अग्निवेश अग्रवाल वेदांता समूह की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड यानी कि टीएसपीएल के बोर्ड में शामिल थे।
उनकी बहन प्रिया अग्रवाल वेदता के बोर्ड में शामिल हैं और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयर पर्सन है। कभी पटना के मिलर स्कूल से पढ़ाई करने वाला अनिल अग्रवाल जो 20 साल की उम्र में सिर्फ एक टिफिन बॉक्स लेकर मुंबई पहुंचा था। आज देश के सबसे अमीर उद्योगपतियों में शामिल है। लेकिन आज सारी दौलत, सारा साम्राज्य एक पिता के सवाल के सामने बौना पड़ गया है। मैं तुम्हारे बिना इस रास्ते पर कैसे चलूं बेटा? अनिल अग्रवाल ने लिखा, मैं कोशिश करूंगा तुम्हारी रोशनी को आगे लेकर चलने की।
यह सिर्फ एक बेटे की मौत नहीं यह एक पिता के सपनों, उम्मीदों और भविष्य का टूट जाना है। अग्निवेश की मौत के बाद पूरा अग्रवाल परिवार टूट चुका है और दुनिया भर से पूरे भारत और दुनिया भर से तमाम तरीके की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही है। शो सभी लोग अपना अपनी-अपनी तरफ से शोक व्यक्त कर रहे हैं। लेकिन एक पिता अपना बेटा खो चुका है और उसे यह बार-बार सता रहा है यही डर कि आखिर अब आगे की जिंदगी कैसे गुजरेगी।
