पहले वह ब्रिटेन के शाही परिवार के राजकुमार थे। फिर उन्हें सिर्फ एंड्रियो माउंटबेटन विंड से कहा जाने लगा। और अब थेम्स वैली पुलिस के बयान में उनका परिचय था नरफोग का 60 साल का एक आदमी। ब्रिटेन के पूर्व प्रिंस एंड्रियो को 19 फरवरी की सुबह करीब 8:00 बजे नरफोग के मौजूदा स्रिंघम स्टेट पर छापे के दौरान गिरफ्तार किया गया। वो पहले विंडसर के रॉयल लॉज में रहते थे। लेकिन वहां से हटाए जाने के बाद स्रिंघम में रह रहे थे।
पुलिस ने कहा है कि उन्हें सरकारी पद पर दुराचार यानी मिसकंडक्ट इन पब्लिक ऑफिस के शक में हिरासत में लिया गया है। यह केस हाल ही में सामने आए एफसीन फाइल्स से जुड़ा बताया जा रहा है। दस्तावेजों में संकेत मिला है कि जब एंड्रियो ब्रिटेन के ट्रेड एनवॉय थे तब उन्होंने सरकार की सीक्रेट जानकारी जेफरी एपस्टीन को भेजी थी। एप्सिन एक अमेरिकी फाइनेंसर था और पहले से यौन अपराधों में दोषी करार दिया जा चुका था। ट्रेड एनवॉय को आधिकारिक गोपनीयता कानून के तहत संवेदनशील दस्तावेज दिए जाते हैं और उन्हें सख्ती से गोपनीयता रखनी होती है।
कहानी का सबसे अहम पल 30 नवंबर 2010 का बताया जाता है। दोपहर 2:57 पर उन्हें एक ईमेल मिला जिसमें उनके एशिया दौरे, हांगकांग, शेन, वियतनाम और सिंगापुर की पूरी जानकारी थी। ठीक 5 मिनट बाद 3:02 पर यही ईमेल उन्होंने जेफरी एस्टीन को फॉरवर्ड कर दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि वही फैसला और ऐसे कई और फैसले आज उनके सामने कटघरे में खड़े हैं। उन्हें उनके 67वें जन्मदिन की सुबह गिरफ्तार किया गया। पुलिस उनके घरों की तलाशी ले रही है। अभी औपचारिक आरोपों की पूरी लिस्ट जारी नहीं हुई है। लेकिन माना जा रहा है कि मामला संवेदनशील जानकारी साझा करने से जुड़ा हुआ ही है। ऐसे तो इस अपराध में अधिकतम सजा उम्र कैद तक हो सकती है। लेकिन प्रिंस एंड्रियो को फिलहाल थोड़ी राहत मिल चुकी है। 19 फरवरी की शाम करीब 7:00 बजे उन्हें जांच के तहत रिहा कर दिया गया। उनके खिलाफ कोई केस भी दर्ज नहीं हुआ है। इसे रिलीज अंडर इन्वेस्टिगेशन कहते हैं। मतलब उन्हें पुलिस हिरासत में बिना जमानत की शर्त के छोड़ा गया है। यानी फिलहाल उन्हें दोबारा थाने में हाजिरी लगाने की कोई भी जरूरत नहीं है। लेकिन पुलिस की जांच अभी भी जारी है। इसलिए आगे चलकर इस मामले में पुलिस उनसे दोबारा संपर्क कर सकती है। 11 घंटे पुलिस हिरासत से बाहर आने के बाद एंड्रियो की एक घबराई हुई तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लेकिन असली सवाल अब शुरू हुए हैं। क्या इस गिरफ्तारी से ब्रिटेन की सदियों पुरानी राजशाही हिल जाएगी? पिछले साल यानी 2025 में एंड्रियो से ड्यूक ऑफ यॉर्क और प्रिंस की उपाधि ले ली गई थी। यानी अब वे आधिकारिक तौर पर शाही जिम्मेदारियों से बाहर हैं। एंड्र्यू अभी भी ब्रिटिश सिंहासन हासिल करने की कतार में आठवें नंबर पर बने हुए हैं।
राजनीतिक गलियारों में अब यह बहस चल रही है कि क्या उन्हें औपचारिक तौर पर सिंहासन के उत्तराधिकारी की लिस्ट से भी हटा लिया जाना चाहिए। 2026 के फरवरी महीने में वे अपने पुराने घर से निकलकर नॉर्थ के स्रिंगम एस्टेट के वुड फार्म्स में रहने लगे थे। यह उनके पिता प्रिंस फिलिप का पसंदीदा जगह थी। यहीं से 19 फरवरी को उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है। आखिरी बार किसी बड़े शाही व्यक्ति को 1647 में गिरफ्तार किया गया था। इनका नाम था किंग चार्ल्स फर्स्ट। इंग्लिश सिविल वॉर में शाही सेना की हार के बाद संसदीय बलों ने उन्हें पकड़ लिया था।
जनवरी 1649 में उन्हें वेस्टमिनस्टर हॉल में मुकदमा का सामना करना पड़ा था। चार्ल्स ने अदालत की वैधता को ही मानने से इंकार कर दिया था। उनका तर्क था कि एक राजा की सत्ता सीधे भगवान से आती है। इसलिए किसी भी अदालत को उस पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार ही नहीं हो सकता। लेकिन उनकी आपत्तियों के बावजूद उन्हें देशद्रोह और अत्याचार का दोषी ठहराया गया। बाद में 30 जनवरी 1649 को उन्हें फांसी दे दी गई। ये इकलौते ब्रिटिश सम्राट थे जिन्हें अदालत के फैसले के बाद मौत की सजा दी गई। किंग चार्ल्स के अलावा भी राजघराने ने कुछ झटके देखे हैं। 1936 में एडवर्ड एट ने एक अमेरिकी तलाकशुदा महिला वॉलस सिमसन से शादी के लिए गद्दी छोड़ दी थी। 2020 में प्रिंस हैरी और मेघन मार्कर ने शाही जिम्मेदारियां छोड़ दी।
इसके अलावा भी कुछ शाही सदस्यों पर छोटे-मोटे केस लगे हैं। लेकिन बात कभी गिरफ्तारी तक नहीं पहुंची। बहरहाल एंड्रियो की गिरफ्तारी पर किंग चार्ल्स थर्ड ने कहा है कि कानून अपना काम करेगा और शाही परिवार जांच में सहयोग करेगा। लेकिन आग लगी है तो धुआं दूर तक जाएगा ही। एंड्रियो की गिरफ्तारी को कई लोग राजशाही के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। सर्वे बताते हैं कि 1983 में 86% लोग राजशाही को जरूरी मानते थे।
लेकिन अब यह आंकड़ा करीब 51% ही रह गया है। कुछ लोग इसे एक अच्छी बात भी कह रहे हैं। उनका मानना है कि अगर जांच सही तरीके से होती है तो यह दिखाएगा कि कानून सबके लिए बराबर है और शाही परिवार को कोई स्पेशल स्टेटस नहीं दिया जाता है। लेकिन अगर और गंभीर खुलासे हुए तो यह राजघराने के लिए बड़ी मुश्किल बन सकता है।
