क्या अमूल का दही सेफ और हेल्दी नहीं है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि अमूल मस्ती दही क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गया है। यहां हम कप वाले दही की बात नहीं कर रहे पाउच में मिलने वाले दही की बात कर रहे हैं यानी पैकेट वाला दही। ट्रस्टिफाइड नाम का एक यूट्यूब चैनल है इस पर 4 जनवरी 2026 को एक वीडियो अपलोड हुआ। वीडियो में बताया गया कि चैनल ने अमूल मस्ती दही का लैब टेस्ट करवाया।
पाउच और कफ वाले दही दोनों का। लैब रिपोर्ट से क्या-क्या पता चला बताते हैं। पहले पाउच वाले दही की बात कर लेते हैं जो 390 ग्राम का आता है। अमूल का दावा है कि हर 100 ग्राम पर इस दही में 4 ग्राम प्रोटीन होता है। लेकिन लैब में निकला 4.95 ग्राम प्रोटीन जो अच्छी बात है। कार्बोहाइड्रेट का दावा 4.6 ग्राम है। यह निकला 5.62 ग्राम। वहीं हर 100 ग्राम पर फैट 3.1 ग्राम होना चाहिए। लेकिन निकला 3.53 ग्राम। इसी तरह सैचुरेटेड फैट भी थोड़ा ज्यादा मिला। वैसे प्रोटीन, कार्ब्स, फैट और सैचुरेटेड फैट की मात्रा में बहुत फर्क नहीं है।
लेकिन इसमें दो ऐसी चीजें भी मिली हैं जिनकी मात्रा बहुत ज्यादा है। एफएसएसएआई यानी कि फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की सेफ लिमिट से कहीं ज्यादा। यह हैं कोलफर्म बैक्टीरिया, यीस्ट और मोल्ड। यीस्ट और मोल्ड फंगस हैं। एफएसएसआई के मुताबिक प्रोडक्ट में 10 कॉलोनी फॉर्मिंग यूनिट्स पर ग्राम से ज्यादा कोिफॉर्म बैक्टीरिया नहीं होना चाहिए। लेकिन निकला 21,000 कॉलोनी फॉर्मिंग यूनिट्स पर ग्राम। यानी मानक से 2100 गुना ज्यादा। वहीं यीस्ट और मोल्ड की सेफ लिमिट है 50 कॉलोनी फॉर्मिंग यूनिट्स पर ग्राम। लेकिन अमूल के पाउच वाले मसी दही में मिला कितना?
3000 कॉलोनी फॉर्मिंग यूनिट्स पर ग्राम। यानी तय सीमा से करीब 60 गुना ज्यादा। जहां तक कप वाले अमूल दही की बात है तो उसमें प्रोटीन, कार्ब्स और फैट्स थोड़े ज्यादा मिले लेकिन बाकी सब एकदम सही था। यानी यह लैब टेस्ट में पास हो गया। लेकिन पाउच वाला दही फेल हो गया।
जब ट्रस्टिफाइड का यह वीडियो आया तो बवाल मच गया। अमूल ने अगले ही दिन यानी 5 जनवरी को सफाई पेश की। कहा कि दही एक लाइफ प्रोडक्ट है जिसमें हेल्दी बैक्टीरिया होते हैं। इसलिए इसे पैक पर लिखे निर्देशों के हिसाब से ही हैंडल करना चाहिए। कंपनी को नहीं पता कि सैंपल कैसे लिया गया और टेस्टिंग से पहले उसे कैसे हैंडल किया गया। यह भी कहा कि अमूल मस्ती दही एफएससीआई के सभी नियमों और कंपनी के इंटरनल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता है। अमूल मस्ती दही आईएसओ सर्टिफाइड डेयरी प्लांट्स में बनता है और बाजार में जाने से पहले 50 से ज्यादा सख्त क्वालिटी टेस्ट से गुजरता है।
इसमें कई हाइजीन रिलेटेड टेस्ट भी शामिल है। इसके बाद ही इसे ग्राहक तक पहुंचाया जाता है। अमूल का कहना है कि अमूल मस्ती दही, पाउच और कप दोनों के प्रोसेसिंग और हाइजीन स्टेप्स एक जैसे हैं। बस पैकेजिंग का अंतर ग्राहकों की सुविधा के लिए है। पैकेजिंग मटेरियल की कीमत ज्यादा है। इसलिए कप महंगा है। दही की क्वालिटी में कोई भी फर्क नहीं है। यह वीडियो ग्राहकों में जबरदस्ती का डर और चिंता फैलाने के लिए बनाया गया है। इसलिए लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। अमूल मस्ती दही एकदम सेफ है। हमने आपको इस मामले के दोनों पक्ष तो बता दिए पर एक सवाल हमारे मन में भी उठा। दही में तो वैसे भी बैक्टीरिया होते ही हैं। फिर कोिफॉर्म बैक्टीरिया, और मोल्ड की मात्रा ज्यादा होना इतनी बड़ी बात क्यों है? क्या इससे सेहत को कोई नुकसान पहुंच सकता है? नारायणणा हॉस्पिटल गुरुग्राम के डिपार्टमेंट में सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर मुकेश नांदल कहते हैं, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अच्छे और सेफ दही में कौन से बैक्टीरिया होने चाहिए। दही में नेचुरली सिर्फ लैक्टोबसिलस और स्ट्रेप्टोकस जैसे गुड बैक्टीरिया होते हैं। यही बैक्टीरिया दही को जमाते हैं और हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। कोिफॉर्म बैक्टीरिया यीस्ट और मोल्ड दही में नेचुरली नहीं होते। अगर दही में कोिलिफॉर्म बैक्टीरिया पाए जाते हैं तो इसका साफ मतलब है कि दही बनाने में गंदे पानी का इस्तेमाल हुआ है या फीकल कंटैमिनेशन हुआ है।
अगर दही में यीस्ट ज्यादा है तो इसका मतलब है दही पुराना है उसे सही तापमान पर स्टोर नहीं किया गया या उसका फर्मेंटेशन कंट्रोल में नहीं रहा। वहीं अगर दही में मोल्ड यानी फपून ज्यादा मिले तो इसका मतलब है कि दही सही तरह स्टोर नहीं किया गया और अब वो खाने लायक नहीं रहा। अगर दही में कोलफॉर्म, यीस्ट और मोल्ड तय सीमा से ज्यादा है तो ऐसा दही खाना सेफ नहीं माना जाता। इस तरह का दही खाने से उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, गैस और फूड पोइजनिंग हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, प्रेग्नेंट महिलाओं, डायबिटीज और लिवर के मरीजों में इसका असर और भी ज्यादा गंभीर हो सकता है।
मोल्ड से जुड़ा एक और बड़ा खतरा है। कुछ मोल्ड टॉक्सिंस यानी जहरीले तत्व बनाते हैं जो लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लंबे समय में जैसी गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं। इसलिए अगर किसी भी दही में कोलफॉर्म, यीस्ट या मोल्ड ज्यादा हो तो उसे कभी नहीं खाना चाहिए। बेहतर यही है कि दही को साफ सफाई का ध्यान रखते हुए घर पर ही बनाया जाए ताकि उसकी क्वालिटी और सेफ्टी दोनों बनी रहे।
