एल्यूमिनियम के बर्तन आपके खाने को स्वादिष्ट बना रहे है या हानिकारक? फूड एजेंसी का खुलासा।

आपके किचन में रखी वह चमचमाती एलुमिनियम की कढ़ाई या वो प्रेशर कुकर जिसमें रोज दाल बनती है। क्या आपने कभी सोचा है कि वो आपके खाने को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ उसे हानिकारक बना रहा है? जी हां, यह सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन यह सच है। दुनिया की सबसे बड़ी फूड रेगुलेटर में से एक अमेरिकी एजेंसी ने एक ऐसी चेतावनी जारी की है जिसने हम सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। और यह चेतावनी सीधे तौर पर भारत से जुड़ी है। तो

हम अक्सर सोचते हैं कि हम कितना हेल्दी खा रहे हैं। ऑर्गेनिक सब्जियां, अच्छे मसाले, कम तेल। लेकिन क्या हम कभी यह सोचते हैं कि जिस बर्तन में हम खाना बना रहे हैं, वह कितना सेफ है? शायद नहीं। और यहीं हम सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं। हाल ही में अमेरिकी एफडीए ने एक भारतीय कंपनी सरस्वती स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड के बनाए कुछ कुकवेयर यानी खाना पकाने के बर्तनों को लेकर एक सीरियस वार्निंग जारी की है।

यह बर्तन बाजार में प्योर एलुमिनियम यूटेंसिल्स या टाइगर वाइट के नाम से बेचे जा रहे हैं। एफडीए की जांच में पता चला है कि इन बर्तनों में सीसा यानी लेड। वही लेड जो बैटरी और पेंट में इस्तेमाल होता है वो खतरनाक स्तर तक मौजूद है। एफडीए ने साफ कहा है कि जब इन एलुमिनियम, पीतल या इनके मिक्स से बने बर्तनों में खाना पकाया जाता है तो यह सीसा यानी लेड पिघल कर खाने में मिल जाता है और आपका पौष्टिक खाना एक जहर बन सकता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि यह सीसा या लेड आखिर है क्या भला? और यह हमारे शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है। देखिए, सीसा एक टॉक्सिक हैवी मेटल है। इसकी सबसे बुरी बात यह है कि यह हमारे शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलता। जब हम लेड वाला खाना खाते हैं तो यह धीरे-धीरे हमारे शरीर के अंदर जमा होने लगता है। हमारी हड्डियों में, हमारे अंगों में और फिर सालों तक चुपचाप हमें अंदर से खोखला करता रहता है। खासतौर पर बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए तो यह किसी जहर से कम नहीं है। तो चलिए अब पॉइंट टू पॉइंट समझते हैं कि यह शीशा हमारे शरीर पर क्या-क्या कहर बरपा सकता है।

दिमाग और नर्वस सिस्टम पर हमला। यह सीधा हमारे ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर असर डालता है। इससे याददाश्त कमजोर हो सकती है। सीखने की क्षमता कम हो जाती है और दिमागी विकास रुक सकता है। बच्चों में यह बहुत गंभीर असर डालता है। खून की कमी यानी । शरीर में लेड की मात्रा बढ़ने से खून बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे शरीर में रेड ब्लड सेल्स कम हो जाते हैं जिसे हम एनीमिया कहते हैं। आपको हर समय थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। किडनी का फेल होना।

हमारी किडनियां शरीर से गंदगी को फिल्टर करने का काम करती हैं। लेकिन जब शरीर में लेड जैसा जहर जमा हो जाता है तो किडनियों पर लोड बढ़ जाता है। वह ठीक से काम नहीं कर पाती। इससे किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। और दिल की बीमारियां। यह हमारी खून की नसों यानी और दिल पर भी बुरा असर डालता है। जिससे और हार्ट से जुड़ी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह शरीर में जमा कैसे होता है? तो जवाब बहुत सिंपल है।

जब भी हम खाना इन खतरनाक बर्तनों में बनाते हैं तो गर्मी और खाने में मौजूद जैसे टमाटर, नींबू, इमली की वजह से यह शीशा बर्तन से निकलकर हमारे खाने में घुल जाता है और फिर खाने के साथ हमारे पेट में और पेट से पूरे शरीर में फैल जाता है। तो अब सवाल यह उठता है कि लेड की कितनी मात्रा सेफ है? क्या थोड़ी बहुत मात्रा चल सकती है? तो इसका जवाब आपको चौंका देगा।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन और दोनों का कहना है कि सीसा या लेड का कोई भी सेफ लेवल नहीं है। जीरो। इसका मतलब है कि इसकी बहुत थोड़ी सी मात्रा भी शरीर के लिए खतरनाक है और लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है। बड़ों के खून में अगर इसकी मात्रा 5 माइक्रो ग्राम प्रति डेसी लीटर से ज्यादा हो जाए तो इसे खतरनाक माना जाता है। लेकिन सच तो यह है कि इसका सुरक्षित लेवल सिर्फ और सिर्फ जीरो है। तो अब हमें करना क्या है? जागरूक बने। सबसे पहले तो यह जाने कि आप किन बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर आपके पास प्योर एलुमिनियम यूटेंसिल्स या टाइगर वाइट ब्रांड के बर्तन हैं तो एफडीए की चेतावनी के अनुसार उनका इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें।

दूसरा सही बर्तनों का चुनाव करें। खाना पकाने के लिए स्टेनलेस स्टील, लोहा या अच्छी क्वालिटी के नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल करें जो सर्टिफाइड हो। हमेशा ब्रांडेड और भरोसेमंद कंपनी के ही बर्तन खरीदें। तीसरा जानकारी फैलाएं। इस वीडियो को अपने परिवार, दोस्तों और हर जानने वाले के साथ शेयर करें। हो सकता है आपका एक शेयर किसी को इन गंभीर बीमारियों से बचा ले। तो कुल मिलाकर आपकी सेहत, हमारी सेहत हमारे अपने हाथों में है।

किचन में की गई छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार पर भारी पड़ सकती है। इसलिए सावधान रहें, सही जानकारी रखें और सुरक्षित रहें।

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