महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की असमय अचानक निधन का कारण विमान हादसा बना और इस विमान हादसे की जानकारी सामने आई। मौत की जानकारी सामने आई। फिर अटकलें लगने लगी कि ये साजिश तो नहीं थी। ये चर्चा सिर्फ राजनीतिक जगत तक सीमित नहीं है बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसके पैर पसारे जा रहे हैं। अलग-अलग थ्योरी आ रही है।
ऐसी एक थ्योरी और ऑनलाइन सामने आई है जिसमें विकपीडिया के स्क्रीनशॉट डाले जा रहे हैं। उसमें बताया जा रहा है कि घटना से कुछ घंटे पहले ही उनकी निधन की सूचना वेबसाइट पर अपडेट कर दी गई थी और इससे संदेह पैदा हो रहा है कि कुछ लोगों ने गड़बड़ की है। कहीं ना कहीं यह साजिश नजर आ रही है। पवार की निधन के कुछ घंटे पहले अपडेट किए गए उनके विकपीडिया पेज का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। तब से इस पर चर्चा लगातार जारी है।
इस नतीजे के पीछे संभावित कारण यह हो सकते हैं। यह वेबसाइट एक ऑनलाइन डाटा लाइब्रेरी है। इस पे रजिस्ट्रेशन करने के बाद आप खुद इसे एडिट कर सकते हैं। इसमें आमतौर पर जानकारी जो होती है और जो घटना होती है वो सही नहीं होती है। लेकिन काफी हद तक सही भी होती है। लेकिन कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिसमें डाटा भ्रामक होता है जिसमें लोग मैनपुलेट कर देते हैं खुद एडिट कर देते हैं। हालांकि विकपीडिया की जानकारी को एक तरह से ऑथेंटिक माना जाता है लेकिन एडिटिंग का जो पार्ट है जिस पे कोई भी जाकर अपना वहां पर एडिट कर सकता है।
उससे भ्रम का भ्रम पैदा होता है। भ्रामक जानकारी वायरल हो जाती है। ऐसा ही अजीत पवार के मामले में हो रहा है क्योंकि इसका फैक्ट चेक किया गया है बकायदा तौर पर। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री की मृत्यु और विकिपीडिया पर अपडेट के समय के बारे में विकिपीडिया, यूटीसी या जिसमें ग्लोबल समय के मुताबिक वो इसे देखते हैं। भारतीय मानक समय के अनुसार आईएसटी से 5 घंटे और 30 मिनट पीछे है। उदाहरण के लिए सुबह 10:30 बजे आईएसटी यूटीसी में सुबह 5 बजे होते हैं। और भारत में 10:30 बजे होते हैं। जो ऑनलाइन चर्चा का कारण बनने वाली भ्रम की स्थिति का कारण हो सकता है। यानी कि वक्त का 5 घंटे का डिफरेंस है। तभी लोग कह रहे हैं स्क्रीनशॉट डाल के कि भाई देखिए ये तो मौत से पहले ही अपडेट हो गया कि उनकी निधन हो गई है और मौत बाद में हुई है। उसका कारण यही है कि जो टाइमलाइन है जो समय का इस्तेमाल होता है वो भारत में जो समय है और जो जहां से ये ऑपरेट हो रहा है वो समय उसमें 5 घंटे का डिफरेंस है। अलग-अलग टाइम ज़ोन में टाइम स्टेम्स का अंतर इस मामले का कारण हो सकता है क्योंकि साजिश की थ्योरी पहले से ही अटकलों को हवा दे रही है।
पहला अनुमान यह है कि इसे एडिट किया गया होगा। इवन इन द वर्ल्ड बिफोर एआई आवर फर्स्ट गेस अबाउट एन इमेज डूइंग द अह द राउंड्स ऑनलाइन वुड बी दैट इट्स एडिटेड। एंड दिस कुड आल्सो ए सिमिलर केस ऑफ एडिटिंग द डेट इन द इमेज अपीयर्स एस जनवरी 27 व्हिच इज़ द डे बिफोर द इंसिडेंट एंड द ईयर एंटर्ड इज़ अ 26 क्लियरली इट सीम्स लाइक समवन अह वाज़ इन ए हरी एट द टाइम ऑफ़ पब्लिशिंग द पेज एज़ लॉक्ड अह इज़ करेक्ट इनेशन एज़ पर इनिशियल फाइंडिंग्स। यानी कि जिसने भी अपडेट किया उसने 2026 की जगह 2026 यानी कि उसने जो एडिट किया तो उसमें हड़बड़ी में उसने 2026 के बाद जो एक छह और लगा उसे हटाना भूल गया। यानी कि साफ तौर पे पता चल रहा है जो उनकी निधन की जानकारी विकपीडिया पे जिसने भी अपडेट की उसने यह भ्रम की स्थिति को पैदा किया है। पुणे मिरर ने लिखा ए वायरल क्लेम ऑन सोशल मीडिया स्टैटिक दैट द विकपीडिया अपडेट द डेथ डेट ऑफ डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार 21 आवर्स बिफोर ह प्लेन एक्सीडेंट इज़ फॉल्स एंड मिसलीडिंग। फैक्ट चेक एजेंसी हैज़ कंफर्म्ड दैट द कन्फ्यूजन हैपेंड ड्यू टू द टाइम डिफरेंस बिटवीन यूटीसी एंड द इंडियन स्टैंडर्ड टाइम्स।
विकपीडिया फॉलोस कोऑर्डिनेट यूनिवर्सल टाइम यूटीसी व्हिच इज़ अराउंड 5.5 यानी 5 1/2 घंटे बिहाइंड आईएसटी यानी भारत के समय से 5 1/2 घंटे पीछे चलता है। बिकॉज़ ऑफ़ दिस सम यूज़र्स रोंगली बिलीव्ड द इंफॉर्मेशन वाज़ अपडेटेड इन एडवांस। इट वाज़ आल्सो फाउंड दैट सेवरल वायरल स्क्रीनशॉट वर क्रिएटेड यूजिंग ब्राउज़र इंस्पेक्ट एलिमेंट टूल्स टू चेंज टाइम स्नैप एंड स्प्रेड द फेक इनेशन।
नो एविडेंस हैज़ बीन फाउंडेड टू सपोर्ट एनी कॉनस्पेंसी एंगल इन द टाइम अजीत पवार विकपीडिया एडिटेड वायरल मिसइफेशन डीजीआईपीआर फैक्ट चेक फैक्ट चेक स्क्रीनशॉट और ये तमाम चीजें अगर आप देखेंगे तो सिर्फ यूटीसी और आईएसटी ये टाइमलाइन का फर्क है जिसके चलते ये कंफ्यूजन पैदा हुआ।
हालांकि जिसने भी एडिट किया वो भी बहुत हड़बड़ी में था। उसने 2026 की जगह 2026 किया उसे भी करेक्ट वो नहीं कर पाया। बहरहाल जो ये रमर है जो स्क्रीनशॉट विकिपीडिया के चल रहे हैं कि अजीत पवार की निधन से 21 घंटे पहले ही विकिपीडिया ने अपडेट कर दिया उनकी मौत को। ये भ्रामक है।
