अजीत पवार की मुस्कुराती हुई यह जो अब उनकी आखिरी तस्वीर बन गई है। इस तस्वीर में वे हमेशा की तरह आत्मविश्वास से भरे और कर्मठ नजर आ रहे हैं। लेकिन किसे पता था कि आसमान में ली गई यह फोटो महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग के अंत का दस्तावेज बन जाएगी। महाराष्ट्र की राजनीति के इतिहास में बुधवार का सूरज एक ऐसी डरावनी खबर लेकर उगेगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
राज्य के सियासी गलियारों से लेकर बारामती की गलियों तक आज सिर्फ मातम और सन्नाटा पसरा है। यह एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता अजीत पवार अब हमारे बीच नहीं रहे। जिस नेता ने दशकों तक महाराष्ट्र की सत्ता और प्रशासन की धुरी बनकर काम किया, उसका अंत इतना दर्दनाक और अचानक होगा, यह सोच कर ही रूह कांप जाती है। बारामती की जिस धरती ने उन्हें राजनीति का शिखर दिखाया, आज उसी धरती की गोद में वे हमेशा के लिए सो गए। यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं है बल्कि महाराष्ट्र के एक पावरफुल राजनीतिक अध्याय का असमय अंत है जिसने राज्य की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा कर दिया है जिसे भरना नामुमकिन होगा।
अजीत पवार जिन्हें उनके समर्थक और आम जनता प्यार से दादा कहते थे। अपनी बेबाकी और प्रशासनिक पकड़ के लिए पूरे देश में जाने जाते थे। वे केवल एक नेता नहीं थे बल्कि विकास की एक ऐसी मशीन थे जो सुबह तड़के से ही जनता के काम में जुट जाते थे।
आज भी वे अपनी उसी कर्मठता के साथ मुंबई से बारामती के लिए निकले थे। वहां उन्हें जिला परिषद चुनावों के मद्देनजर चार बड़ी जनसभाओं को संबोधित करना था। हजारों की संख्या में लोग अपने चहेते नेता की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही मैदानों में डटे हुए थे। और उनके स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आसमान के रास्ते बारामती की ओर बढ़ रहा यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ। उनके साथ विमान में उनके निजी सहायक विदीप जाधव और सुरक्षा गार्ड पिन की माली भी मौजूद थे जो साईं की तरह हमेशा उनके साथ रहते थे और इस अंतिम यात्रा में भी वे उनके साथ ही पंच तत्व में विलीन हो गए। यह हृदय विदारक हादसा सुबह करीब पौ:45 से सवा5 बजे के बीच हुआ जब पूरा राज्य अपने दैनिक कार्यों में जुटा था। विमान लैंडिंग के बिल्कुल करीब था लेकिन तभी तकनीकी खराबी ने सब कुछ तबाह कर दिया। बारामती रनवे पर उतरने से ठीक पहले विमान अनियंत्रित हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो विमान हवा में लड़खड़ाया और रनवे पर उतरने के बजाय पास के एक खेत में जा गिरा। जमीन से टकराते ही विमान के परखच्चे उड़ गए और उसने भीषण आग पकड़ ली। करीब 10,000 किलो वजनी यह लेयर जेट 45 विमान पल भर में लोहे के जलते हुए ढेर में तब्दील हो गया और किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। विमान की कमान कैप्टन साहिल मददान के हाथों में थी। जिनके पास 16 साल का एक लंबा और शानदार अनुभव था। उनके साथ फर्स्ट ऑफिसर श्यामभवी पाठक भी अपनी जिम्मेदारी निभा रही थी। साल 2010 से विमान उड़ा रहे कैप्टन साहिल ने कई प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया था। लेकिन उस काली सुबह अनुभव भी तकनीकी विफलता के आगे बेबस नजर आया। हादसे का शिकार हुआ यह विमान वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का था। जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर वीटीएसएसके था।
दिल्ली स्थित इस कंपनी का सुरक्षा रिकॉर्ड पहले भी सवालों के घेरे में रहा है क्योंकि पिछले साल भी इनका एक विमान मुंबई एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। अब फिर से एक बड़ी तकनीकी चूक ने महाराष्ट्र के इतने बड़े नेता और चार अन्य लोगों की जान ले ली है। नागरी विमान वाहतूक संचालनालय यानी डीजीसीए ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। ताकि यह पता चल सके कि आखिर लैंडिंग के वक्त ऐसा क्या हुआ कि एक अनुभवी पायलट विमान को नहीं बचा सका।
आज महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक काला अध्याय दर्ज हो गया है। जिसने पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डबो दिया है। बारामती की चुनावी सभाएं अब सन्नाटे में बदल गई हैं और हर आंख नम है। प्रशासन और राहत बचाव दल मौके पर हैं। लेकिन इस हादसे ने जो जख्म दिया है वह सदियों तक याद रखा जाएगा। अजीत पवार का जाना केवल एक पार्टी की हानि नहीं है। बल्कि उस कार्यशैली का अंत है जो अनुशासन और त्वरित निर्णय के लिए जानी जाती थी।
