अहमदाबाद प्लेन क्रैश: उम्मीद थी लिस्ट में न हो नाम लेकिन ‘बोलते-बोलते रो पड़े अंजू के परिजन।

सारे परिवार में अचानक ऐसा हो गया किसी ने सोचा ही नहीं था सारे परिवार पे जी पत्तियों का मुसीबतों का पहाड़ी फूट पड़ा है सदमे में है सारा परिवार तो दूर-दूर तक सोच नहीं थी कि कभी ऐसा भी होगा आप देखो ना एक बंदा अपने बेटे से मिलने जा रहा है धन धन कितना खुश होगा कितनी खुशियां होंगी कितने जज्बात होंगे मिलने के बच्चों से और पल में ऐसा कुछ हो जाए जिसकी कल्पना भी ना बंदा करे कल्पना है।

जी सोच से बाहर है कब आपकी बात हुई है और कब कल जी फ्लाइट थी उनकी मेरा साला है बड़ा वो छोटा वो चढ़ा के आया था वहां पे प्लेन में छोड़ने गया था तो हमें पता था अभी प्लेन उड़ाया है थोड़ी देर बाद ही टीवी में न्यूज़ चलाई तो आ रहा था कि प्लेन दुर्घटनास्ट हो गया बहुत ज्यादा भयानक भयाव हादसा था भाई जिसके टीवी के आगे बैठे रहे ट्रैक्टर की लगाए शायद कोई परमात्मा को चमत्कार कर दे कोई ऐसी उम्मीद बना दे कि कुछ बंदे निकले उनमें उसका नाम हो।

एक उम्मीद की होता है ना जी एक उम्मीद थी बस परमात्मा बचा ले बस किसी भी तरह लेकिन शाम को पता चला जी कुछ नहीं बचा सारे के सारे पैसेंजर जो भी थे वो खत्म हो गए मेरे ससुर जो हैं फादर इन लॉ मेरे वो ब्रेन हेमरेज चार साल से बिस्तर पे हैं उनको कल बता नहीं पा रहे थे मेरी मदर इन लॉ दिल की मरीज है उनको बताना बड़ा नामुमकिन सा था अब आपके सामने थोड़ी देर पहले ये सब गांव वालों ने मिलके सब लोगों ने मिलके उनको इकट्ठे होके तब उनको अपने उसमें लिया विश्वास में लेकिन उनको बताया लेकिन आपने देखा ये माहौल क्या हो गया।

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