मरने से पहले एआई से सवाल पूछे थे। यह बड़ी खबर आ रही है। एआई ने कोरियन गेम पर जवाब भी दिया था। सोचिए बच्चे एआई से सवाल पूछ रहे थे मरने से पहले। बताया जा रहा है कि एआई ने 50 ये जवाब दिए थे। 50 टास्क को लेकर जवाब दिया था। कोरियन गेम पर यह जवाब दिया गया था। टास्क बेस्ड ये गेम था और इसी गेम की लत थी इन बच्चों को। अब आपको दिखाते हैं देखिए क्या एआई से पूछते हैं 50 दिन के 50 टास्क होते हैं जैसे रात में खतरनाक जगह जाना खुद को यह सारी चीजें एआई से इनको पता चल रही है .
तो आपको बता दें कि एआई में ये 50 टास्क इनका जिक्र किया गया है और सबसे बड़ी बात देखिए अर्जुन यहां पर लास्ट टास्क यहां लिखा हुआ है गौर कीजिएगा लास्ट आर गोल मरने ये ये जवाब इनको मिल रहा है। अब सोचिए एआई से बच्चे पूछ रहे हैं जहां पर जाकर के वो सवाल कर रहे हैं और एआई इनको क्या जवाब दे रहा है ये बहुत बड़ी खबर है और हर एक पेरेंट्स को देखना चाहिए कि बच्चे क्या कर रहे हैं क्या पूछ रहे हैं ये पेरेंट्स और सोसाइटी दोनों के लिए बहुत बड़ी खबर है आप देखिए लास्ट जो टास्क है उसमें सीधा लिखा गया है मरने यानी कि मरने तो क्या यही वो टास्क था जिसकी वजह से इन तीनों बहनों ने मरने की है ये बड़ा सवाल है.
हमारे साथ इस वक्त बृजेश तिवारी इस वक्त सीधे गाजियाबाद से जुड़ रहे हैं और निशा खन्ना भी हमारे साथ हैं। मनोवैज्ञानिक। मैं सबसे पहले बजर साहब के पास आऊंगा। क्या माता-पिता को पता नहीं चला कि उनके बच्चे इस तरह का गेम खेल रहे हैं। उसमें क्या टास्क दिए जा रहे हैं? क्या नहीं दिए जा रहे हैं? देखिए माता-पिता को पता था और इसीलिए परिवार ने मोबाइल फोन बच्चों से वापस ले लिया और यह नाराजगी थी बच्चों के अंदर। जो सुसाइड नोट लिखा था उस सुसाइड नोट में सीधे तौर पे बच्चों ने ये लिखा हुआ था कि उनके मां-बाप ने उनसे फोन ले लिया है और इसी की वजह से वो नाराज हैं। उनको गेम नहीं खेलने दिया जा रहा है। ये लत देखिए कि इतनी तरीके से ये तीनों बच्चों मजबूर हो गए कि सामने आपको यहां से तकरीबन 60 से 70 फीट की ऊंचाई पे वो फ्लैट है और वहीं से रात में 2:00 बजे तीनों बच्चे कूद गए।
अब चश्मदीद यह भी बता रहे हैं कि जो बड़ी बच्ची थी जिसकी उम्र 16 साल थी वो कूद रही थी और साथ में दोनों बच्चे उसे पकड़ के लटके हुए थे। यानी यह भी संभावना अब जताई जा रही है कि बड़ी बच्ची कूद रही थी और दोनों जो छोटे बच्चे थे उसको बचाने की कोशिश कर रहे थे और इसी दौरान ये पूरी घटना हुई। लेकिन इन्वेस्टिगेशन में यह बात भी सामने आई है कि कमरे की जो दीवार है उस पे लिखा हुआ है कि आई एम अलोन यानी वो अकेली है। ये तमाम चीजें ये बताती है साइकोलॉजी ये बताती है कि बच्चे गेम में इस तरीके से इंडल्ज हो गए थे।
इस तरीके से उसके अंदर गेम खेलने लगे थे कि उन्हें आसपास कुछ भी नहीं समझ में आता। मनोवैज्ञानिक से समझ सकते हैं। हमारे साथ निशा खन्ना है मनोवैज्ञानिक जुड़ी हुई हैं। निशा जी किस तरीके से ब्रेन वाश किया जाता है? क्योंकि 16 साल के बच्चे को समझदार माना जाता है। देखिए आई वुड से 16 साल के बच्चे को समझदार मैं नहीं कहूंगी माना जाता है। बच्चे का ब्रेन इतना डेवलप नहीं होता है कि वो सही और गलत का डिसीजन ले पाए। और जैसे कि दीवार पर लिखा है कि आई एम अलोन। तो आपको मैं क्लियरली बोल दूं हम आज की डेट में गेमिंग एक बहाना हो सकता है। असक्कविज्म का एक दौर हो सकता है।
बट अगर रियल प्रॉब्लम को देखा जाए वो कहीं ना कहीं हम इमोशनली रूप से स्टेबल नहीं है। हमारे रिलेशनशिप जो घरों में एनवायरमेंट है वो ऐसा नहीं है। अब जैसे इन बच्चों ने अगर सुसाइड नोट में दिखाया कि मेरा मोबाइल छीन लिया गया। क्या पेरेंट्स के साथ बच्चे इतना टाइम स्पेंड कर रहे थे? क्या उनका क्वालिटी ऑफ इंटरेक्शन था? क्वालिटी ऑफ़ टाइम का इंटरेक्शन था? नहीं था और बच्चों को अगर किसी भी तरह की एडिक्शन थी तो क्या उन्हें किसी साइकेट्रिस्ट या साइकोलॉजिस्ट के पास लेकर जाया गया? उनकी काउंसलिंग की गई? बिल्कुल बहनों ने दीवार पर क्या लिखा था? दर्शकों को बता देते हैं। आई एम वेरी वेरी अलोन। ये दीवार पर उस कमरे में लिखा हुआ था जहां पर बच्चे ये बता रहे हैं कि वो बहुत अकेले हैं और सबसे बड़ा सवाल है कि क्यों उनको ऐसा लग रहा था कि वो बहुत अकेले [संगीत] हैं? क्या यह गेम का असर था या परिवार के अंदर ऐसा माहौल था जहां पर उनको ऐसा लगता था कि वो अकेले हैं और वो अपनी बात को किसी के सामने रख नहीं पा रहे हैं। ये देखिए। तो आई मेक मी अ हार्ट ब्रोकन। यह भी लिखा गया है उस दीवार पे। साथ ही इसमें लिखा गया है कि मैं अकेली हूं। आई एम अलोन। आई एम वेरी वेरीरी अलोन। और देखिए यह फिर आगे क्रॉस करके काटा गया है इसमें। इसमें एक साथ अगर आप गौर करेंगे तो इसमें एक साथ कई सारे इसमें क्रॉस बने हुए हैं। लेकिन इसके पीछे जो लिखा हुआ है देखिए पहले तो लिखा हुआ है सबसे ऊपर मेक मी ए हार्ट ऑफ ब्रोकेन। और उसके नीचे लिखा हुआ है आई एम वेरी वेरीरी अलोन। अब सवाल है कि ऐसा ये बच्चे क्यों लिख रहे हैं? क्या जरूरत पड़ी उनको ऐसा लिखने की? क्या ये गेम की वजह से लिख रहे हैं? या फिर इसके पीछे वजह कुछ और थी? निशा जी आप बेहतर बता पाएंगे? क्या आपको समझ में आ रहा है.
इसे देखकर? देखिए जब मैं काउंसलिंग करती हूं एक चार बार चार साल के बच्चे में भी घर के झगड़ों के बाद यह विचार मन में आ सकता है कि मेरे मां-बाप मुझसे प्यार नहीं करते और मैं अकेला हूं। ये तो 12 16 और जो भी 14 साल की उम्र की बच्चियां थी उन्होंने लिखा है। तो आप सोचिए घर का जो एनवायरमेंट है वो बच्चों के दिमाग पर कितना गहरा असर डालता है। अगर पति पत्नी खुद फोन में लगे हैं। अगर उनके बीच में झगड़े हो रहे हैं। उनका घर में एनवायरमेंट कैसा है? आज कोई भी बच्चा आज हम एडल्ट भी बनते हैं। हमारा आज का अस्तित्व हमारे कहीं ना कहीं बोर्न एंड ब्रॉट अप से जुड़ा है। और वो बोर्न एंड ब्रॉट अप हमारे पहले 5 साल भी है और हमारे चाइल्डहुड के जितने भी टीनएज इयर्स है उसमें भी है। तो घर के एनवायरमेंट का बच्चों की साइकोलॉजी पर असर पड़ता है। मैंने खुद गेमिंग कंपनी के साथ काम किया है जिसमें इन बच्चों से बात की है जो गेमिंग खेलते हैं और उन सबके दिमाग को जो मैंने पढ़ा है मेरा जितना भी अनुभव रहा है कि वो घरों से प्रॉब्लमेटिक होते हैं और घर की प्रॉब्लम से भागने के लिए वो ग्रेन का सहारा लेते हैं। वो रियल वर्ल्ड आप कह रहे हैं कि घर में उनको वो माहौल नहीं मिलता। मां-बाप बहुत ज्यादा समय नहीं बिता पाते। बृजेश बता पाएंगे। बृजेश घर के परिवार के लोग या पड़ोसी क्या कहते हैं? बच्चों को पूरा समय दे पाते थे माता-पिता पेरेंट्स।
देखिए यह इस पूरी घटना के बाद हर कोई स्तब्ध है इस बात को लेके कि आखिरकार गेमिंग इतना ज्यादा प्रभावशाली हो गया कि बच्चे सुसाइड कर लेते हैं। महिलाएं जो हैं उनसे भी एक बार बात करते हैं। आप लोगों ने बच्चों को कभी देखा बाहर पार्क में खेलते हुए? नहीं मतलब देखा भी हो तो इतना याद नहीं है। बाय फेस अगर देखेंगे तो पहचान पता नहीं था। कभी परिवार बाहर आता।
नहीं नहीं देखे ही नहीं। हम लोग नहीं जानते वो लोग कभी नहीं। कभी नहीं देखा। वो लोग कम निकलते थे। बाहर इतना निकले नहीं। देखा नहीं किसी ने इतना उनको। किसी ने देखा ही नहीं यहां पे। बच्चे कभी आपको अगर दिखे हो बालकनी में कभी दिखे हो? नहीं। कभी नहीं।
