अफगानिस्तान में ख़ास इस घटना को देखने पहुंचे यूरोपीय देश।

किसी देश में सरकार गिराना, किसी देश के राष्ट्रपति को उठाना, किसी देश के सुप्रीम लीडर को मारना तो टेरिफ के नाम पर पूरी दुनिया को ब्लैकमेल करना।

अमेरिका ने इन सभी चीजों को सामान्य घटना बना दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि अगर अपने फायदे के लिए यह सभी चीजें जायज हैं, तो क्या भारत को भी पाकिस्तान से अपना क्षेत्रफल वापस लेने का मौका मिल गया है? और क्या भारत यह काम शुरू कर चुका है?

यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि भारत के पड़ोस में एक असामान्य घटना हुई है। ईरान इजराइल के बीच जिस खबर पर किसी का ध्यान नहीं गया वही खबर हम आपको बताने जा रहे हैं। दरअसल ईद से ठीक पहले अफगानिस्तान की सरकार और अफगानिस्तान के लोग उन 400 लोगों को दफनाने पहुंचे जिन्हें पाकिस्तान ने अपनी एयर में मार दिया था। पाकिस्तान ने 40 सेकंड के हमले में 400 परिवार उजाड़ दिए। लेकिन इस घटना के बाद पहली बार कुछ ऐसा हुआ जो आज तक नहीं हुआ। जिस अफगानिस्तान को कोई पूछ नहीं रहा था उस अफगानिस्तान में अचानक पहली बार यूरोपियन कमीशन का एक डेलीगेशन पहुंच गया।

उनके साथ कुछ और देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। यह सभी पाकिस्तान की एयर में मारे गए 400 लोगों के जनाजे में पहुंचे। यूरोप के कुछ प्रतिनिधि तो तबाही और मृतकों के परिवार वालों को देखकर रो पड़े। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान की एयर में मारे गए 400 लोगों को एक साथ दफनाया और पाकिस्तान को बर्बाद करने की कसम भी खा ली।

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दुनिया का ध्यान अचानक अफगानिस्तान की तरफ क्यों गया? एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे भारत का बहुत बड़ा रोल है। भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान का मुद्दा उठा रहा है। अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों की निंदा कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान की सरकार ने अपने देश में रहने वाले लाखों अफगान शरणार्थियों को धक्के मारकर वापस अफगानिस्तान भेज दिया। उन लोगों के लिए भी खाना दवाइयां भारत भेज रहा है। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि भारत के इशारे पर ही यूरोपीय कमीशन अफगानिस्तान पहुंचा। वैसे भी ईरान जंग की वजह से तेल और गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ हार्मोस पूरी तरह बंद है। गैस और तेल का इकलौता बड़ा सप्लायर अब रूस बन गया है। पूरा यूरोप अब वापस रूसी तेल और गैस पर निर्भर हो चुका है। लेकिन यूरोप को रूस का तेल और गैस सिर्फ भारत के रास्ते ही मिल सकता है। ऐसे में यूरोप के पास भारत की बात को मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है।

ऐसे में अगर भारत अपने हितों और अफगानिस्तान के हितों के लिए पाकिस्तान पर हमला करता है तो यूरोप अब बीच में नहीं पड़ेगा। लेकिन मजे की बात देखिए कि इस घटना के बाद मामला और दिलचस्प हो गया है। सूत्रों की मानें तो भारत ने यूरोप के साथ-साथ अमेरिका को भी पाकिस्तान के खिलाफ खड़ा कर दिया है।

दरअसल ईरान जंग में फंस चुके अमेरिका को अब मिडिएशन के लिए भारत की जरूरत पड़ सकती है। इसी के साथ भारत ने एक अमेरिकी एजेंट मैथ्यू वेंडाइक को भारत में ही आतंकी साजिश करने के आरोप में पकड़ लिया है।

इसके बाद अचानक अमेरिकी राजदूत ने अजीत डोबाल से मुलाकात की है। अमेरिका इतना बुरा फंस गया है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी की प्रमुख तुलसी गबाटार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान ऐसी लंबी दूरी की बना रहा है जो भविष्य में अमेरिका तक हमला कर सकती हैं।

यानी एक ही समय पर यूरोप और अमेरिका पाकिस्तान के खिलाफ खड़े हो गए हैं। भारत को तीसरा ग्रीन सिग्नल खाड़ी देशों से मिल चुका है। भारत अगर पाकिस्तान के खिलाफ कोई एक्शन लेता है तो इस बार सऊदी अरब पाकिस्तान की मदद करने नहीं आएगा। क्योंकि ईरान हमले के बाद पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब की कोई मदद नहीं की थी। यानी भारत के पास पाकिस्तान से अपना क्षेत्रफल लेने का सबसे सुनहरा मौका है।

Leave a Comment