L अडानी जी का मामला तो आप अच्छी तरह से जानते होंगे कि उनका संबंध 14 महीने से भारत सरकार के पास पड़ा हुआ है। लेकिन उनके पास पहुंचाया नहीं जा रहा है। गांधीनगर में जो उनका घर है वहां तक जाने के लिए भारत सरकार की हिम्मत नहीं हो रही है कि जाए भारत सरकार की तरफ से और अडानी को समन दे दे। अब जो वहां की एजेंसी है एसईसी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन उसने कहा है कि ठीक है हम सीधे मेल से वो सामान भेजेंगे। अडानी यह नहीं कह पाएंगे कि मुझे सामान नहीं मिला।
अमेरिका की सबसे बड़ी वित्तीय जांच एजेंसी यूएसएसईसी न्यूयॉर्क की अदालत में साफ कह चुकी है कि पिछले 14 महीनों से भारत सरकार गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को अडानी समूह को रिश्वतखोरी के मामले में समन नहीं पहुंचा पाई है। समन भारत के कानून मंत्रालय के पास पड़ा है। लेकिन अडानी तक नहीं पहुंचा है। अब जरा आम भाषा में समझिए। अगर किसी आम आदमी को नोटिस भेजना हो जैसे बिजली बिल का, टैक्स का या पुलिस का तो सिस्टम इतनी तेजी से चलता है कि आदमी संभल भी नहीं पाता। लेकिन जब बात देश के सबसे बड़े उद्योगपति की आती है तो वही सिस्टम अचानक थक जाता है।
यूएसएसई ने 20 नवंबर 2024 को अडानी समूह के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप यह है कि सोलर एनर्जी के बड़े ठेके पाने के लिए भारत में अधिकारियों को करीब ₹2000 करोड़ के ज्यादा से रिश्वत दी गई है और ऊपर से अमेरिकी निवेशकों को यह सब बातें बताई भी नहीं गई है। अब सवाल यह है कि अगर आरोप इतने बड़े हैं अगर मामला अंतरराष्ट्रीय है तो सरकार इतनी ढील क्यों दे रही है? एसईसी ने फरवरी 2025 में भारत सरकार से कहा है कि हैक कन्वेंशन के तहत समन अडानी तक पहुंचाया जाए। कानून मंत्रालय ने कागज आगे भेजे भी लेकिन 14 महीने बीत गए। ना समन पहुंचा ना कोई ठोस जवाब। और बहाने क्या है? कभी कहा गया कागज पर मुर नहीं है। कभी कहा गया साइन ठीक नहीं है। मतलब साफ है जब काम नहीं करना तो वजह मिल ही जाती है। अब तो हाल यह है कि अमेरिकी एजेंसी ने कोर्ट से कह दिया है कि हमें भारत सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं है। हमें अडानी को उनके वकीलों और ईमेल के जरिए सीधे नोटिस भेजने की इजाजत दी जाए। यानी अमेरिका यह कह रहा है कि भारत सरकार से काम नहीं हो पा रहा है।
लेकिन अब इसी मामले में एक और नया मोड़ सामने आया है। नया कनेक्शन सामने आया और नया बड़ा खुलासा सामने आया है। जो कल तक आरोप को सिरे से नकार रहे थे। आज वही प्रोसेस का हिस्सा बनने को तैयार है। मतलब यह है कि जो कल जो अडानी जी कल तक कह रहे थे कि हमने ऐसा कुछ किया ही नहीं है। हमने कोई घोटाला नहीं किया। हमने कोई रिश्वतखोरी नहीं की है। आज वही कह रहे हैं कि ठीक है हम आएंगे और 30 तारीख को यह नोटिस यानी यह समन ले लेंगे।
दरअसल पहले इस बात को अडानी जी मानने से इंकार कर रहे थे। जब प्रेशर ज्यादा हुआ तब जाकर गौतम अडानी और सागर अडानी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से 30 जनवरी तक का अतिरिक्त समय मांगा है। यह यूएस सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन यानी एसईसी के साथ चल रही चर्चाओं पर 30 जनवरी तक अदालत को अपडेट देंगे। ऐसा उनके वकील ने कहा है। यह मामला नवंबर 2024 में एसईसी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। जिसमें गौतम अडानी और सागर अडानी पर रिश्वतखोरी की साजिश का आरोप है।
आपको बता दें कि अमेरिकी कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क में दाखिल एक अपडेट में अडानी पक्ष के वकीलों ने बताया है कि दोनों पक्षों यानी अडानी और एसईसी के बीच एक सहमति पत्र पर चर्चा चल रही है। इसमें एसईसी की ओर से ईमेल के माध्यम से समन की मांग पर सहमति बनाई गई है। यानी इससे यह माना जाए कि अडानी जी अब सरेंडर मोड में आ गए हैं। मोहलत की भीख मांग रहे हैं। अडानी ने अमेरिकी अदालत के सामने समन एक्सेप्ट करने के लिए 30 जनवरी 2026 तक का वक्त मांगा है। यानी जो अकड़ थी वो ढीली पड़ने लगी है।
यानी अब लगभग तय है कि अडानी जी खुद के खिलाफ धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी का समन स्वीकार करेंगे। कल तक जो आरोपों को सिरे से नकार रहे थे आज वही प्रोसेस का हिस्सा बनने को बेताब हैं। अब तक तो सिर्फ हवा में बातें थी पर समन लेते ही अडानी जी अमेरिकी कोर्ट के रजिस्टर्ड मुलजिम बन जाएंगे। अब उन्हें अपनी बेगुनाही का सबूत देना होगा ना कि कोर्ट को उनके गुनाह का। जो मेहरबानी भारत में मिली वो अमेरिका में नहीं मिलने वाली है। आप सोचिए कितना शर्मनाक है। सारा मामला सामने आ चुका है कि अडानी ने कैसे घूस लिया था।
सब कुछ सामने आ चुका है। बकायदा ग्राफ्स बनाकर एसईसी ने यह टाइमलाइन जारी किया है और यह बताया है कि इसके मामले में अडानी को पिछले 14 महीने से भारत सरकार नोटिस नहीं भेज रही। और अब अडानी की तरफ से यानी जो देश के बड़े उद्योगपति हैं उनके वकील कह रहे हैं कि हमें 30 तारीख तक का समय दीजिए। हम आकर के मामला यानी हम आकर के ये समन या हमें मेल के जरिए ये समन भेजने की हम सहमति बना रहे हैं। सोचिए यह मामला कितना शर्मनाक है। लेकिन अब सवाल यह है कि मेल से समन तो भेज देंगे लेकिन अडानी जी को उठाएंगे कैसे? अडानी जी के ऊपर केस कैसे चलाएंगे? मोदी जी की सरकार तो जान लगा देगी लेकिन अडानी जी को कुछ नहीं होने देगी। देश डूब जाए, जनता पानी में डूब जाए, मर जाए डूब करके। देश में कुछ भी बवाल हो जाए, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन बेचारे अडानी जी का कुछ नहीं होना चाहिए। मोदी जी के खास हैं।
उनका कुछ नहीं होना चाहिए। क्योंकि यह लगातार आपको बता दें कि लगातार विपक्ष की तरफ से यह कहा गया है कि अडानी मोदी मिलकर के देश में सरकार चला रहे हैं। लगातार इस जो यह घोटाले हुए हैं उसको कांग्रेस की तरफ से कहा गया है कि यह मोदानी घोटाला है। फिलहाल आपको बता दें कि कई ऐसे मौके हुए हैं जब विपक्ष के नेता लोकसभा में विपक्ष के जो नेता हैं राहुल गांधी वह लगातार मुखर होकर के कहते रहे हैं कि अडानी और मोदी की मिलीभगत है। लेकिन अब ये मामला एक बार और खुल के सामने आ गया है और जिस मामले पर अब अडानी के वकीलों के द्वारा ये कहा जा रहा है कि हमें 30 तारीख तक का समय दीजिए। 30 जनवरी तक का समय मांग रहे हैं।
फिर एक बार आपको बता दें कि यह मामला अमेरिका का है। वही अमेरिका जिसमें लगातार यह सवाल उठते रहे हैं कि आखिर अमेरिका के सामने नरेंद्र मोदी जी जो देश के प्रधानमंत्री हैं वो इतने नतमस्तक क्यों रहते हैं? यह वहीं का मामला है और इससे यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि ये अडानी के मामले की वजह से देश के प्रधानमंत्री वहां पे इतने नतमस्तक रहते हैं।
ये सारी बातें सोशल मीडिया पे चल रही हैं और आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने यह सवाल पहले भी उठाया था। यह सोशल मीडिया पे पोस्ट करते उन्होंने कहा था कि आखिर अडानी के जो समन है वो भारत सरकार क्यों नहीं पहुंचा रही है 14 महीने तक? और आखिरकार यह मामला अब अडानी ने खुद एक्सेप्ट कर लिया है।
