सोचिए कोई एक्टर तीन या चार हफ्तों में 15 से 18 किलो तक वजन घटा दे या कोई रोल इतना दिमाग में घुस जाए कि अस्पताल में भी उसी के डायलॉग बोलता रहे। यह सुनने में फिल्मी लगता है। लेकिन यह सब सच में हुआ है। फिल्म में एक्टिंग सिर्फ डायलॉग बोलना या डांस करना नहीं होता। असली एक्टिंग तब होती है जब आप अपने किरदार में पूरी तरह से घुस जाते हैं। कुछ एक्टर्स तो इतने आगे चले गए कि उन्होंने अपने शरीर, दिमाग और सेहत तक दांव पर लगा दी। आज हम बात करेंगे सात ऐसे ट्रांसफॉर्मेशंस की जो सच में आपको चौंका देंगे।
अगर हम एक्सट्रीम ट्रांसफॉर्मेशन की बात करें तो रणदीप हुड्डा का नाम सबसे ऊपर आता है। फिल्म सरपजीत के लिए उन्हें एक ऐसे कैदी जैसा दिखना था जो 23 साल जेल में रहा हो और ठीक से खाना नहीं खा पाया हो। रणदीप ने इस रोल के लिए सिर्फ 3-4 हफ्तों में करीब 15 से 18 किलो तक वजन घटा लिया। उनका वजन 90 किलो से ज्यादा था, लेकिन यह तेजी से गिरकर बहुत कम हो गया। इसके लिए उन्होंने बेहद सख्त डाइट अपनाई। रोज सिर्फ 500 से 600 कैलोरी जबकि एक आम इंसान को 2000 से ढाई हजार तक कैलोरी की जरूरत होती है।
रणदीप ने बताया कि वह हर वक्त भूखे रहते थे। नींद नहीं आती थी और शरीर इतना कमजोर हो गया था कि चलना भी मुश्किल हो गया था। दिलचस्प बात यह है कि उसी साल उन्होंने दूसरी फिल्म के लिए 77 से बढ़ाकर 94 किलो तक वजन कर लिया। रणदीप ने कहा कि यह प्रोसेस बहुत मुश्किल था लेकिन पर्दे पर उनकी परफॉर्मेंस आज भी बेहद रियल मानी जाती है। फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन से हटकर अब बात करते हैं एक ऐसे मेंटल ट्रांसफॉर्मेशन की जो शायद और भी ज्यादा मुश्किल है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने रमन राघव 2.0 में एक सीरियल किलर का रोल प्ले किया। यह किरदार 1960 के दशक के कुख्यात किलर रमन राघव से प्रेरित था जिसने मुंबई में कई हत्याएं की थी।
लेकिन ये कोई सामान्य खलनायक नहीं था। यह एक ऐसा इंसान था जिसके अंदर कोई डर या सही गलत की समझ नहीं थी। इसके लिए नवाज ने खुद को कुछ दिनों तक एक फ्लैट में अकेला कर लिया। वो इस किरदार की सोच में इतने डूब गए कि शूटिंग खत्म होने के बाद भी उससे बाहर निकलना मुश्किल हो गया। सबसे पागलपन भरी बात तब हुई जब शूटिंग के दौरान नवाज को डेंगू हो गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। तेज बुखार था। लेकिन नवाज क्या कर रहे थे? सिर्फ रमन राघव की लाइनें ही बोल रहे थे। बस लगातार बड़बड़ाते रहे।
अनुराग कश्यप ने भी माना कि यह किरदार नवाज पर गहरा असर छोड़ गया था। पर्दे पर उनकी परफॉर्मेंस इतनी असली और डरावनी थी कि आज भी इसे उनके करियर की सबसे खतरनाक एक्टिंग में गिना जाता है। मेथड एक्टिंग का एक और एग्जांपल देखिए। राजकुमार राव अपने रोल को असली बनाने के लिए कितनी मेहनत करते हैं। यह ट्रैप्ड में साफ दिखता है। फिल्म की कहानी शौर्य नाम के एक आदमी की है जो गलती से अपने नए फ्लैट में बंद हो जाता है। बिल्डिंग अधूरी है, बिजली नहीं है और सबसे बड़ी बात ना खाना है ना पानी। वो करीब 3 हफ्ते तक वहीं फंसा रहता है। इस रोल को सही तरीके से महसूस करने के लिए राजकुमार ने 202 दिनों तक सिर्फ एक कप ब्लैक कॉफी और दो गाजर पर गुजारा किया।
पूरे दिन वह बस इतना ही खाते थे। करीब 20 दिनों में उन्होंने 6 से 7 किलो तक वजन घटा लिया। इस दौरान उन्हें लगातार भूख लगती थी। शरीर कमजोर हो गया था और कई बार चक्कर भी आने लगे थे। उन्होंने खुद बताया कि कुछ बार तो वह लगभग बेहोश हो गए थे। डायरेक्टर विक्रमादित्य मोटवानी ने मजाक में कहा कि फिल्म में शौर्य जितना खाता दिखता है असल में राजकुमार उससे भी कम खा रहे थे। इसी वजह से फिल्म में जो घबराहट, थकान और भूख दिखती है, वह एक्टिंग नहीं लगती बल्कि बिल्कुल रियल महसूस होती है।
विनीत कुमार सिंह को भले ही सफलता देर से मिली हो, लेकिन वह बेहतरीन एक्टर और बेहद मेहनती कलाकार हैं। विनीत ने फिल्म मुक्केबाज में एक बॉक्सर का रोल प्ले किया है। लेकिन यह सिर्फ दिखाने वाली बॉक्सिंग नहीं थी। विनीत सच में बॉक्सर बन गए थे। इस रोल के लिए उन्होंने करीब डेढ़ से दो साल तक ट्रेनिंग ली। उन्होंने नेशनल लेवल बॉक्सर्स के साथ प्रैक्टिस की और रोज घंटों ट्रेनिंग की। पंच मारना, फुटवर्क, स्टैमिना बढ़ाना यानी कि सब कुछ असली बॉक्सर की तरह ही सीखा।
ट्रेनिंग के दौरान उन्हें असली मुक्के भी लगे। शरीर में दर्द, चोट और थकान सब कुछ झेलना पड़ा। लेकिन उन्होंने सिर्फ बॉडी नहीं बनाई बल्कि बॉक्सर की लाइफस्टाइल भी अपनाई। सख्त, डाइट, सही नींद और रोज का, ट्रेनिंग रूटीन सब फॉलो किया। इसी वजह से फिल्म के फाइट सीन इतने असली लगते हैं कि लगता है कि सच में बॉक्सिंग मैच चल रहा है। विनीत के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी बल्कि उनका पैशन प्रोजेक्ट था और इसी मेहनत ने उनकी परफॉर्मेंस को खास और यादगार बना दिया। फरहान अख्तर को हमने अलग-अलग काम करते हुए अक्सर देखा है। अपनी फिल्म भाग मिल्खा भाग के लिए उन्होंने खुद को पूरी तरह से बदल दिया था। यह फिल्म मिल्खा सिंह की कहानी है जो भारत के सबसे बड़े एथलीट्स में से एक थे। इस रोल के लिए फरहान को सिर्फ फिट नहीं दिखना था बल्कि एक असली एथलीट जैसा दिखना और दौड़ना था। इसके लिए उन्होंने एक साल से ज्यादा मेहनत की।
रोज सुबह जल्दी उठकर लंबी दौड़ लगाना। फिर जिम में कसरत और फिर ट्रैक पर स्पीड की प्रैक्टिस। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी बॉडी को एक रनर जैसा बना लिया। यानी पतली, तेज और मजबूत बॉडी। उनकी डाइट भी बहुत सख्त थी। सब कुछ नाप कर खाना, कोई जंक फूड नहीं वगैरह। सबसे खास बात यह है कि फरहान ने मिल्खा सिंह से मिलकर उनकी पूरी कहानी समझी। उनका दर्द, उनका बचपन और उनका संघर्ष। हालांकि यह अक्सर बायोपिक में किया जाता है। इसी वजह से फिल्म में जब फरहान दौड़ते हैं तो वह एक्टिंग नहीं लगती बल्कि सच में एक एथलीट की दौड़ दिखती है। रणबीर सिंह को हम उनकी एनर्जी और बड़े-बड़े किरदारों के लिए जानते हैं। लेकिन गली बॉय में उन्होंने खुद को पूरी तरह से बदल लिया।
यह फिल्म मुंबई में रहने वाले एक लड़के मुराद की कहानी है जो रैपर बनना चाहता है। मुराद कोई बनाया फिल्मी किरदार नहीं है बल्कि धारावी के असली रैपर से लिया गया है। जोया अख्तर चाहती थी कि रणबीर सिर्फ एक्टिंग ना करें बल्कि सच में उस दुनिया को समझे और उसका हिस्सा बने। इस रोल के लिए रणबीर ने महीनों तक असली रैपर्स के साथ समय बिताया। वो सिर्फ सीखने के लिए नहीं बल्कि उनकी जिंदगी को समझने के लिए उनके साथ रहे। उनके चॉल में सड़कों पर, उनके माहौल में उन्होंने उनकी भाषा सीखी। बोलने का तरीका सीखा और रैप करना भी सीखा। फिल्म के ज्यादातर रैप उन्होंने खुद गाए सबसे बड़ा चेंज उनके व्यवहार में दिखा। जहां असल जिंदगी में रणबीर बहुत एनर्जेटिक हैं। वहीं फिल्म में मुराद शांत अंदर से टूटा हुआ और संघर्ष करता दिखाई देता है। इसी वजह से उनकी एक्टिंग इतनी असली लगती है कि आप भूल जाते हैं कि यह रणबीर सिंह हैं। इस फिल्म के बाद हिपॉप को भारत में नई पहचान मिली और रणबीर ने दिखाया कि वह सिर्फ बड़े स्टार नहीं बल्कि एक मजबूत एक्टर भी हैं।
और आखिर में बात करते हैं शायद सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मेशन की जो है आमिर खान की। दंगल के लिए आमिर ने कुछ ऐसा किया जो बहुत कम एक्टर्स कर पाते हैं। उन्होंने पहले 25 किलो से ज्यादा वजन बढ़ाया और फिर उसी रोल के लिए उतना ही वजन घटाया। एक ही फिल्म के लिए दो बिल्कुल अलग लुक। फिल्म में वो रेसलर महावीर सिंह फोगाट बने हैं। एक तरफ जवान खिलाड़ी और दूसरी तरफ बड़ी उम्र के थोड़े मोटे कोच। इसके लिए आमिर ने पहले मोटापे वाला हिस्सा शूट किया ताकि बाद में वजन घटाने का पूरा मोटिवेशन रहे। वजन बढ़ाने के लिए उन्होंने खूब खाना खाया जिसे मिठाई, समोसे सब कुछ। उनका वजन 70 किलो से बढ़कर 97 किलो हो गया। लेकिन मजेदार बात यह है कि मोटे होने के बावजूद आमिर जिम जा रहे थे। भारी बेंच प्रेस और स्क्वेट्स कर रहे थे। क्योंकि उन्हें पहलवान जैसा भी तो दिखना था। फिर आया असली दंगल का समय। उन्होंने अपना वेट अगले 5 महीने में 97 किलो से 72 किलो तक कर लिया। यानी कि जहां उनके शरीर में 38% फैट था, उसे वह 9% तक ले आए। यह पागलपन नहीं तो क्या है? आमिर ने खुद कहा था कि यह प्रोसेस बहुत मुश्किल और रिस्की है और आम लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। पर्दे पर उनका ट्रांसफॉर्मेशन इतना असली लगा कि आज भी इसे सबसे बेहतरीन कायापलट में गिना जाता है।
तो यह थी सात फिल्में और सात पागलपन भरे ट्रांसफॉर्मेशन। हम स्क्रीन पर सिर्फ दो-ती घंटे देखते हैं। लेकिन इसके पीछे महीनों और सालों की भिन्न छिपी होती है। किसी ने भूख सही, किसी ने खुद को बदल लिया। सिर्फ एक किरदार के लिए। लेकिन ध्यान रखना यह सब एक्सपर्ट्स की देखरेख में हुआ था। इसे खुद ट्राई करने की कोशिश मत करना।
