बॉलीवुड भेड़ियों का गढ़ है, इंडस्ट्री को लेकर अभिनव कश्यप ने कही ये बात।

हिंदुस्तान की सबसे सुंदर खूबसूरत लड़कियां वो एक्ट्रेस बनना चाहती हैं यहां आती हैं। बॉलीवुड तो भेड़ियों का गढ़ है। प्रिडेटर्स का गढ़ है। कई महिलाएं जो बहुत सफर की हैं हमारी इंडस्ट्री में वो अपना दर्द बयान नहीं कर पाती क्योंकि उनको भी यही डर है कि किसी का नाम ले दिया या कोई इंसिडेंट बता दिया जिंदा भी नहीं छोड़ेंगे। शुरू में कमजोर थी या आर्थिक हालत उसकी खराब थी। उसने कभी में कॉम्प्रोमाइज कर लिया हो तो उसे बार-बार याद दिलाया होता है कि वह कॉम्प्रोमाइज करती है और उससे कॉम्प्रोमाइज करा के करा करा के उसको पेशेवर कॉम्प्रोमाइजर बना देते हैं। वो पहले से अवेयर रहें कि ये सब चीजें होती है यहां पे। तो जब आपको पता होता है ना कि आप आपको चोरों से बचना है। चोर दिखते कैसे हैं?

तो फिर जब चोर सामने आएगा तो आप बच भी सकते हो। आज से जब मैं 95 में आया था फिल्म इंडस्ट्री में तब भी जो वर्कर्स थे यू नो स्पॉट बॉय लाइटमैन सेटिंग के बॉयज इन लोग को यूनियन रेट्स तब भी मिलता था तब ₹2 ₹250 था अब ₹600 ₹1000 अभी भी यूनियन रेट मिल रहा है और 10 दिन ये काम करते हैं मान लीजिए ₹1000 यूनियन रेट है ₹100 का बिल लेके जाते हैं प्रोडक्शन वाला उसको काट के ₹7000 कर देता है कि भाई आगे काम करना है ना 7000 000 से काम चलाओ।

3000 वह भी खा जाता है और एक्टर्स तब उनको 50-55 लाख मिलते थे। सक्सेसफुल एक्टर्स को 75 लाख 1 करोड़ बहुत करोड़ों में हार्डली कोई था। नाना पाटेकर को मिलते थे सबसे ज्यादा एक करोड़। और आज की डेट में एक्टर्स ले रहे हैं 150 200 करोड़ और बाकी सब वर्कर्स यूनियन रेट्स पे हैं। एक जमाने में सलीम खान कितने इंटरव्यू में बोल चुके हैं। हम अमिताभ बच्चन से ज्यादा पैसा लेते थे। अमिताभ को 11 लाख दिए तो हमको 11. देना। वो राइटर ही थे ना। आज राइटर्स की क्या हालत है? राइटर्स को आज भी 11 लाख देने में नानी याद आ जाती है। बहुत कम राइटर्स हैं जिनको 11.5 लाख भी मिलते हैं।

किसी से 2 लाख, 5 लाख करके उसका आईडिया ले लेते हैं। तो फिल्म इंडस्ट्री को सोचना पड़ेगा एज एन इंडस्ट्री कि ये कर क्या रहे हैं? और ये फिल्म इंडस्ट्री खराब किसने की? यही एक्टर्स ने प्रोड्यूसर्स को आर्म ट्विस्ट करके ब्लैकमेल करके उनको हाथ मरोड़ के और धीरे धीरे धीरे-धीरे प्रोड्यूसर्स की हालत खराब है उनके स्टाफ के पैसे देने में। आपको मालूम है एक एक फर्स्ट एडी को भी हजारों में सैलरी मिलती है।

महीने का जो भी ₹00 से लेके ₹1 लाख तक महीना और इनको एक्टर्स को मेल एक्टर्स को जिनके इतने छोटे-छोटे बाल होते हैं सुबह आके बाल झाड़ने के ₹00 ले जाता है इनका नाई और नाई को नाई बोल दो तो ऑफेंड हो जाता है। कहता है आई एम अ हेयर स्टाइलिस्ट तो एक बार सुबह बाल झाड़ने के ₹00 दिन का या शायद 8 घंटे का अगर 12 घंटे की शिफ्ट हो गई तो डेढ़ शिफ्ट का पैसा और असिस्टेंट डायरेक्टर जो जब फिल्म बन रही होती है तो 24 घंटे में से उसको 6 घंटे से ज्यादा नींद नहीं मिलती वो जो 18-18 घंटे कई बार 19 घंटे तक काम करते हैं लगातार पूरे महीने का ₹1 लाख मतलब दिन का कितना हुआ मुश्किल से ₹3000 तो बहुत बुरी हालत है यहां पे। जो मेहनत करता है उसको पैसे नहीं मिलते। तो अब लोगों ने मेहनत करना बंद कर दिया है। एक चीज यह भी सुनने में आई है कि एक्टर्स अपने हेयर एंड मेकअप वालों को साथ भी इसलिए रखते हैं क्योंकि ये लोग अपना काम तो करते ही साथ ही खबरें भी देते हैं। हां, ये चुगली चापलूसी के ही हैं। ये खबरें भी देते हैं।

दूसरों के यहां क्या चल रहा है? यह झूठी खबरें भी देते हैं। जिसकी छवि ठीक करनी होती है, उसके पक्ष में बोलते रहते हैं। भाई यह बहुत अच्छा है, वह बहुत अच्छा है। हां। और जिसको गिराना होता है, उसकी चुगली भी करते हैं। भाई वो आदमी बहुत बदतमीज़ है। हमारे पैसे काट रहा है या चोरी करता है। तो चुगली चापलूसी चापलूसी कर करके ही तो ऊपर और एक्टर्स क्या बड़े इनसिक्योर कौम है। इनको ना कंटीन्यूअस वैलिडेशन चाहिए होती। तो वो मेकअप जो करता है वो बार-बार एक्टर अपने आप को शीशे में देखेगा और ये शीशे में देखे इनकी तरफ देखेगा। क्या लग रहे हो भाई? क्या लग रहे हो? तो ये कर कर के ये उसके खासदार बन जाते हैं। राजदार बनते हैं और खासदार बन जाते हैं। प्लस बहुत सारे एक्टर्स को अय्याशी करने की आदत होती है। बहुत सारे एक्टर्स ड्रग्स लेते हैं। बहुत सारे एक्टर्स लड़कीबाजी करते हैं।

तो उनको लड़की कौन सप्लाई करेगा? यही पर्सनल स्टाफ करता है। ड्रग्स कौन सप्लाई करेगा? ये पर्सनल स्टाफ करता है। एक्टर तो सड़क पे जा नहीं सकता या ड्रग पेडलर के पास जा नहीं सकता कि मुझे दे। ये लोग लेके आते हैं और इस तरह से ये राजदार बन जाते हैं और फिर ये गलत कामों का एक सिलसिला शुरू हो जाता है।

एक्ट्रेसेस के लिए इस इंडस्ट्री में माहौल कैसा है? देखिए एक महिला पे क्या बीतती है ये महिला ही जानती है। मैं तो ऊपर ऊपर से जो किसी महिला ने किसी एक्ट्रेस ने इंटरव्यू दिए हैं। उनके इंटरव्यू दे के देख के जो समझ में आता है। पर किसी भी दर्द को फील करना ना यह इट्स ऑलवेज बेटर टू आस्क द पर्सन डायरेक्टली। और आप खुद एक महिला हैं। तो, आप जानती हैं व्हाट अ वुमेन फील्स ओनली अ वुमेन कैन टेल। एंड आई डोंट थिंक वर्ड्स आर इनफ। आई नो दैट अ लॉट ऑफ़ वुमेन फील इनसिक्योर, वेरी इनसिक्योर ऑल द टाइम। एंड राइटफुली। सो मतलब भेड़ियों के बीच में मैं भी गुजरूंगा तो मुझे डर लगेगा।

बॉलीवुड तो भेड़ियों का गढ़ है, प्रिडेटर्स का गढ़ है और हिंदुस्तान की सबसे सुंदर खूबसूरत लड़कियां वो एक्ट्रेस बनना चाहती हैं यहां आती हैं एक सपना लेके और फिर उनका सामना होता है भेड़ियों से एंड आई एम अ फादर ऑफ टू गर्ल्स लॉट ऑफ पीपल लॉट ऑफ़ वुमेन हैव टोल्ड मी इन माय लाइफ आपने भी एक बार बोला कि आपको महिलाओं की समझ इतनी अच्छी क्यों है पता नहीं शायद मेरे बच्चों की वजह से मैंने अपने बच्चों से बहुत कुछ सीखा है और उनका दर्द समझने की कोशिश करता हूं उनकी बातें सुनता हूं क्योंकि वो मेरे बच्चे हैं। मुझसे झूठ नहीं बोलते। वो जो भी फील करते हैं, मैं उनको बिना जज किए सिर्फ सुनता हूं कि वो क्या फील कर रहे हैं। अगर किसी चीज से डर रहे हैं तो क्यों डर रहे हैं? हिचक रहे हैं तो क्यों हिचक रहे हैं? फिर कई बार ऐसी चीजें होती है जैसे कॉलेज के इवेंट्स हैं। मेरी एक डॉटर एथलीट थी। तो वो हार से डरती थी। घबराती थी कि मैं नहीं परफॉर्म कर पाऊंगी। ।

तो उनको कॉन्फिडेंस देना। उनको अशोर करना कि रिगार्डलेस अगर आप रेस जीतो या हारो मैं हमेशा आपके साथ हूं मैं आपके साथ खड़ा हूं एंड नथिंग विल हैपन जस्ट गो गिव इट और उससे उसका परफॉर्मेंस इंप्रूव हो जाता था तो उन सब से मैंने सीखा है कि लेडीज को हमेशा कांस्टेंट अशोरेंस की जरूरत होती है। तो मेरी जिंदगी में जो महिलाएं हैं, मैं उनको तो कोशिश करता हूं देने की। अह बाकी हीरोइनों के साथ क्या होता है? ये आपको किसी हीरोइन को ही इंटरव्यू लेना चाहिए। और यह मैं उनके विवेक पे छोड़ता हूं।

वो क्या बताना चाहती हैं, क्या नहीं बताना चाहती? होता तो बहुत कुछ है। और पर वो भी कई महिलाएं जो बहुत सफर की हैं हमारी इंडस्ट्री में वो भी दबा जाती हैं अपना दर्द। वो अपना दर्द बयां नहीं कर पाती क्योंकि उनको भी यही डर है कि किसी का नाम ले दिया या कोई इंसिडेंट बता दिया तो ये पीछे छोड़ जिंदा भी नहीं छोड़ेंगे। इट्स अनफॉर्चूनेट बट आई व्हाट कैन आई डू ठीक है। कहते हैं कि तो सिर्फ एक चीज है जिसके बारे में बात होती है। इससे भी बड़ा जाल यहां पर लड़कियों के इर्द-गिर्द बिछाया जाता है। उसको फंसा के रखा जाता है। हां ये ये सिर्फ लड़कियों के साथ नहीं होता है। लड़कों के साथ भी होता है। हां। किसी को ट्रैप करने का यह नार्सिसिस्ट का सबसे फेवरेट तरीका है ना किसी को ट्रैप करने का कि किसी को एनकरेज करो कि वह कुछ गलत काम करें।

आपसे गलत काम करवाए जाते हैं। एनकरेज किया जाता है। आपको नशा फ्री में ऑफर किया जाता है। आपको कोई लालच दिया जाता है कि पैसे चोरी कर लो या इनकम टैक्स चोरी कर लो। कुछ गलत काम करने का इंसेंटिवाइज़ करके आपको लालच दिया जाता है और आप लालच में फंस गए और आपने एक बार गलत काम कर लिया तो ये आपके राजदार बन जाते हैं। अब ये जब गलत काम करेंगे और आप इनको रोकोगे टोकोगे तब ये आपको आंख दिखाते हैं कि भाई तूने गलत काम किया था। हमने किसी को नहीं बताया। तो हमारी पोल मत खोल हम वरना तुझे एंड देन इट्स अ नेगेटिव लूप यू आर स्टक इन। टू मैंने भी बहुत गलत काम किए हैं।

कहते हैं पहली गलती गलती नहीं होती। जब जब पहली गलती आप गलती से करते हो, फिर आपको पहले खुद को माफ़ कर देना चाहिए। और अपनी गलती एस लॉन्ग एज आप सुधार लो। पर एक ही गलती जब कोई रिपीटेडली करता है, तो वो जानबूझ के इट्स अ चॉइस। इट्स नॉट अ मिस्टेक। शुरुआत में तो सभी गलती करते हैं। तो, उसी गलती को पकड़ते हैं ये लोग। नार्सिसिस्ट्स जो यूज करना हो और फिर बार-बार आपको याद दिलाते रहते हैं।

तुमने गलती की थी, हमने तुम्हें बचाया। तुमने गलती की थी, हमने तुम्हें नहीं फसाया। ऐसे करके वह आपका कंट्रोल ले लेते हैं और फिर तो लड़कियों के साथ ऐसा होता है कि कोई लड़की ने मान लो शुरू में कमजोर थी या आर्थिक हालत उसकी खराब थी उसने कभी कास्टिंग काउच में कॉम्प्रोमाइज कर लिया हो तो उसे बार-बार याद दिलाया होता है कि वो कॉम्प्रोमाइज करती है और उससे कॉम्प्रोमाइज करा के करा के उसको पेशेवर कॉम्प्रोमाइजर बना देते हैं और वो लाचार होती है ये सोच के कि अगला मुझे बदनाम ना कर दे बदनामी से सब डरते हैं मेरे केस इसमें तो मैंने बहुत सारे काम नहीं किए हैं। तब भी मुझे बदनाम कर दिया इन लोगों ने। जी आपके बारे में भी कहा गया कि हां मेरे बारे में बहुत कुछ कहा गया है। अफेयर्स यह वो अफेयर्स मेरे दो-तीन सर्विस टैक्स की रेड हो चुकी है। एक इनकम टैक्स की रेड हो चुकी है। तो ये भी इल्जाम लगे होंगे कि मैंने पैसे चुराए हैं। मेरा एक फार्मर पार्टनर होता था जो जिसने कुछ घपलेबाजी की थी कंपनी में और जिस चक्कर में मुझे कंपनी छोड़नी पड़ी।

उसके किस्से आते हैं मुझे और वो दुनिया में बोलता फिरता है कि मैंने खाए हैं पैसे। तो ये बहुत सारी बातें मेरे बारे में भी चलती हैं बाजार में। कहते हैं कि जब बेशर्म फ्लॉप हुई तो उसके भी प्रोड्यूसर डूबे थे। तो उसके बारे में अब कुछ नहीं कहते हैं। उनकी चिंता नहीं जताते हैं। नहीं वो उनसे मैं अलग हो चुका हूं। वो तो अब उन्होंने बाशु भगनानी ने उन पे कुछ केस फेस किया है। उसका मेरे केस से कोई लेना देना नहीं। हां मेरे साथ भी उन्होंने कुछ धोखाधड़ी की है तो वो भगवान उनको देगा। कोई आउटसाइडर एक्टर बनने अगर इंडस्ट्री में आता है इस तरह के लोगों से कैसे बचें जो ये सिचुएशंस आपने बताई है कि ग्रुपिज्म है यहां पर। है यहां पर। फिर टैलेंट एजेंसीज जो कहती है कि हम आपके टैलेंट को बढ़ावा देंगे। असल में एक्सप्लइट करती है। इन चीजों से कैसे सतर्क रहे? तो खुशबू जी आपने गलत शब्द यूज़ किया कि इन सब बातों से नए यंगस्टर्स कैसे बचें? भाई बचना असंभव है। यह चीजें होती आ रही हैं। यह होंगी सबके साथ। आपका शब्द होना चाहिए इन सब बातों से कैसे लड़े? क्योंकि यहां पे जो लड़ेगा अपने हक के लिए जो इन सब बातों से के खिलाफ खड़ा होगा ना वही बच पाएगा।

बिना लड़े इससे बचा नहीं जा सकता। यह लड़ाई आज जो मैं लड़ रहा हूं या लोगों को दिख रहा है कि मैं जो आवाज उठा रहा हूं तो वो मैं अपने लिए उठा रहा हूं और सबको इसमें जुड़ना पड़ेगा। सबको अपने-अपने जीवन का संघर्ष करना पड़ेगा खुद ही। अकेले आए हैं अकेले जाएंगे। और जो बचेगा अंत तक वही जीतेगा। तो अगर लोग सोच रहे हैं कि मैं सबके लिए लड़ाई लड़ूं। नहीं मैं लड़ाई नहीं लड़ रहा। मैं सबको अवेयर करा रहा हूं। यंगस्टर्स को अवगत करा रहा हूं कि जब आप भी आएंगे या आप आ चुके हैं इस फिल्म इंडस्ट्री में आपका भला नहीं हो रहा है तो क्यों नहीं हो रहा? ऊपर ऊपर से क्या खेल हो रहा है? और कौन है जो ना सिस्टम को रीक करके बैठा है उनको मैं एक्सपोज कर रहा हूं कि ये बड़े पावर्स बड़ी ताकतें जो हैं जो कैसे एक सिस्टमैटिक लूट का धंधा है चल रहा है हमारे फिल्म इंडस्ट्री में उसको एक्सपोज कर रहा हूं मैं। पर मैं अकेला इनसे जीत नहीं सकता। और अगर मैं जीत भी गया तो अपने लिए जीतूंगा। और अगर आप चाहते हो कोई भी यंगस्टर चाहता है कि वो भी जीते तो उसको मेरे साथ जुड़ना पड़ेगा। उसको मेरी आवाज में आवाज मिलानी पड़ेगी। मैं अवेयर कर सकता हूं। अपना एक्सपीरियंस पास ऑन कर सकता हूं। पर मैं यंग नहीं हो सकता। अब मैं 51 साल का हूं।

मेरे तो बेस्ट इयर्स खत्म हो चुके हैं। आपको अपने बचाने हैं तो आइए मेरे साथ। तभी तो मैंने पिछली बार भी जजी को आह्वान किया था कि जो नेपाल में हुआ वो अब इंडिया में भी इस तरह की चीजें होनी चाहिए। नेपाल में नेताओं के खिलाफ हुआ क्योंकि वहां के नेता बेईमान थे। हमारे देश में कम से कम ना सेंटर में और हमारे स्टेट में नेता ठीक है, गवर्नमेंट ठीक है। पर ऑर्गेनाइजेशंस में प्राइवेट सेक्टर में बहुत करप्शन है। बहुत बेईमानी है, बहुत बुलिंग है। कोई भी कॉर्पोरेट बच्चा आपको बता देगा कि यार उसका बॉस उसके सारे अच्छे काम के क्रेडिट खा जाता है। और जब गलतियां होती हैं उससे तो वो ब्लेम हम पर डाल देता है। इसको स्केप गोटिंग बोलते हैं। सब जगह ना बलि का बकरा ढूंढते हैं। स्केप गोट और सबसे जूनियर और कमजोर इंसान है। उसके ऊपर जिम्मेदारी मढ़ के उसको निकाल देते हैं काम से। जब खराब होता है काम अच्छा होता है तो सब श्रेय लेने आ जाते हैं आगे। तो कहते हैं सक्सेस एज़ मेनी फादर्स फेलियर हैज़ नन। तो ये हर सेक्टर में है। सिर्फ बॉलीवुड में नहीं है। हर सेक्टर में है।

हां। पर हमारे यहां थोड़ा क्या है? गवर्नमेंट की पहुंच कम है क्योंकि अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर है तो यहां पे अत्याचार बहुत ज्यादा होता था। पर अगर हम सब साथ आ जाएंगे एंड ऑल द किड्स कम टुगेदर। आई एम हैप्पी टू गाइड देम। आई एम हैप्पी टू मेंटर देम व्हिच आई एम ऑलरेडी डूइंग। बहुत सारे यंगस्टर्स को मैंने तैयार किया है गुजरे सालों में और कुछ तो बहुत अच्छा कर रहे हैं अभी। मुझे नहीं समझ में आता। मुझे उनका नाम लेना चाहिए क्योंकि फिर उनकी जीवन में खतरा ना हो जाए। उनकी जीवन खराब ना हो जाए। पर मेरे बड़े सारे ट्रेंड बच्चे आज बहुत अच्छा काम कर रहे हैं इंडस्ट्री में और मुझे खुशी है कि मैं उनके काम आ पाया क्योंकि ना मैं नहीं चाहता था कि जो मेरे साथ हुआ वो इन लोग के साथ भी हो। तो मैं इनको समय रहते गाइड कर पाया कि किसी भी मुश्किल से आप टैकल कैसे करो। समस्याएं तो आती हैं। समस्याएं सबके जिंदगी में आती हैं। समस्याओं से डील करने आना चाहिए।

हम लोग फर्स्ट जनरेशन थे। शायद हमारे पास कोई मेंटर नहीं था। किसी ने सिखाया नहीं कि कैसे डील करूं। तो डिप्रेस हो जाते थे, रोते थे, तकलीफ सहते थे। अब हर पीढ़ी का एक दायित्व है। कम से कम अगली पीढ़ी के लिए जिंदगी आसान करे। तो मैं यह सब बातें इसलिए कर रहा हूं कि जो लोग पढ़ देख रहे हैं, मेरा पडकास्ट सुन रहे हैं, वह पहले से अवेयर रह कि यह सब चीजें होती है यहां पे। तो जब आपको पता होता है ना कि आप आपको चोरों से बचना है, चोर दिखते कैसे हैं, तो फिर जब चोर सामने आएगा तो आप बच भी सकते हो। करेक्टिव एक्शन इसको प्रीविजुअलाइजेशन बोलते हैं। सलमान खान निजी रूप से मैं जानता हूं बहुत ही घमंडी और गंदा आदमी है। उनका पाला सलमान खान जैसे बुलीस से पड़ जाए तो वो तो घबरा जाएंगे बेचारे। सुशांत की डेथ अगर ढंग से इन्वेस्टिगेट की जाए तो एक थ्योरी है कि वो सुसाइड था ही नहीं। वो तो मर्डर था।

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