अहमदाबाद विमान हादसे पर यूएस के एविएशन एक्सपर्ट ने किया खुलासा।

एयर इंडिया 171 हादसे पर आई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद फ्यूल कट ऑफ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिका की एिएशन लॉ एक्सपर्ट मैरीस क्याो ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस से बातचीत में दावा किया है कि बोइंग 787 के फ्यूल कंट्रोल स्विच से जुड़ी गड़बड़ी पहली बार नहीं हुई। साल 2019 में भी जापान की ऑल निपॉन एयरवेज यानी एएनए की एक फ्लाइट में फ्यूल कट ऑफ स्विच अपने आप एक्टिव हो गया था। यानी तब भी इंजन की फ्यूल सप्लाई अपने आप बंद हो गई थी।

इनमें पायलट्स का कोई रोल नहीं था। AI171 की बात करें तो एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानीएएआईबी की रिपोर्ट में बताया गया कि प्लेन के दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई अचानक कट गई। पायलटों की आपसी बातचीत में भी फ्यूल स्विच को लेकर बातचीत है। बातचीत में एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि फ्यूल क्यों कट किया और दूसरे ने जवाब दिया कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके 15 सेकंड बाद विमान क्रैश हो गया। सवाल यह है कि अगर इंसानी गलती नहीं थी तो फ्यूल कट कैसे हुआ? मैरीज केवो ने बताया कि यह तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि 2019 की एएनए फ्लाइट में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। वहां बोइंग 787 ने अपने सॉफ्टवेयर की वजह से यहसमझा कि प्लेन जमीन पर है जबकि वह रनवे पर लैंड कर रहा था। इस भ्रम के कारण थ्रस्ट कंट्रोल मालफंक्शन अकोमोडेशन यानी टीसीएमए सिस्टम ने फ्यूल अपने आप ही बंद कर दिया। उस वक्त भी दोनों इंजन फ्लेम आउट हो गए थे। लेकिन विमान रनवे पर था और जान माल का नुकसान नहीं हुआ। मैरी ने यह भी बताया कि एफएए यानी अमेरिका की एिएशन रेगुलेटरी बॉडी ने 2018 में फ्यूल शट ऑफ वॉल्व को लेकर एक एडवाइज़री जारी की थी। लेकिन यह कंपलसरी नहीं थी। रिपोर्ट कहती है कि AI171 में 2019 और 2023 में टीसीएम यानी थ्रोटलल कंट्रोल मॉड्यूल बदला गया था।

लेकिन फ्यूल स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म कभी जांचा ही नहीं गया। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि क्रैश के ठीक 4 हफ्ते पहले यूके की सिविल एिएशन अथॉरिटी ने बोइंग के फ्यूल सिस्टम में संभावित गड़बड़ी को लेकर अलर्ट जारी किया था। इनमें बोइंग 737 757, 767, 777 और 787 सभी मॉडल शामिल थे। इसके बावजूद AI171 की फ्लाइट में दोनों इंजनों की फ्यूल सप्लाई अचानक बंद हो गई और 242 लोगों से भरा विमान हॉस्टल की इमारत से टकरा गया। मैरीज की आगो का कहना है कि अब तक इस क्रैश के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। एएआईबी की रिपोर्ट नेबोइंग को क्लीन चिट जैसी कोई बात नहीं कही। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो यह एिएशन इन्वेस्टिगेशन के नियमों के मुताबिक नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक सॉफ्टवेयर की जांच नहीं होती तब तक भविष्य की उड़ानों में यह खतरा बना रहेगा। उनकी सलाह है कि पूरी सीवीआर रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और अटकलें बंद हो। आपको बता दें एएआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक टेक ऑफ के 9 सेकंड बाद इंजन बंद हो गए थे। 5 सेकंड के भीतर रैम एयर टरबाइन माने आर एटी बाहर आ गया था।

दोनों इंजन दोबारा शुरू करने की कोशिश की गईलेकिन विमान की ऊंचाई बहुत कम रह गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि आरएटी के एक्टिव होने का मतलब है कि विमान ने लगभग पूरी तरह से पावर खो दी थी और विमान टेक ऑफ से सिर्फ 35-40 सेकंड बाद ही ग्राउंड से टकरा गया। की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया था कि विमान के दोनों इंजन हाल ही में बदले गए थे। लेफ्ट इंजन 1 मई को और राइट इंजन 26 मार्च को लगाया गया था। दोनों इंजन जीई कंपनी के वन बी मॉडल के थे। रिपोर्ट के मुताबिक इन इंजनों के खिलाफ एफए या जीई की कोई तकनीकी चेतावनी या एयरवनेस डायरेक्टिव नहीं दियागया था। क्रैश के समय विमान में सभी टेक ऑफ सेटिंग सामान्य थी। फ्लैप एंगल, वजन, गति और ट्रिम जैसे सभी पैराटर्स एसओपी के अनुसार थे।

पायलटों की बातचीत और सिस्टम रिकॉर्डिंग को आगे के हिस्सों में लगे ईएफआर माने एनहांस्ड एयरबर्न फ्लाइट रिकॉर्डर से रिकवर किया गया। इस रिकॉर्डर से 49 घंटे का डाटा मिला जिसमें घटना वाली उड़ान एआई171 भी शामिल थी। फिलहाल प्रारंभिक रिपोर्ट में भी हादसे की वजह साफ नहीं हो पाई हैं।

ऐसे में अब इंतजार फाइनल रिपोर्ट का है क्योंकि बात सिर्फ इतनी नहीं है कि प्लेन का इंजन स्विच ऑफ हुआ। इंजन बंद हुआ और प्लेन क्रैश हो गया।सवाल यह है कि ऐसा कैसे हुआ और इस क्रैश के पीछे क्या वजह थी? जवाबों की तलाश अब और तेज होनी चाहिए। फिलहाल इस खबर में इतना ही। आपके लिए यह सारी जानकारी लेकर आए थे हमारे साथी दीपेंद्र गांधी। मैं हूं शिवानी। बाकी खबरों के लिए देखते रहिए दिल टॉप। बहुत-बहुत शुक्रिया। [संगीत]

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