एयर इंडिया से पिछले ही साल रिटायर हुए हैं और बोइंग ड्रीम लाइनर के पायलट रहे हैं। कैप्टन राय जो सीधा सवाल है l जो हवाई यात्रा करता है और जो नहीं भी जो फ्यूल स्विच है वो कब ऑन होती है और वो कब ऑफ होती है? फ्यूल स्विच को ऑन किया जाता है जब हम अपने गेट पर जहाज खड़ा होता है और जब इंजन को स्टार्ट किया जाता है फ्लाइट के पहले। जी उस समय से लेकर फ्यूल स्विच ऑन रहता है तब तक जब तक कि जहाज अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच ना जाए और गेट पर पहुंच पहुंचकर खड़ा ना हो जाए तब हम फ्यूल स्विच को कट ऑफ करते हैं इंजन को बंद करने के लिए।
ऐसे में सवाल है कि क्या यह स्विच किसी सॉफ्टवेयर से जुड़ा है या फिर मैनुअली ही इसे ऑन और ऑफ किया जाता है? इस स्विच को मैनुअली ही ऑन और ऑफ किया जाता है। सॉफ्टवेयर से रिलेटेड नहीं है। इसको स्विच को थोड़ा हल्का ऊपर उठाकर और ऊपर किया जाता है और फिर जब नीचे करना हो तो फिर से हल्का ऊपर उठाकर नीचे किया जाता है। जैसे कुछ कुछ गाड़ियों में रिवर्स गियर लगाने के लिए आपने देखा होगा कि गियर लीवर को ऊपर खींचकर और रिवर्स में लगाते हैं।
उसी तरह का ये सिस्टम है। तो ऐसे यह बताइए कि क्या एक्सीडेंटली ह्यूमन एरर की वजह से कभी एक्सीडेंटली यह अगर इस पर हाथ लग गया गलती से तो यह ऑफ हो सकता है? क्या इसमें ताकत लगती है इसे ऑन ऑफ करने में? अ नॉर्मल कंडीशन में इसको हाथ से पकड़ के ही किया जाता है। लेकिन बोइंग कंपनी ने एक सर्विस बुलेटिन जारी किया था 2018 में। उसके अनुसार यह स्विच जो है कुछ हाथ लगने से भी नीचे आ सकता है अंदर के कुछ पुरजों में खराबी होने के कारण और इस बुलेटिन में कहा गया था कि सारे जहाजों में इसको चेक किया जाए लेकिन ये एडवाइज़री था। ये अनिवार्य नहीं था। तो अभी ये पता नहीं कि इसको सीरियसली लिया गया कि नहीं और ये चेक किया गया कि नहीं। लेकिन ये एक सिचुएशन है। ये एक संभावना है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच थोड़ा हाथ लगने से भी नीचे आ सकता है। अगर उसके उसमें कोई तकनीकी खराबी हो तो हाथ लगने से जी जी अन्यथा नॉर्मल सिचुएशन में उसको हाथ से ही उठाकर करना पड़ता है। मैनुअली करना होता है।
लेकिन अगर कोई तकनीकी खराबी हो तो हाथ लगने से गलती से लगने से भी यह ऑफ हो सकता है। स्विच को कौन ऑपरेट करता है? ये अधिकार कॉकपेट में किसके पास होता है? पायलट के पास, को पायलट के पास? दोनों में से किसी के भी पास हो सकता है। ये निर्भर करता है कि कौन पायलट जहाज को उड़ा रहा है और कौन पायलट जहाज को मॉनिटर कर रहा है। तो कमांड पायलट देगा कोपायलट को तब इसको ऑपरेट किया जाएगा। ऐसा ऐसा ऐसा प्रोसीजर है।
इस स्विच को ऑपरेट करने के लिए हमेशा एक पायलट को बोलना पड़ता है कि मैं यह स्विच ऑपरेट कर रहा हूं। दूसरा पायलट उसको चेक करेगा कि उसके इस पायलट की का जो हाथ है वो सही जगह पे है और वो बोलेगा हां आप ठीक कर रहे हैं तभी ये स्विच ऑपरेट होता है। जी तो इसमें कमांड और क्रॉस चेक की बात होती है। तो एक अगर कर रहा है तो दूसरे को वो जानकारी देगा। लेकिन जो बात रिकॉर्डिंग में सामने आई है कि एक ने दूसरे से पूछा क्या तुमने इसे ऑफ किया था? उसके बाद इसे दोबारा ऑन करने की कोशिश की। एक इंजन शुरू भी हो गया लेकिन मैनेज नहीं हो पाया। बहुत कम वक्त था उस वक्त।
ये जो एक वाक्य जो हम बार-बार सुन रहे हैं कि वो पायलट ने कहा कि क्या तुमने इसे ऑफ किया। सिर्फ इस एक वाक्य से पूरी स्थिति का जायजा लेना बहुत ही मुश्किल है। इसके बाद पायल कॉकपिट में क्या हुआ, पायलट के बीच में आपस में क्या बातचीत हुई जब तक वो हमें पता नहीं चलेगा तब तक यह कहना मुश्किल है कि यह स्विच ऑफ कैसे हुआ और किसने किया या अपने आप हो गया यह कहना बहुत मुश्किल है। सो अगर कोई यह कह रहा है कि यह जानबूझकर किया गया है। यह अभी कहना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर में कॉकपिट में जितनी बातें हुई हैं उनमें से सिर्फ एक वाक्य को बताया गया है और बाकी बातों को उनका खुलासा अभी नहीं हुआ है।
तो इसे इंटरप्रेट करना अभी बाकी है। आप यह कह रहे हैं। तो ऐसे में यह बताइए जब यह जानकारी दोनों को मिली कि यह ऑफ है। फिर उन्होंने ऑन करने की कोशिश की। रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि एक इंजन ऑन भी हो गया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। क्रैश हुआ एयरक्राफ्ट तो वक्त बहुत कम था। क्या इंजन ऑन हुआ और मैनेज नहीं कर पाए दोनों पायलट? देखिए जेट इंजन में और प्रोपेलर एयरक्राफ्ट इंजन में यह एक अंतर है। प्रोपेरल एयरक्राफ्ट इंजन में जैसे ही आप पावर बढ़ाते हैं आपको पावर तुरंत मिल जाता है। लेकिन जेट इंजन में पावर पूरी तरह से मिलने में थोड़ा समय लगता है। हम तो उस कारण से पायलट्स के पास इतना समय नहीं था कि उस इंजन जो चलना शुरू हुआ था उसका वो फायदा उठा सके। उनके पास उतना समय नहीं था। हम इसके पहले कि इंजन पूरी तरह से पूरी अपनी ताकत से चलने लगे उसके पहले ही एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। जी एक थ्यरी ये भी है जो जानकार कह रहे हैं कि जो फ्यूल की परिटी अगर सही नहीं है तो क्या जो फ्यूल स्विच है वो ऑफ हो सकता है क्या? फ्यूल के परिटी से स्विच ऑफ होने का कोई लेना देना नहीं। जी जी तो ये अपने आप ऑफ नहीं होगा। अगर प्योरिटी है नहीं है उसका स्विच से ऑन ऑफ होने से कोई लेना देना नहीं है। आप ये कह रहे हैं। कोई लेना देना नहीं। चलिए टेक ऑफ और क्रैश के बीच 32 सेकंड का वक्त था। आपको लग रहा है पायलट और को पायलट के पास कुछ भी विकल्प था कि वो मैनेज कर पाते इस क्रैश को नहीं होने से। 32 सेकंड ऐसे तो समय तो 32 सेकंड था। लेकिन अगर आप यह देखें कि पायलट को यह समझने में समय लगा होगा कि क्या हुआ। उसके बाद पायलट को उस स्थिति को परखने में समय लगा होगा।
तो पायलट के पास 32 सेकंड नहीं मात्र 15 या 20 सेकंड ही रहा होगा। हम 15 से 15 लेस टाइम टू गेज एनीथिंग। आपको लगता है बहुत कम समय हम बहुत कम समय। तो इस वक्त ये सवाल उठ रहा है कि क्या यह एक ह्यूमन एरर है या फिर टेक्निकल एरर है? इस पर बहस छिड़ी हुई है। तमाम जानकार दो-दो राय में बटे हुए हैं। आपको इस वक्त क्या लगता है? किस वजह से यह हुआ होगा जो शुरुआती जांच रिपोर्ट आई है आपने भी पढ़ी होगी जब तक कॉकपिट में इस वाक्य के बाद कि क्या तुमने यह स्विच ऑफ किया इस वाक्य के बाद क्या-क्या बातें हुई है जब तक यह हम जान नहीं पाएंगे जब तक इसका खुलासा नहीं होगा और उन बातों का जहाज के तकनीकी स्थिति से जोड़कर देखा नहीं जाएगा।
यह कहना बहुत मुश्किल है कि इस एक्सीड का कारण क्या था? तो शुरुआती जो रिपोर्ट आई आप कह रहे हैं कि अभी भी कुछ कहना मुश्किल है क्योंकि अभी जो बारीकी से पूरी जानकारी सामने नहीं आती है तो कहना मुश्किल होगा कि ह्यूमन एरर था या टेक्निकल एरर आप ये कह रहे हैं। बिल्कुल सही। बहुत शुक्रिया आपने एनडीटीवी इंडिया के लिए वक्त निकाला। कैप्टन राय और इस चर्चा में आप जुड़े। एनडीt के साथ बातचीत में पूर्व पायलट मोहन रंगनाथन ने कहा है कि फ्यूल स्विच को जानबूझकर ऑफ किया गया। वह भी यह पता होने के बावजूद कि इससे विमान क्रैश हो सकता है। जबकि विमानन मंत्रालय के पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी सनत कॉल ने डीटीवी से कहा कि यह सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी का एक मामला हो सकता है।
