जेफरी एस्टीन के गुनाहों के काले साम्राज्य की परछाई एक बार फिर वाइट हाउस की दहलीजों तक पहुंच गई है। अमेरिका की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब फर्स्ट लेडी मिलानिया ट्रंप को खुद सामने आकर इन गंभीर आरोपों पर सफाई देनी पड़ी।
लेकिन इस सफाई के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई और एस्टीन फाइल्स के पन्ने कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। क्या युद्ध की आड़ में दुनिया के सबसे घिनौने अपराध को दबाने की कोशिश की जा रही है? एक तरफ मिलानिया ट्रंप प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस्टीन से किसी भी संबंध को झूठा कलंक बता रही हैं। तो दूसरी तरफ सार्वजनिक हो चुके अदालती दस्तावेज और तस्वीरें कुछ और ही यहां पर गवाही देते हुए नजर आ रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब सबूत फाइलों में चीख-चीख कर सच बोल रहे हैं।
तो अमेरिका की जनता खामोश क्यों है? क्या ईरान के साथ छेड़ा गया युद्ध वाकई लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची समझी साजिश थी? आइए मिलानिया के दावों और एस्टीन फाइल्स के उन सच को समझते हैं जिन्हें दुनिया से छिपाने की कोशिश हो रही है।
वाइट हाउस में हुई एक हाई वोल्टेज प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिलानिया ट्रंप ने जेफरी एपस्टीन और उसकी साथी गिसलेन मैक्सवेल से किसी भी तरह की दोस्ती होने से साफ इंकार किया। उन्होंने कहा मुझ पर लगाए जा रहे आरोप अनैतिक हैं और इन्हें तुरंत खत्म होना चाहिए। मिलानिया ने स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा के हाई सोसाइटी सर्कल्स में कभी-कभी लोग एक दूसरे से मिल जाते थे।
लेकिन उनका एस्टीन के अपराधों से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने तो यहां तक मांग कर दी कि कांग्रेस को पीड़ितों के लिए सार्वजनिक सुनवाई पब्लिक हियरिंग करानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। आरोपों को नकारना जितना आसान है सबूतों को मिटाना उतना ही मुश्किल। न्याय विभाग द्वारा जारी दस्तावेजों में 2002 का एक ईमेल सामने आया है जिसमें मिलानिया ने मैक्सवेल को बड़े प्यार से प्यारी जी यानी कि डियर जी कहकर संबोधित किया है।
इसके अलावा इपस्टीन के घर से मिली एक पुरानी तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप, मिलानिया और मैक्सवेल एक साथ मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। मिलानिया का कहना है कि यह सब महज औपचारिक मुलाकातें थी। लेकिन एपस्टीन की फाइल्स में दर्ज लाखों पन्ने बताते हैं कि यह संबंध इतने भी आम नहीं थे। इन पूरे मामले की वजह से सबसे बड़ी जो विडंबना है वो यह है कि एपस्टीन की फाइल्स में दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के नाम होने के बावजूद आज भी उनमें से ज्यादातर खुलेआम घूम रहे हैं।
अमेरिका की जनता जो लोकतंत्र और न्याय की बात करती है, वह इन जघन्य अपराधों के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरी है। सबूतों के अंबार के बावजूद कोई ठोस कारवाही ना होना यह दर्शाता है कि दुनिया को चलाने वाले और कोई नहीं बल्कि वही लोग हैं जिनके नाम इन फाइल्स के काले पन्नों में दर्ज हैं। जनता आज उन लोगों द्वारा शासित होने को मजबूर है जिन पर गंभीर आरोप है।
कई अंदरूनी सूत्रों और विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा हाल ही में छेड़ा गया जो युद्ध है ईरान के साथ वह जो तनाव हुआ था वह महज एक डिस्ट्रैक्शन था। ध्यान भटकाने का तरीका था इन सभी एस्टीन फाइल्स से। यह तर्क दिया जा रहा है कि जब एस्टीन मामले में ट्रंप और उनके करीबियों के नाम उछलने लगे तो जनता का ध्यान हटाने के लिए राष्ट्रवाद और का सहारा लिया गया।
यह इतिहास का सबसे बुरा तरीका है। जहां एक बड़े अपराध को छिपाने के लिए मासूमों की जान जोखिम में डाल दी जा डाल दी गई। मिलानिया ट्रंप भले ही पीड़ितों के लिए सुनवाई की मांग कर रही हो लेकिन यह भी एक राजनीतिक चाल हो सकती है। अमेरिका की जनता को यह समझना होगा कि युद्ध खत्म हो सकते हैं लेकिन बच्चों के साथ हुए उन घिनौने अपराधों के जख्म कभी नहीं भरते।
अगर आज जनता इन अपराधियों के खिलाफ खड़ी नहीं हुई तो वे हमेशा आजाद रहेंगे और दुनिया को अपनी उंगलियों पर ऐसे ही नचाते रहेंगे। यह वक्त खामोश रहने का नहीं बल्कि उन फाइलों के हर एक मुजरिम को कटघरे में खड़े करने का है। बाकी फैसला आपका है।
