पुतिन का बड़ा दांव!32 घंटे के लिए रुकी रूस-यूक्रेन जं!ग

पहले अमेरिका, ईरान और अब रूस, यूक्रेन। अंतरराष्ट्रीय लेवल पर हलचल तेज है। पहले ये देश युद्ध से दहल जाते थे और अब एक के बाद की घोषणा हो रही है। अब रूस यूक्रेन के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। जंग के बीच अब शांति की एक छोटी सी उम्मीद दिखाई दी है। दरअसल रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे के का ऐलान कर दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक धार्मिक विराम है या शांति की दिशा में पहला कदम माना जा सकता है? और क्या यूक्रेन भी इसका पालन करेगा? आइए इस पूरे घटनाक्रम को आसान भाषा में समझते हैं।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी को अब 4 साल से ज्यादा का समय हो चुका हैसाल 2022 में शुरू हुआ यह युद्ध अब पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है और नतीजा यह हुआ कि इसमें हजारों लाखों लोगों की जान जा चुकी है। दोनों देशों के बीच लगातार हमले, और जमीन पर लड़ाई जारी रही है।

ऐसे समय में जब भी यानी विराम की खबर आती [संगीत] है तो दुनिया की उम्मीदें बढ़ जाती है कि शायद अब शांति की कोई राह निकले और दोनों देशों के बीच लड़ाई पर विराम लगे।

अब इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने ऑर्थोडॉक्स ईस्टर के मौके पर 32 घंटे के अस्थाई की घोषणा कर दी है। यह 11 अप्रैल को शाम से शुरू होकर 12 अप्रैल की रात तक चलेगा और इसी दौरान रूसी सेना को सभी मोर्चों पर हमले रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि सेना को सतर्क रहने के लिए भी कहा गया है ताकि किसी भी हमले का जवाब [संगीत] दिया जा सके। अब सवाल यह है कि ऑर्थोडॉक्स ईस्टर क्या है? और आखिर ईस्टर पर ही सीज फायर क्यों हुआ? दरअसल ऑर्थोडॉक्स ईस्टर ईसाई धर्म का सबसे अहम त्यौहार माना जाता है जिसे पास्का भी कहा जाता है। यह दिन यीशु मसीह के रिसरक्शन की याद में मनाया जाता है जो क्रिश्चियंस का सबसे बड़ा प्रतीक है।

यह त्यौहार मुख्य रूप से ईस्टर्न ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़े देशों में मनाया जाता है। जैसे रूस, यूक्रेन, ग्रीस और रोमानिया। इस दिन लोग प्रार्थना करते हैं, चर्च जाते हैं और शांति, उम्मीद और नई शुरुआत की कामना करते हैं। ऐसे में युद्ध को थोड़ी देर के लिए रोकना एक मानवीय पहल माना जाता है ताकि लोग बिना डर के त्यौहार मना सके और इस बार का सीज फायर एक तरफफ़ा फैसला नहीं बल्कि यूक्रेन भी पहले से ही ऐसा प्रस्ताव देता रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वदमीर जेलस्की ने हाल ही में अमेरिका के जरिए रूस को प्रस्ताव भेजा था कि ईस्टर के दौरान दोनों देश एक दूसरे के एनर्जी स्ट्रक्चर्स पर हमला ना करें। यानी दोनों तरफ से शांति की इच्छा दिखाई गई है और पुतिन के इस फैसले के बाद जेलस्की का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन हमेशा से ईस्टर पर का समर्थन करता रहा है और इस बार भी वो दिशा में कदम उठाएगा।

उन्होंने उम्मीद जताई है कि लोग इस बार बिना किसी डर के ईस्टर मना सकेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रूस से शांति को आगे भी जारी [संगीत] रखें। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब ऐसा सीज फायर घोषित किया गया हो। पिछले साल भी ईस्टर के मौके पर रूस ने इसी तरह का युद्ध विराम घोषित किया था। लेकिन उस दौरान दोनों देशों ने एक दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा दिए थे।

इसलिए भी इस बार भी लोगों की नजरें इस बात पर टिकी है कि क्या सच में शांति बनी रहेगी? वहीं रूस की तरफ से साफ कहा गया कि उनकी सेना सीज फायर के दौरान भी पूरी तरह सतर्क रहेगी।

अगर यूक्रेन की तरफ से कोई हमला होता है तो उसका जवाब दिया जाएगा। तो आप इसका मतलब यह समझ सकते हैं कि यह पूरी तरह से भरोसे वाला युद्ध विराम नहीं है बल्कि कंडीशनल पीस यानी शर्तों के साथ बनाई गई शांति है। जिसमें दोनों देश एक दूसरे पर नजर रखेंगे।

इसी के साथ इस के पीछे एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलू है। अमेरिका लगातार रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्था करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि अभी तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। लेकिन इस तरह के छोटे-छोटे सीज फायर भविष्य में बड़ी बातचीत का रास्ता खोल सकते हैं।

इसलिए इसे अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। और हाल ही में दोनों देशों के बीच मारे गए सैनिकों के शवों का आदानप्रदान भी हुआ है। रूस ने यूक्रेन को सैनिकों के शव लौटाए हैं। जबकि यूक्रेन ने 41 रूसी [संगीत] सैनिकों के शव सौंपे हैं। तो कुल मिलाकर रूस यूक्रेन के बीच 32 घंटे का यह सीज फायर भले ही छोटा हो लेकिन इसके मायने बेहद बड़े हैं।

अब सवाल यही है कि क्या यह अस्थाई कदम स्थाई समाधान की ओर इशारा करता है या फिर जंग पहले की तरह जारी रहेगी।

Leave a Comment