अमेरिका और ईरान के बीच में भले ही दो हफ्ते के लिए सीज फायर का ऐलान किया गया हो, लेकिन जिस तरह से ईरान के तेवर तल्क है, उस पर हॉरम पर [संगीत] संकट बरकरार है। और अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हॉरम स्ट्रेट फिर से खुलेगा?
क्या ईरान भारत के लिए अपने दरवाजे खोलेगा? क्या भारत में गैस [संगीत] और तेल का संकट खत्म होगा? इन सवालों के बीच में लगातार संशय के बादल बने हुए हैं क्योंकि हॉर्मोडस्टेट में अभी भी कई जहाज फंसे हुए हैं। लेकिन अब इस स्थिति के बीच में भारत ने अपना प्लान भी तैयार कर लिया है और सरकार अब भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति को पूरा करने के लिए एक दूसरे देश का सहारा ले रही है। तो कौन सा है वह देश और क्या है भारत सरकार का प्लान भी? Lकैसे देश में खत्म होगा तेल और गैस का संकट? जानते हैं इस रिपोर्ट में। दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच मेंभारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री सीधा क़तर पहुंच गए हैं।
वह दो दिवसीय यात्रा पर है। क़तर भारत के एलपीजी और एलएनजी की जरूरतों का प्रमुख सोर्स है। यानी कि हरदीप सिंह पुरी उस देश में पहुंचे हैं जहां से भारत के लिए एलपीजी और एलएनजी के लिए रास्ते खुलेंगे। कतर भारत के लिए एलएनजी और एलपीजी दोनों का सबसे बड़ा सप्लायर है। कतर से एलएनजी की 45% और एलपीजी की 20% सप्लाई होती है।
अपनी विशाल निर्यात सुविधा पर हुए हमलों के बाद इस खाड़ी देश ने गैस निर्यात पर फोर्स मेजोर घोषित किया था और कहा था कि पूरी तरह से ठीक होने में उसे कई [संगीत] साल लग सकते हैं। मार्च 2026 में क़तर की रास लफान सुविधा पर हुए हालिया हमलों की वजह से आपूर्ति बाधित [संगीत] हो गई। इन सबके बीच में भारत ने एक बार फिर से क़तर से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत बढ़ाई है और यही वजह है कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी [संगीत] खुद क़तर पहुंचे हैं।
क़तर पहुंचने पर भारत के राजदूत विपुल और क़तर एनर्जी के अधिकारियों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
सूत्रों के मुताबिक पूरी ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने पर भारत को प्राथमिकता देने का कतर से अनुरोध कर सकते हैं। पेट्रोलियम मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच मेंसंघर्ष विराम की संभावनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जगी है।
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की करीब आधी और एलपीजी की लगभग दो तिहाई जरूरत आयात से पूरी करता है। जिसमें अधिकांश आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने, मौजूदा समझौते की समीक्षा करने और द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हो सकती है।
और अगर क़तर इस पर राजी हो जाता है तो भारतके लिए एलपीजी और तेल का रास्ता और आसान हो जाएगा। तो अब देखना होगा कि भारत का यह प्लान भी किस तरीके lसे काम करता है और क्या वाकई में क़तर भारत को तेल और गैस देने के लिए राजी होता है।
