खड़े-खड़े आगे-पीछे होते रहे, भारत में फैली कैसी बीमारी?

नशे में घंटों बेसुद खड़ा रहा । ना होश, ना कंट्रोल, पहले चंडीगढ़, फिर बिहार और अब बेंगलुरु। यह हालत जिसे लोग से जोड़कर देख रहे हैं। धीरे-धीरे हर राज्य के लोग खासकर युवाओं को अपनी चपेट में ले रहा है।

अलग-अलग राज्यों से आए यह वीडियोस इस बात का सबूत है कि भारत में तेजी से खतरनाक ज़ॉम्बी फैल रहा है। यह इतना खतरनाक है कि महज 2 घंटे में इंसान को पुतला बना देता है और पहुंचा देता है के दरवाजे तक। इस ड्रग की खोज अमेरिका में हुई थी। जिसका असर अब भारत में बहुत ही तेजी से दिखने लगा है।

.अब जानते हैं यह ज़ॉम्बी है क्या? यह कोई नया केमिकल नहीं बल्कि पशुओं की दवा में इस्तेमाल होने वाला जाइज़लीन को बहुत पावरफुल ओपियोड स्पेंटिनिन के साथ मिलाकर बनाया गया मिश्रण है। जाइज़लीन असल में घोड़ों और गायों को शांत करने के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन सड़क पर इसे ड्रग्स में मिलाकर बेचा जाता है ताकि नशा ज्यादा लंबा चले। अमेरिका में इसे ट्रैंक या ट्रैंक ड्रॉप कहते हैं। इस ट्रक को लेने के बाद आखिर होता क्या है? यह भी जान लेते हैं।

सांस धीमी, दिल की धड़कन कम और मसल्स पूरी तरह ढीले पड़ जाती हैं। व्यक्ति घंटों तक फ्रीज़ होकर खड़ा या बैठा रह जाता है। यानी आंखें खुली लेकिन कोई रिएक्शन नहीं। लंबे इस्तेमाल से त्वचा सड़ने यानी कि स्किन रॉटिंग होने लगती है। घाव भी बन जाते हैं। ओवरडोज होने से सांस बंद होकर भी हो सकती है। लेकिन सबसे हैरान और परेशान करने वाला लक्षण है इंजेक्शन लगाने की जगह पर बन जाने वाले घाव जो कच्चे और पकड़ीदार होते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं। यहां तक कि ओवरडोज की दवा नाग्जिन भी इस पर पूरा असर नहीं करती।

बता दें कि भारत में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं कि यह ड्रग फैला है। लेकिन लक्षणों को देखते हुए यही कयास लगाए जा रहे हैं कि यह अब घर कर चुका है जो समाज के लिए खासकर पेरेंट्स के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि इसका शिकार ज्यादातर युवा हो रहे हैं। और तो और भारत में जाइज़लीन के अवैध इस्तेमाल को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।

सरकार के सेंट्रल स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन यानी सीडीएससीओ के नियमों के मुताबिक जाइज़लीन का इस्तेमाल सिर्फ जानवरों के इलाज के लिए किया जा सकता है। अब अगर आपको इस हालत से जूझ रहा कोई शख्स दिखता है तो उसकी वीडियो बनाने की बजाय तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन को सूचना दें।

खुद से हैंडल करने की कोशिश ना करें। से जुड़ी जानकारी और जागरूकता बच्चों और युवाओं तक पहुंचाएं। मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लें और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सामने वाले की मदद करें। सबसे पहले चंडीगढ़ से सामने आए इसी वीडियो ने हड़कंप मचा दिया था और अब देश के कई राज्यों से ऐसा मंजर देखने को मिल रहा है। यह सिर्फ वीडियोस नहीं बल्कि एक बड़े खतरे की घंटी। खतरा है युवाओं का या की लत में डूबना।

यह समाज और यहां तक कि युवाओं के पेरेंट्स के लिए चेतावनी है कि अपने बच्चों से इस विषय पर खुलकर बात करें। उनकी मदद करें। याद रखिए यह कोई ट्रेंड नहीं बल्कि ऐसी लत है जो इंसान को अंदर से खत्म कर देती है और मौत के मुंह में धकेल सकती है।

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