अजित पवार प्लेन क्रै!श ये है सच AAIB की रिपोर्ट ने किया हैरान

आपको याद होगा आज से करीबन 2 महीने पहले महाराष्ट्र के बारामती में एक प्लेन हुआ जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था एक छोटा सा प्राइवेट जेट जो मुंबई से बारामती जा रहा था और कुछ ही मिनटों में जमीन से टकराकर आग के गोले में बदल गया। इस हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई थी। जब यह खबर सामने आई तो हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल था। आखिर यह हुआ कैसे? कुछ लोगों ने कहा कि यह पायलट की गलती थी।

कुछ का मानना था कि प्लेन में ही कोई खराबी थी, लेकिन उस वक्त किसी के पास भी अपनी बात साबित करने का कोई ठोस सबूत नहीं था। कैसे एक छोटा सा गलत फैसला इतने बड़े हादसे की वजह बना? और क्या यह हादसा टाला जा सकता था? मगर इस हादसे से जुड़ा असली सच अब सामने आ चुका है।

आज इस वीडियो में हम एएआईबी की प्रिलिमरी रिपोर्ट के बेसिस पर आपको 28 जनवरी 2026 को हुए अजीत पवार प्लेन क्रैश की पूरी कहानी शुरू से लेकर आखिरी तक समझाने वाले हैं। तो आइए शुरू करते हैं। 28 जनवरी 2026 की सुबह मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के कोने में खड़ा एक छोटा सा प्राइवेट जेट उड़ने के लिए तैयार किया जा रहा था।

यह कोई आम फ्लाइट नहीं थी बल्कि यह एक वीआईपी चार्टर फ्लाइट थी। इस फ्लाइट को ऑपरेट कर रही थी दिल्ली की प्राइवेट एिएशन कंपनी वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड। और जिस एयरक्राफ्ट को इस उड़ान के लिए चुना गया था वो था बॉम्बेयर लेयर जेट 45xr जिसका रजिस्ट्रेशन था वीटीएसएसk यह एयरक्राफ्ट 15 साल पुराना जरूर था लेकिन मेंटेनेंस रिकॉर्ड्स में भी किसी तरह की टेक्निकल खराबी का कोई संकेत नहीं था यानी कि ओवरऑल यह फिट था यानी कि तकनीकी तौर पर यह झट उड़ान के लिए पूरी तरह से तैयार था। इस फ्लाइट की प्लानिंग एक दिन पहले ही शुरू हो चुकी थी।

27 जनवरी की शाम को ऑपरेटर को जानकारी मिली कि अगले दिन सुबह महाराष्ट्र के डेपुटी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार को मुंबई से बारामती जाना है। तुरंत ही बारामती एरोड्रोम ऑपरेटर से लैंडिंग की परमिशन मांगी गई और थोड़ी ही देर में परमिशन मिल भी गई। लेकिन एक शर्त के साथ कि वहां सिर्फ वीएफआर यानी कि विजुअल फ्लाइट रूल्स के तहत ही फ्लाई किया जा सकता था। इसके बाद ऑपरेटर ने फ्लाइट प्लान फाइल किया। रूट तय हुआ मुंबई से बारामती का और सेफ्टी के लिहाज से अल्टरनेटिव एयरपोर्ट्स भी तय किए गए पुणे और मुंबई। यानी कि सब कुछ रूटीन प्रोसीजर के हिसाब से हो रहा था।

कॉकपेट में कमांड संभाल रहे थे कैप्टन सुमित कपूर। उम्र 61 साल और उनके पास करीबन 18,855 घंटों का टोटल फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। जिसमें से लगभग 2800 घंटे से ज्यादा उन्होंने इसी लेयर जेट टाइप के एयरक्राफ्ट उड़ाए थे। उनके साथ कोपायलट की सीट पर थी फर्स्ट ऑफिसर सांभवी पाठक जिनकी उम्र सिर्फ और सिर्फ 25 साल थी। उनके पास भी करीबन 2490 घंटों का फ्लाइंग एक्सपीरियंस था और इस एयरक्राफ्ट पर ही लगभग 2200 घंटे से ज्यादा उड़ान भर चुकी थी। 28 जनवरी की सुबह करीबन 5:30 बजे टेक्नशियंस अपनी ड्यूटी पर पहुंचे और एयरक्राफ्ट के डिपार्चर प्रिपरेशंस को शुरू किया गया।

एयरक्राफ्ट में पहले से लगभग 2900 पाउंड्स फ्यूल मौजूद था और सेफ्टी मार्जिन बनाए रखने के लिए उसमें करीबन 2100 पाउंड फ्यूल और भरा गया। यह क्वांटिटी इस छोटे से फ्लाइट के लिए जरूरत से भी ज्यादा थी। इसके बाद एयरक्राफ्ट का लोड और ट्रिम कैलकुलेशन किया गया। टेक ऑफ वेट लगभग 19,603 पाउंड्स निकला। यानी वेट बैलेंस के हिसाब से भी सब कुछ बिल्कुल सही था। और सुबह लगभग 7:09 पर दोनों पायलट्स एयरक्राफ्ट के पास पहुंचे और वॉक अराउंड इंस्पेक्शन शुरू किया गया। उन्होंने एयरक्राफ्ट के हर हिस्से को बहुत ही ध्यान से देखा ताकि कोई भी विजिबल डैमेज या टेक्निकल प्रॉब्लम हो तो उसे तुरंत पकड़ा जा सके।

लेकिन इंस्पेक्शन के दौरान सब कुछ नॉर्मल ही मिला। और करीबन 7:38 पर पहला पैसेंजर एयरक्राफ्ट पर आया और फिर 7:59 पर वो वीआईपी पैसेंजर भी एयरपोर्ट पहुंच गए जिनके लिए यह पूरी की पूरी फ्लाइट अरेंज की गई थी। यानी कि महाराष्ट्र के डिपुटी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार। थोड़ी ही देर में सभी पैसेंजर्स प्लेन में सवार हो चुके थे। और प्लेन धीरे-धीरे टैक्सी करते हुए रनवे की तरफ बढ़ने लगा। कुछ ही मिनटों के बाद टावर से टेक ऑफ क्लीयरेंस मिल गया।

8:09 पर लेयर Z45XR ने मुंबई के रनवे से उड़ान भर ली। एटीसी ने उन्हें क्लाइम क्लीयरेंस दिया और एयरक्राफ्ट को फ्लाइट लेवल यानी कि लगभग 19,000 फीट की ऊंचाई तक जाने की अनुमति दी गई। उस समय तक फ्लाइट पूरी तरह से रूटीन थी। कॉकपेट में किसी तरह की कोई इमरजेंसी नहीं थी।

इंज स्मूथली काम कर रहे थे। इंस्ट्रूमेंट्स नॉर्मल रीडिंग्स दिखा रहे थे और मौसम भी ऐसा नहीं था कि कोई खतरा महसूस हो। करीबन सवा5 बजे प्लेन ने पुणे एटीसी के साथ में कांटेक्ट किया और उस समय एयरक्राफ्ट अपने तय एल्टीट्यूड की ओर क्लाइम कर रहा था और थोड़ी देर बाद पायलट्स ने पुणे कंट्रोलर को बताया कि वह बारामती से लगभग 38 माइल्स दूर हैं। यह सुनते ही पुणे एटीसी ने एयरक्राफ्ट को आगे की डिसेंट क्लीयरेंस दे दी। उनसे कहा गया कि एयरक्राफ्ट को नीचे 6000 फीट तक उतारा जाए और जब बारामती टावर के साथ कांटेक्ट हो जाए तो इसकी जानकारी उन्हें भी दी जाए। अब एयरक्राफ्ट अपने डेस्टिनेशन के करीब धीरे-धीरे पहुंच रहा था। कॉकबिट में दोनों पायलट्स लैंडिंग प्रिपरेशन शुरू कर चुके थे।

कुछ ही देर में पायलट्स ने पुणे एटीसी को बताया कि वह बारामती टावर के साथ वीएचएफ रेडियो कांटेक्ट में आ चुके हैं। इसके बाद पुणे कंट्रोलर ने उन्हें ऑफिशियली बारामती टावर के हवाले कर दिया। यही वो मोमेंट था जहां से इस फ्लाइट का सबसे क्रिटिकल फेस शुरू होने वाला था। अब इस दौरान एयरक्राफ्ट धीरे-धीरे क्रूजिंग एटीट्यूड से नीचे उतरता है और रनवे की ओर अलाइन करता है।

एिएशन की दुनिया में ज्यादातर एक्सीडेंट्स इसी फेज में होते हैं क्योंकि इसी दौरान पायलट्स को कम समय में कई क्रिटिकल फैसले लेने पड़ते हैं। करीबन 8:19 पर प्लेन ने बारामती टावर से कांटेक्ट किया और पायलट ने रेडियो पर कहा बारामती टावर वी टीएसएसके टावर ने तुरंत जवाब दिया और दोनों के बीच कम्युनिकेशन शुरू हो गई।

उस समय एयरक्राफ्ट करीबन 10,000 फीट के एल्टीट्यूड से नीचे उतर रहा था। टावर ने उनसे उनकी डिस्टेंस पूछी। पायलट ने जवाब दिया, लगभग 30 माइल्स इनबाउंड। यानी एयरक्राफ्ट रनवे से लगभग 55 कि.मी. की दूरी पर था और धीरे-धीरे लैंडिंग के लिए अप्रोच कर रहा था। बारामती एयरफील्ड पर उस समय रनवे 11 एक्टिव था और हवा लगभग शांत थी। लेकिन इसके तुरंत बाद कॉकपेट से एक ऐसी रिक्वेस्ट आई जिसने एटीसी को भी थोड़ी देर के लिए चौंका दिया। पायलट ने कहा रनवे 29 रिक्वेस्ट कर रहे हैं।

बारामती का रनवे 11 और 29 दोनों डायरेक्शंस में इस्तेमाल किया जा सकता है। एटीसी ने कुछ सेकंड सोचा और फिर परमिशन दे दी। रजर रनवे 29 अप्रूव्ड। लेकिन कुछ ही मिनटों के बाद कॉकपेट से फिर रेडियो कॉल करके कहा गया रिक्वेस्टिंग रनवे 11 ओनली फॉर यूज़। मतलब पायलट्स ने अपना फैसला बदल दिया था। और अब वह फिर से वही रनवे इस्तेमाल करना चाहते थे जो एटीसी ने पहले उन्हें बताया था। यानी कि रनवे 11। टावर ने इस बार भी परमिशन दे दी। रजर रनवे 11 अप्रूव्ड। 8:31 पर कॉकपेट से एक और सवाल किया गया। रिक्वेस्टिंग करंट विजिबिलिटी। यह सवाल सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट था। क्योंकि बारामती एक ऐसा अनकंट्रोल्ड एयर फील्ड है जहां मॉडर्न नेविगेशन सिस्टम्स या इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग मौजूद नहीं है। ऐसे में यहां लैंडिंग पूरी तरह से विजुअल रेफरेंस पर डिपेंड करती है।

टावर ने कुछ सेकंड्स आसपास के विजिबिलिटी मार्कर्स को देखकर जवाब दिया अभी विजिबिलिटी 3 कि.मी. है। अब एिएशन के रूल्स के हिसाब से यह एक बड़ा वार्निंग सिग्नल था। क्योंकि डीजीसीए के नियमों के अनुसार किसी भी वीएफआर फ्लाइट को ऐसे अनकंट्रोल्ड एयर फीट पर लैंडिंग करने से पहले कम से कम 5 कि.मी. विजिबिलिटी चाहिए होती है। लेकिन उस सुबह बारामती के आसपास फोग मौजूद था। इसीलिए विजिबिलिटी 5 कि.मी. से लगभग आधी ही थी। अब यहां कॉकपेट में बैठे पायलट्स को एक अहम फैसला लेना था।

वो चाहते तो अप्रोच कैंसिल कर सकते थे और एयरक्राफ्ट को ऊपर चढ़ा सकते थे और अल्टरनेट एयरपोर्ट जैसे कि पुणे की ओर डायवर्ट कर सकते थे। लेकिन पायलट ने डायवर्ट करने के बजाय बारामती में ही लैंड करने का फैसला किया। प्लेन अब धीरे-धीरे बारामती रनवे की ओर उतर रहा था। कॉकपेट में बैठे दोनों पायलट्स पूरी तरह से फोकस थे। बाहर का मौसम साफ आसमान जैसा तो नहीं था लेकिन जमीन और आसपास का टेररन अभी भी हल्की-हल्की दिखाई दे रही थी। सुबह करीबन 8:34 पर कॉकपेट से टावर को कॉल किया।

फाइनल अप्रोच कोर्स वीटीएसएसके। इसका मतलब यह था कि एयरक्राफ्ट अब रनवे की सीध में आकर लैंडिंग की लास्ट स्टेज में एंटर कर चुका है। टावर ने तुरंत पूछा कंफर्म फील्ड इनसाइड। मतलब क्या पायलट्स को रनवे दिखाई दे रहा है? कॉकपेट से जवाब दिया गया टरेन विजुअल है रनवे दिखने पर कॉल करेंगे। यह जवाब अपने आप में बहुत कुछ बता रहा था। इसका मतलब था कि पायलट्स को जमीन का टेरेन तो दिखाई दे रहा है लेकिन रनवे अभी तक साफ नजर नहीं आया था। कॉकपेट में दोनों पायलट्स लगातार बाहर देखने की कोशिश कर रहे थे कि रनवे कब दिखाई देगा लेकिन वही हुआ जिसका डर था। करीबन 8:36 पर कॉकपेट से एक छोटा सा मैसेज आया। गोइंग अराउंड वीटीएसएसके विल जॉइन लेफ्ट बेस। गो अराउंड का मतलब होता है कि लैंडिंग अटेम्प्ट कैंसिल करके प्लेन वापस ऊपर उड़ा देना और एक चक्कर लगाकर दोबारा लैंडिंग की कोशिश करना। ऐसे में एयरक्राफ्ट ने रनवे के पास पहुंचकर अपनी डिसेंट रोक दी। कॉकपेट में बढ़ाया गया। नोज ऊपर उठाई गई और एयरक्राफ्ट रनवे के ऊपर से निकल कर दोबारा आसमान की तरफ बढ़ने लगा। अ प्लेन एक गोल चक्कर में वापस मुड़ रहा था ताकि कुछ मिनट बाद फिर से रनवे की ओर अप्रोच किया जा सके। दुनिया भर में हर दिन दर्जनों फ्लाइट्स किसी ना किसी वजह से गो अराउंड करती हैं और दूसरी कोशिश में सेफली लैंड कर लेती हैं। कोई दिक्कत की बात नहीं होती है।

लेकिन बारामती की इस सुबह में एक फर्क था क्योंकि रनवे के आसपास हल्का-हल्का फॉग मौजूद था। लगभग 8:40 पर कॉकपेट से टावर को फिर से कॉल आया। रिक्वेस्ट फाइनल अप्रोच कोर्स फॉर रनवे 11 वी टीएसएसके मतलब एयरक्राफ्ट अब दूसरी बार रनवे की ओर अलाइन होने जा रहा था। टावर ने तुरंत जवाब दिया रोज़ मैम अप्रूव्ड कॉल फाइनल फॉर रनवे 11। एयरक्राफ्ट की स्पीड अब धीरे-धीरे कम हो रही थी और कॉकपेट में दोनों पायलट्स इंस्ट्रूमेंट्स और बाहर के टेररेंट्स दोनों को ध्यान से देख रहे थे। कुछ ही मिनटों के बाद टावर ने फिर से कॉल किया विडीएसएसके चेक पोजीशन कॉपेट से जवाब आया फाइनल अप्रोच कोर्स विडीएसएसके यानी कि एयरक्राफ्ट अब दूसरी बार रनवे की फाइनल अप्रोच पर था। विजिबिलिटी अभी भी कम थी लेकिन एयरक्राफ्ट फिर भी धीरे-धीरे जमीन के करीब आता जा रहा था। कॉकपिट में दोनों पायलट बाहर फ़ोग के बीच से रनवे को देखने की कोशिश कर रहे थे। और फिर अचानक से 8:43 पर कॉकपिट से आवाज आई।

फील्ड इनसाइड बीटीएसएसके मतलब कि पायलट्स को बारामती एयर फील्ड दिखाई दे गया था। वीटीएसएसके हवा शांत है। रनवे 11 क्लियर टू लैंड। आगे बढ़ने से पहले एक छोटी सी रिक्वेस्ट है। अगर आपको यह कहानी इंटरेस्टिंग लगी हो तो वीडियो को लाइक कर दीजिएगा और चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लीजिएगा ताकि ऐसी ही और सच्ची और हैरान कर देने वाली कहानियां आप तक हम पहुंचाते रहें। कॉकपिट में दोनों पायलट्स पूरी तरह से कंसंट्रेट किए हुए थे और एयरक्राफ्ट रनवे से कुछ ही सेकंड्स की दूरी पर था। इस मूवमेंट में हर चीज बहुत तेजी से होती है। एटीट्यूड तेजी से कम होता है। स्पीड बहुत संभल के कंट्रोल करनी होती है और पायलट्स को एकदम सटीक अलाइनमेंट बनाए रखना पड़ता है।

आसपास के टेरेन और हल्के फॉग के बीच रनवे अभी भी ना के बराबर ही दिखाई दे रहा था। और जैसे ही पायलट्स को रनवे थोड़ा ठीक-ठाक से दिखाई दिया, तभी कॉकपेट वॉइस रिकॉर्डर में अचानक एक घबराई हुई आवाज रिकॉर्ड हुई। ओह ओ ओह शिट ओह शिट ओह शिट। क्योंकि पायलट्स को उसी पल अचानक से यह एहसास हुआ कि एयरक्राफ्ट की पोजीशन ठीक नहीं है। असल में प्लेन रनवे की सेंटर लाइन से थोड़ा हटा हुआ था और साथ ही उसका ग्लाइड पाथ भी अलग था। अब उनके पास रिएक्ट करने के लिए सिर्फ कुछ ही सेकंड्स बचे थे।

उन्होंने एयरक्राफ्ट को हल्का सा दाई तरफ झुकाया और यह मैनुअल प्लेन को फिर से रनवे की दिशा में लाने की कोशिश थी। लेकिन ऐसे में कुछ ही पलों के बाद प्लेन रनवे तक पहुंचने से पहले ही रनवे के बाई हिस्से की तरफ ड्रिफ्ट करने लगा। अगले ही पल 8:46 पर प्लेन बहुत तेज रफ्तार में नीचे की तरफ जमीन से टकरा गया और इंपैक्ट बेहद खतरनाक था। नीचे टकराते ही एयरक्राफ्ट कई हिस्सों में टूट गया और फ्यूल के आग पकड़ने के कारण एक बड़ा आग का गोला बन गया। प्लेन अब पूरी तरह से आग की लपटों में घिर चुका था। जैसे ही प्लेन जमीन से टकराया, आसपास का पूरा इलाका तेज धमाकों की आवाज से गूंज उठा। साइट रनवे 11 के पास ही थी। लेकिन जमीन का लेवल रनवे से थोड़ा नीचे था। और एयरक्राफ्ट रनवे के एज से करीबन 50 मीटर दूर बाई तरफ गिरा था।

जब लोग मौके पर पहुंचे तो सामने का नजारा बेहद खौफनाक था। ऊपर से बारामती एयरफील्ड पर कोई ऐसी इमरजेंसी टीम मौजूद नहीं थी जो तुरंत आग से निपट सके। इस वजह से वहां बारामती म्यनिसिपल कॉरपोरेशन की फायर सर्विसेज और एंबुलेंस को बुलाना पड़ा। लेकिन जब तक फायर फाइटिंग व्हीकल्स मौके पर पहुंचे तब तक एयरक्राफ्ट का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो चुका था। रेस्क्यू टीम ने सबसे पहले आग बुझाने की कोशिश शुरू की ताकि रैकेज के पास पहुंचा जा सके। लेकिन इंपैक्ट और आग दोनों इतने भयानक थे कि एयरक्राफ्ट में मौजूद किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका। दोनों पायलट्स, केबिन अटेंडेंट, डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार और उनके सिक्योरिटी ऑफिसर समेत सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। क्रैश साइट को तुरंत सिक्योर कर दिया गया और कुछ ही घंटों के भीतर इन्वेस्टिगेशन एजेंसीज भी वहां पहुंच गई। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो यानी कि एएआईबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर एविडेंस कलेक्ट करना शुरू किया। जैसे ही मलबे से फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर और कॉकपेट वॉइस रिकॉर्डर बरामद किए गए तुरंत ही इन्वेस्टिगेशन की अगली प्रोसेस शुरू कर दी गई। इन्वेस्टिगेटर्स ने क्रैश साइट, फ्लाइट डाटा और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड्स का एनालिसिस शुरू किया जिससे धीरे-धीरे इस हादसे की असली तस्वीर सामने आने लगी। सबसे पहला और सबसे अहम फैक्टर था खराब विजिबिलिटी। बारामती टावर ने पायलट्स को बताया था कि उस समय विजिबिलिटी लगभग 3 कि.मी. थी। यानी कि जिस समय प्लेन लैंडिंग अटेम्प्ट कर रहा था, उस समय मौसम लैंडिंग के लिए एक्सेप्टेबल नहीं था। इसके बावजूद पायलट्स ने अप्रोच जारी रखी और उनका यह फैसला डिजास्टर साबित हुआ। दूसरा बड़ा फैक्टर था बारामती एयरपोर्ट पर इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी का ना होना। जैसे कि मैंने आपको बताया यह एक अनकंट्रोल्ड एयर फील्ड है जहां एडवांस नेविगेशन एड्स मौजूद नहीं है। यहां इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम यानी कि आईएलएस या मॉडर्न अप्रोच गाइडेंस सिस्टम उपलब्ध नहीं है। पायलट्स को लैंडिंग पूरी तरह से विजुअल रेफरेंस के आधार पर करनी पड़ती है। इसके अलावा इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि रनवे मार्किंग काफी हद तक धुंधली हो चुकी थी। इतना ही नहीं रनवे 11 की दिशा में विंड शॉक भी मौजूद नहीं था जो कपड़े का एक लंबा सा कोन होता है और हवा की दिशा व ताकत दिखाता है। तीसरा महत्वपूर्ण फैक्टर था टेरेन इल्ल्यूजन।

रनवे 11 का शुरुआती हिस्सा एक टेबल टॉप स्ट्रक्चर पर बना हुआ है। यानी कि रनवे का लेवल आसपास की जमीन से ऊंचा है। ऐसी जगहों पर एक ऑप्टिकल इल्ल्युजन पैदा होता है जिसमें पायलट्स को लगता है कि एयरक्राफ्ट सही ग्लाइड पाथ पर है। फाइनल अप्रोच के दौरान पायलट्स को रनवे बहुत देर से दिखाई दिया था और उस समय एयरक्राफ्ट जमीन के इतना करीब आ चुका था कि कुछ भी एक्शन लेने का समय नहीं था। इसके अलावा एएआईबी की प्रीिलिमिनरी रिपोर्ट में किसी भी मैकेनिकल फेलोर या एयरक्राफ्ट माल फंक्शन का कोई सबूत नहीं मिला। एयरक्राफ्ट पूरी तरह से उड़ने के लायक था और पायलट्स भी मेडिकलली फिट थे। इसका मतलब साफ था यह हादसा किसी टेक्निकल खराबी की वजह से नहीं हुआ था।

असल वजह थी कम विजिबिलिटी में लैंडिंग अटेम्प्ट करने का फैसला और एयरपोर्ट पर मॉडर्न अप्रोच गाइडेंस सिस्टम का ना होना। इसीलिए एएआईबी ने डीजीसीए को सलाह दी ऐसे एयरपोर्ट्स पर बेसिक इक्विपमेंट्स, बेहतर रनवे मार्किंग्स और सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर्स उपलब्ध कराए जाएं।

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