प्रपोज करते ही कहा- ‘मैं CM बनूँगा!”” आखिर कौन है हिमंत बिस्वा सरमा ?

असम में हो, हिंद, बिहार में हो, लखनऊ में है, सारा हिंदू एक है। गर्व से बोलो हम हिंदू हैं। हेमंत विश्वा शर्मा भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम जिन्हें पूर्वोत्तर भारत का सबसे ताकतवर नेता और चाणक्य माना जाता है। वो वर्तमान में असम के 15वें मुख्यमंत्री हैं। यहां उनके जीवन और करियर से जुड़ी पूरी जानकारी हम इस वीडियो में देने वाले हैं। हेमंत विश्वा शर्मा असम के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हैं। वह एनईडीए के संयोजक भी हैं।

जिसका काम पूरे पूर्वोत्तर में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को मजबूत करना है। हेमंत का जन्म 1 फरवरी 1969 को जोरहाट असम में ही हुआ। वह असमिया ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनके पिता का नाम कैलाशनाथ शर्मा और माता का नाम मृणालिनी देवी है। उनका राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने अपनी शुरुआत आसू यानी ऑल आसाम स्टूडेंट यूनियन से की थी। वह लंबे वक्त तक कांग्रेस में रहे और तरुण गोगोई सरकार में प्रभावशाली मंत्री भी थे।

2015 में राहुल गांधी के साथ मतभेदों के चलते उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। 2016 में असम में पहली बार बीजेपी सरकार बनवाने में उनकी मुख्य भूमिका भी रही। इसके बाद उन्होंने मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड जैसे राज्यों में भी बीजेपी को सत्ता तक पहुंचाया। 2021 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत के बाद पार्टी ने सर्वानंद सोनवाल की जगह हेमंत विश्वा शर्मा को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया।

10 मई 2021 उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके काम करने के आक्रामक तरीके और जनता के बीच उनकी पकड़ ने उन्हें इस पद का सबसे प्रबल दावेदार बना दिया। वहीं बात करें उनके निजी जीवन की तो उनकी पत्नी का नाम रिनकी भैया शर्मा है। वह एक सफल बिजनेस वूमेन और मीडिया टकून भी हैं। इनके दो बच्चे हैं। बेटे का नाम नंदिल बिश्वा शर्मा और बेटी का नाम सुकन्या शर्मा है। वहीं हेमंत बिसवा और उनकी पत्नी की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं।

इसमें कॉलेज का रोमांस भी है। एक तरफ़ा हिम्मत और एक ऐसा वादा जिसे उन्होंने सालों बाद सच कर दिखाया। यह कहानी तब शुरू हुई जब हेमंत विश्वा गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज में छात्र थे। उनकी मुलाकात रेकी भया से हुई। हेमंत उस वक्त छात्र राजनीति में बेहद सक्रिय थे और अपनी तेजतर्रार छवि के लिए जाने जाते। जबकि रेणिकी एक शांत और शालीन व्यक्तित्व वाली छात्रा थी। कहते हैं जब हेमंत ने रेणिक को प्रपोज किया या उनके करीब आए तो रिनकी ने एक साधारण सा सवाल पूछा कि भविष्य में क्या बनेंगे या उनकी मां को उनके बारे में क्या बताऊं?

इस पर हेमंत ने बहुत ही आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। अपनी मां से जाकर कह दो कि मैं एक दिन असम का मुख्यमंत्री बनूंगा। उस समय यह बात एक मजाक या कोरा सपना लग सकती थी क्योंकि हेमंत सिर्फ एक छात्र नेता थे। लेकिन रेनिकी उनकी इस हिम्मत और स्पष्ट विज़न से बहुत प्रभावित हुई। वहीं बात करें उनकी एजुकेशन की तो हेमंत गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी और एलएलएम की पढ़ाई कर चुके हैं।

वह एक लेखक भी रहे हैं और उन्होंने असमिया भाषा में कई किताबें लिखी हैं। वह बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं और क्रिकेट प्रशासन में भी सक्रिय रहे हैं। अपने तेजतर्रार बयानों और हिंदुत्व के प्रति अपनी मुखर छवि के लिए वह अक्सर चर्चा में बने रहते हैं।

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