उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक रिटायर्ड अफसर के पास से ₹100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति का पता चला है। यह रकम इतनी ज्यादा है कि अगर ईमानदारी से नौकरी कर रहे होते वो जनाब तो शायद पूरी नौकरी में भी इतना पैसा नहीं जोड़ पाते। इसलिए उन जनाब ने करप्शन का रास्ता चुना और इतना पैसा जमा कर लिया।
अब जांच करने वाली टीम भी यह सब कुछ देखकर हैरान है। जिस रिटायर्ड अफसर के पास से ₹100 करोड़ की संपत्ति मिली है, उनका नाम है केशव लाल और वो कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में एडिशनल कमिश्नर थे। मूल रूप से चंदौली जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। फिलहाल नोएडा के सेक्टर 34 में रहते हैं। लेकिन उनके पास मिली जो रकम मिली है 100 करोड़ की इसका खुलासा आखिर हुआ कैसे? इसके लिए 9 साल पीछे की कहानी आपको समझनी होगी। 19 अप्रैल 2017 को केशव लाल कानपुर में पोस्टेड थे उस वक्त। उसी दौरान उनके घर पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने छापा मारा। तलाशी के दौरान अधिकारियों को कथित तौर पर करीब ₹1 करोड़ नगद और ₹3 करोड़ के गहने मिले थे। रेड के दौरान गद्दे अलमारी से लेकर बाथरूम के फ्लश तक में नोटों की गड्डियां मिली थी।
जो पूजा रूम होता है वहां से लेकर बेडरूम तक में नोटों की खूब गड्डियां वहां पर मिली थी। केशव लाल के घर छापेमारी के दौरान 500 और ₹2000 के नोटों की गड्डियां भी मिली थी। माना यह जा रहा था कि यह जो है नई करेंसी थी और नोटबंदी उससे पहले हुई थी तो उसके बाद पुराने नोट बदलवाकर नई करेंसी में तब्दील करे गए थे। अलमारी के भीतर कपड़ों के बीच शर्ट की जेब में भी बहुत से नोट ऐसे मिले थे। इतना ही नहीं बेडरूम में तीन ऐसे कार्टन भी मिले जिसमें नोट भरे हुए थे। उस समय जब उनसे इन पैसों को लेकर पूछताछ की गई तो केशव लाल इस पैसे का कोई सही-सही जवाब दे नहीं पाए थे।
इसके बाद उनके खिलाफ जांच बैठी और उन्हें अनिवार्य रूप से रिटायर्ड यानी कंपलसरी रिटायरमेंट दे दिया गया और डिटेल जांच के लिए मामला विजिलेंस डिपार्टमेंट को सौंप दिया गया। फिर जांच हुई तो यह पता चला कि रिटायर्ड एडिशनल कमिश्नर साहब की जो संपत्ति है वो उनकी जो नोन सोर्सेस ऑफ इनकम यानी ज्ञात सोर्सेस से जो इनकम होती है उससे बहुत ज्यादा थी। यानी आय से बहुत अधिक संपत्ति करीब 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति निकली थी। जांच में यह पता चला कि केशव लाल के पास पांच शहरों में कई संपत्तियां हैं। जिनमें लखनऊ में दो, प्रयागराज, कानपुर, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक प्रॉपर्टी भी शामिल है। यह सब कुछ मिलाकर जो है वो ₹100 करोड़ के आसपास इसकी कीमत बताई गई। जांच के बाद विजिलेंस टीम ने अपनी रिपोर्ट बनाई और सरकार को सौंप दी। जिस पर अब जाकर फॉर्मल एक्शन शुरू हुआ है। पिछले साल जुलाई के महीने में योगी सरकार ने आदेश दिया था कि एडिशनल कमिश्नर ग्रेड टू केशव लाल को अब पेंशन भी नहीं मिलेगी। यह आदेश डिटेल जांच रिपोर्ट के बाद जारी किया गया था जिसमें पेंशन की 100% कटौती का आदेश था। तो इस तरह मामला खुला।
सरकारी जांच बैठी और एक्शन हुआ। लेकिन इन सबके बीच में सवाल अब भी वही है कि भ्रष्टाचार, घूसखोरी खत्म करने की तमाम बातों के बीच भी किसी अफसर के पास बेहिसब दौलत मिल कैसे जा रही है? चूक कहां हो रही है? क्या यह सरकारी तंत्र की कमजोरी है या सामाजिक तौर पर आम लोगों की भी कहीं ना कहीं इसमें जिम्मेदारी है?
