होर्मुज के बाद अब ये रास्ता भी बंद करेगा ईरान ?

स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस के बाद क्या ईरान एक और समुद्री रास्ता बंद करने वाला है ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ईरान से एक चेतावनी आई है जिसने पूरी दुनिया को एक बार फिर अलर्ट कर दिया है। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामनई के करीबी माने जाने वाले अली अकबर विलायती ने कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो बाबिल मंदेव स्ट्रेट भी बंद किया जा सकता है। यह भी हॉर्मोस की तरह एक जरूरी समुद्री रास्ता है जो रेड सी को गल्फ ऑफ एडन से जोड़ता है और ग्लोबल ऑयल ट्रेड के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

यह रास्ता और भी जरूरी इसलिए है क्योंकि अभी इस वक्त हॉर्नूस बंद है। अलजजीरा के मुताबिक अली अकबर विलायती ने 5 अप्रैल को कहा कि रेजिस्टेंस फ्रंट की संयुक्त कमान बाबिल मंदीप के साथ भी वही कर सकती है जो हॉर्मोस के साथ हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर वाइट हाउस फिर वही गलती दोहराने की हिम्मत करता है तो उसे जल्द समझ आ जाएगा कि एक ही कदम से दुनिया की एनर्जी सप्लाई और व्यापार को दिक्कत में डाला जा सकता है। बाद में ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी ने भी इस चेतावनी यानी कि इस बयान को कंफर्म किया।अगर यह रास्ता बंद हुआ तो जहाजों को अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाना पड़ेगा।

मतलब 10 से 14 दिन की देरी होगी और इस देरी का मतलब है महंगाई, सप्लाई क्राइसिस और बाजार में उतार-चढ़ाव। अब सवाल उठता है कि अचानक यह खतरा क्यों खड़ा हो गया? या फिर बाबिल मंदेव को बंद करने की बात कैसे आ गई? तो हुआ यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने स्टेट ऑफ हॉरर्मूस नहीं खोला तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला कर सकता है। इस वक्त साहब हॉरर्मूस पर जितनी बात हो चुकी है तो मेरा मानना है कि आप तो यह जानते ही होंगे कि हॉर्मूस वही रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान का कहना है कि हम अपने नियमों के हिसाब से जहाजों को आने देंगे। लेकिन अमेरिका और इजराइल के लिए रास्ता बंद रहेगा.

और इसी बीच विलायती का बयान आया है कि बाबिल मंदे को भी हॉर्मूस की तरह बंद किया जा सकता है। यहां एक और अहम किरदार है यमन के हूती विद्रोही। यह ईरान के करीबी माने जाते हैं और बाबिल मदेव के आसपास इनकी काफी पकड़ है। यह पहले भी ऐसा कर चुके हैं। गजा जंग के वक्त उन्होंने बाबिल मंदीब रास्ते को उन जहाजों के लिए बंद कर दिया था जिन्हें वे इजराइल या अमेरिका से जुड़ा हुआ मानते थे। तब होती लड़ाकों ने कई जहाजों पर हमले किए थे। नतीजा यह हुआ कि कई शिपिंग कंपनियों ने इस रास्ते से जहाज भेजना ही बंद कर दिया था।

फिर मई 2025 में अमेरिका और हूतियों के बीच सीज फायर हुआ जिसके बाद बाबिल मंदे को फिर से खोला गया। हाल के दिनों में साफ दिख गया है कि हूती फिर से शिपिंग में रुकावट डाल सकते हैं। जैसा उन्होंने गजा वॉर के टाइम पर किया था। मार्च के आखिर से वो इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन अटैक कर रहे हैं। मतलब कि अब वो इस जंग में ऑफिशियली एंट्री ले चुके हैं।

लेकिन उनके टारगेट्स अभी भी यूएस कम है ले और इजराइल ज्यादा है। नबील खौरी जो पूर्व अमेरिकी डिप्लोमेट हैं उन्होंने अलजजीरा को बताया है कि हूती अभी इस में बस हल्काफुल्का ही एंट्री ले रहे हैं। फुल वॉर मोड में नहीं आए हैं। असली गेम तब शुरू होगा जब हुती सच में में कूदेंगे। उनका सबसे बड़ा है बाबिल मंदीप को ब्लॉक करना। अगर हुती सच में इस जंग में कूदना चाहे तो उसे कुछ बड़ा करने की जरूरत नहीं है। बस दो-चार जहाजों पर हमला काफी होगा। बाकी जहाज खुद ही रास्ते से हट जाएंगे। अब जरा पूरी तस्वीर समझिए।

अगर हॉर्मूज और बाबिल मंदे दोनों ही रास्ते बंद हो जाते हैं एक साथ तो दुनिया की करीब 25% तेल सप्लाई रुक सकती है और बात सिर्फ तेल की ही नहीं है। दुनिया का करीब 10% व्यापार भी बाबिल मंदेव के रास्ते से ही होता है। इसमें चीन, भारत और दूसरे एशियाई देशों से यूरोप भेजे जाने वाले कंटेनर भी शामिल है। फिर फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन घटेगी, ट्रांसपोर्ट महंगा होगा और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। यूरोप की सप्लाई लाइन तो लगभग ठप पड़ सकती है। सऊदी अरब पहले अपना ज्यादातर तेल हॉर्मोस के रास्ते भेजता था। लेकिन अब सीन थोड़ा बदल गया है। अब वो बाबिल मंदीप रूट के तहत रेड सी वाले यानबू पोर्ट से तेल बाहर भेज रहा है।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के गिल्टन कॉलेज में प्रेसिडेंट और मिडिल ईस्ट की जानकार एलिजाबेथ कैंडल ने इसे नाइट मेयर सिनेरियो कहा है। यानी ऐसा हालात जिससे निकलना आसान नहीं होगा। हालांकि एक बात और हैती विद्रोही शायद इतना बड़ा कदम उठाने से बचें क्योंकि इससे सऊदी अरब और अमेरिका के डायरेक्ट मिलिट्री ऑपरेशन का खतरा बढ़ जाएगा। तो

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