महायु!द्ध के बीच भारत के लिए खुशखबरी!

वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट के बीच भारत के लिए एक अहम डेवलपमेंट सामने आया है। इंडिया फ्लैग्ड एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा ने कड़ी निगरानी के बीच स्ट्रेट ऑफ हर्मूस को सेफली पार कर लिया है। यह जहाज तकरीबन 20,000 टन एलपीजी लेकर जा रहा था और कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने के बाद यह ऐसा करने वाला नौवां भारतीय वेसल बन गया है। इस ट्रांजिट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि भारत की फ्यूल सप्लाई किस हद तक इस चोक पॉइंट पर डिपेंड करती है। भारत का नौवां वेसल अब स्ट्रेट ऑफ हर्मोस से सेफली पार हो चुका है।

ये भारत की डिप्लोमेटिकली स्ट्रांग स्टांस भी दिखाता है। एमओएल इंडिया द्वारा ऑपरेट किया जाने वाला ग्रीन आशा एक मिड साइज्ड एलपीजी कैरियर है जिसने हर्मोस स्टेट को ईरानियन ओवरसाइट के तहत क्रॉस किया। यह ट्रांजिट ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में टेंशन काफी ज्यादा है और ईरान सिलेक्टिव पैसेज पॉलिसी अपना रहा है। जहाज की मूवमेंट को क्लोजली ट्रैक किया जा रहा है जो लराक कशम और हॉर्मोस आइलैंड्स के बीच से गुजरते हुए इस स्ट्रेटेजिक रूट में दाखिल हुआ। यह कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने के बाद नौवां इंडियन एनर्जी वेसल है जिसने इस रूट को पार किया।

इससे पहले ग्रीन सैंडवी और BW टायर जैसे टैंकर्स भी इसी रास्ते से गुजर चुके हैं। इन लगातार ट्रांजिट से यह संकेत मिलता है कि भारत अपनी एनर्जी सप्लाई चेन को मेंटेन रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। भले ही जिओपॉलिटिकल रिस्क कितना भी बड़ा क्यों ना हो। स्टेट ऑफ फर्मस भारत की एनर्जी सिक्योरिटी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत के तकरीबन 40% क्रूड ऑयल इंपोर्ट्स, 50% से ज्यादा एलएमजी सप्लाई और लगभग 90% एलपीजी इंपोर्ट्स इसी रूट से आते हैं। जिनका बड़ा हिस्सा वेस्ट एशिया से जुड़ा हुआ है। भारत हर साल 33 मिलियन टन से ज्यादा एलपीजी कंज्यूम करता है।

जिसमें लगभग 60% डिमांड एक्सपोर्ट्स के जरिए पूरी होती है। ऐसे में इस रूट का खुला रहना देश की फ्यूल अवेलेबिलिटी के लिए बेहद जरूरी है। इसी खतरे को देखते हुए इंडियन नेवी ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा शुरू किया है। जिसके तहत एलएनजी, एलपीजी और क्रूड ऑयल लेकर आने वाले जहाजों को एस्कॉट किया जा रहा है। यह मिशन वोलेटाइल वॉटर्स में इंडियन शिपिंग को सुरक्षा देने के लिए क्रूशियल माना जा रहा है। कुल मिलाकर ग्रीन आशा का सुरक्षित ट्रांजिट एक राहत भरी खुश खबर है। लेकिन यह भी साफ होता है कि हरमोस पर किसी भी तरह का डिस्टरप्शन भारत के लिए एनर्जी क्राइसिस खड़ा कर सकता है। तो इस वक्त की बड़ी खबर कि हरमूस पार कर चुका है भारत का ग्रीन आशा टैंकर। हर संकट के बीच भारत के लिए यह बड़ी राहत की खबर है।

यह जहाज तकरीबन 20,000 टन एलपीजी लेकर आ रहा है। वेस्ट एशिया कॉन्फ्लिक्ट के बीच भारत के लिए एक अहम डेवलपमेंट सामने आया है। इंडिया फ्लैग्ड एलपीजी टैंकर ग्रीन आशा ने कड़ी निगरानी के बीच स्ट्रेट ऑफ हरमूस को सेफली पार कर लिया है।

यह जहाज तकरीबन 20,000 टन एलपीजी लेकर जा रहा था और कॉन्फ्लिक्ट शुरू होने के बाद यह ऐसा करने वाला नौवां भारतीय वेसल बन गया है। इस ट्रांजिट ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि भारत की फ्यूल सप्लाई किस हद तक इस चोक पॉइंट पर डिपेंड करती है। भारत का नौवां वेसल अब स्ट्रेट ऑफ हर्मोस से सेफली पार हो चुका है। यह भारत की डिप्लोमेटिकली स्ट्रांग स्टांस भी दिखाता है।

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