राघव चड्ढा और अरविंद केजरीवाल में कैसे आई दूरी?

यह बात 2019 के लोकसभा चुनाव के समय की है। आम आदमी पार्टी ने उस समय 31 साल के युवा नेता को टिकट दिया। नाम था राघव चड्ढा। साउथ दिल्ली की सीट से उन्हें लोकसभा का टिकट मिला। भाजपा के रमेश बिदुड़ी ने लेकिन राघव चड्ढा को बड़े- अंतर से हरा दिया करीब-करीब 3.5 लाख वोट से। यानी भाजपा को आसान जीत मिली। राघव चड्ढा को इस चुनाव में मिली हार।

लेकिन इसके बाद भी राघव चड्ढा पर से पार्टी का भरोसा जो है वो डिगा नहीं। 2020 के दिल्ली विधानसभा के चुनाव आए। उनको एक बार फिर टिकट दिया गया। इस बार विधायकी का टिकट मिला राजेंद्र नगर की विधानसभा सीट से और इस बार राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के भरोसे पर खरे भी वह उतरे और जीते दिल्ली विधानसभा भी पहुंचे। साथ में उन्हें एक बड़ा महत्वपूर्ण पद भी मिला। दिल्ली जल बोर्ड के वाइस चेयरमैन का पद। यह राघव चड्ढा के अब आम आदमी पार्टी में उदय का समय आ चुका था। धीरे-धीरे वो अरविंद केजरीवाल के ब्लू वाइड बॉय बने। चाहे आम आदमी पार्टी के पुराने नेता रहे हो या फिर दिल्ली में राजनीति को कवर करने वाले तमाम पत्रकार।

सबका यह कहना था कि धीरे-धीरे राघव चड्ढा की अरविंद केजरीवाल तक पहुंच जो है वह लगातार बढ़ती जा रही थी। 2022 का साल आया और इस साल पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव। पंजाब चुनाव के हर मंच में अरविंद केजरीवाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राघव चड्ढा खड़े रहते थे। चाहे कोई बड़ा मंच हो, चुनावी रैली हो या खुली हुई जिप्सियां हो। जहां अरविंद केजरीवाल वहां राघव चड्ढा। इस आक्रामक चुनाव प्रचार का असर था कि पंजाब के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को मिली जीत। पार्टी को जीत मिली तो राघव चड्ढा को इसका इनाम भी मिला। 2022 में उन्हें राज्यसभा भेज दिया गया।

आम आदमी पार्टी के कोटे से वह राज्यसभा के सांसद बन गए। 2024 के लोकसभा चुनाव आए। इंडिया अलायंस बना। अलायंस में सीट नेगोशिएशन से लेकर तमाम बातें या आम आदमी पार्टी का जो भी पक्ष इंडिया अलायंस में रखना था। इन सारे कामों में राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की तरफ से आगे रहते थे। नुमाइंदगी करते थे। राघव चड्ढा की केजरीवाल तक डायरेक्ट पहुंच भी ऐसा दिल्ली में आम आदमी पार्टी को राजनीति को कवर करने वाले तमाम पत्रकार लिखते हैं, बताते हैं। यह भी बताया जाता है कि केजरीवाल से मिलने के लिए कुछ ही लोग थे। चुनिंदा नेता थे उनकी पार्टी के भी जिनको किसी अपॉइंटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती थी और इनमें से राघव चड्ढा एक थे। लेकिन फिर खुला कथित लिखकर पॉलिसी वाला केस और यह फाइल जब खुली तो तमाम बड़े नेता आम आदमी पार्टी के एक के बाद एक, एक के बाद एक उनके नाम आते चले गए। इस केस में और कुछ अन्य केसेस में भी सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और फिर आखिरकार अरविंद केजरीवाल भी इसके लपेटे में आए। बड़े-बड़े आम आदमी पार्टी के नेता जेल गए। जब अरविंद केजरीवाल इस मामले में जेल में थे तो तीन लोग थे जिनको उनसे मिलने की परमिशन थी।

संदीप पाठक, केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और तीसरा नाम राघव चट्ठा का था। यानी इस समय तक भी इक्वेशन करीब-करीब ठीक-ठाक थी। तो मामला गड़बड़ होना कहां से शुरू हुआ? गड़बड़ मामला होना शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और राघव चड्ठा आंख का ऑपरेशन कराने के लिए लंदन गए। संजय सिंह भी इस समय तक अरेस्ट हो चुके थे। यानी पार्टी का पूरा जो टॉप लीडरशिप थी वो जेल में थी और अब पूरा दारोमदार बी लाइन के लीडर्स पर था और ऐसे समय में राघव चड्ढा आंख का ऑपरेशन कराने के लिए लंदन गए थे। इस पर तमाम सवाल उठे। आम आदमी पार्टी के अंदर से भी बाहर से भी विपक्षियों ने कहा कि आपका जो आपके आपने जिनको सांसदी का चुनाव लड़वाया विधायक बने फिर आपने राज्यसभा भेजा वो बड़े नेता राघव चड्ढा जो पार्टी का फेस भी रहे मीडिया में लंबे समय वो इस समय लंदन में हैं। हालांकि दूसरी तरफ राघव चड्ढा और उनके करीबियों ने लगातार यह कहा। अभी भी जब उनके समीकरण पार्टी के अंदर गड़बड़ा गए उसके बाद भी यह कहा कि हमने पार्टी को समय रहते बताया था कि राघव चड्ढा ने यह बताया था कि मुझे आग का ऑपरेशन कराना है लंदन जाना है।

पार्टी की तरफ से परमिशन मिली उसके बाद ही वो लंदन गए। लेकिन अब तक यह तय हो चुका था कि राघव चड्ढा एक तरफ लंदन में है और वहां पर उन्होंने जो उनका स्टे था वो काफी एक्सटेंड भी हुआ। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी बहुत बड़े संकट में थी और इस वजह से एक दरार बीच में आनी शुरू हो चुकी थी।

केजरीवाल जब जेल से बाहर आए तो राघव चड्डा ने एक फोटो डाली साथ में डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। लेकिन उस तरह मुखर होकर केजरीवाल के साथ किसी मंच पर या आक्रामक तरीके से जो आम आदमी पार्टी ने उस समय अपनी पोजीशनिंग की उसमें राघव चड्ढा शामिल नहीं रहते थे। कुछ पत्रकार हैं वो यह भी अलग-अलग आर्टिकल्स में लिखते हैं कि राघव चड्डा ने फोटो तो अरविन्द केजरीवाल के साथ में अपलोड कर दी। लेकिन सत्यमेव जयते तक नहीं लिखा। इसके बाद भी राघव चड्ढा को जब दिल्ली में अभी जो लास्ट इलेक्शन हुए उसमें भी उन्हें एक भूमिका दी गई लेकिन पार्टी यह चुनाव हार गई। इसके बाद पंजाब में राघव चड्ढा की जगह मनीष सिसोदिया को प्रभारी बना दिया गया। गोवा, गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी जिम्मेदारियां अलग-अलग नेताओं में बांट दी गई। लेकिन इन नेताओं में इस लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम नहीं था। राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के जो इक्वेशंस थे, जो समीकरण थे या उनके अरविंद केजरीवाल से जो समीकरण थे, उसको सबसे बड़ा डेंट लगा सीसी ज्ञानेश कुमार वाले मामले में जब तृणमूल कांग्रेस सदन में इंपीचमेंट मोशन लेकर आई। राघव चड्ढा के इस मोशन पर साइन नहीं थे। जबकि सारे विपक्ष के तमाम बड़े-बड़े नेताओं के साइन इस मोशन पर थे। इस पर अलग-अलग व्याख्याएं की गई। यह कहा गया कि राघव चड्ढा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आए इस इंपीचमेंट मोशन पर साइन ना करके एक संकेत दे रहे हैं कि वह पार्टी लाइन से अलग हैं। दूसरी तरफ राघव चड्ढा का भी अपना पक्ष रहा। उन्होंने कहा कि मैंने साइन नहीं किया था लेकिन मैंने यह कहा कि मैं अपनी पार्टी से डिस्कस करूंगा। उसके बाद तय करूंगा कि मुझे दस्तखत करने हैं कि नहीं करने हैं। लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनकी पार्टी के आलाकमान से बात नहीं हो सकी और जितनी रही सही कसर थी वो यहां से पूरी हो गई। अरविंद केजरीवाल के साथ उनके समीकरण, आम आदमी पार्टी के साथ उनके समीकरण यहां से गड़बड़ होने शुरू हो ही चुके थे पहले ही और यहां से पूरी तरह वो ढलान पर चले गए। यह बात ठीक है कि हर सांसद का चाहे वो लोकसभा सांसद हो, राज्यसभा सांसद हो, सबका अपना एक विवेक होता है। उन्हें सदन में क्या बात रखनी है, क्या नहीं रखनी है, उन्हें सदन में समोसे या भुजिया की बात रखनी है या कोई और बात रखनी है, उनका अपना एक आकलन होता है कि उन्हें कौन सा मुद्दा सदन में उठाना है।

लेकिन लोकतंत्र में पार्टी लाइन भी एक बहुत बड़ा सत्य होता है। शायद इन्हीं दोनों के बीच में रहकर आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के समीकरण जो 2019-2020 के बाद से इतने अच्छे रहे वह धीरे-धीरे ढलान पर आए और फिर जो ब्लू आइड बॉय थे पार्टी के भी और केजरीवाल के भी राघव चड्ढा वो अब पार्टी के अंदर हाशिए पर जाते नजर आ रहे हैं। यह राघव चड्ढा की राइज और फॉल की आम आदमी पार्टी के अंदर पूरी कहानी थी। बाकी जो अपडेट आ रहे हैं आपको अन्य वीडियो के माध्यम से हम बताते ही जा रहे हैं। टॉप के साथ जुड़े रहिए। शुक्रिया।

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