ब्रिटिश ऑस्कर कहे जाने वाले अह बाफटा 2026 ब्रिटिश एकेडमी ऑफ़ फिल्म एंड टेलीविज़ आर्ट्स ने भारत में इतिहास रच दिया है। मणिपुरी फिल्म बोंग ने इस साल बेस्ट चिल्ड्रंस एंड फैमिली फिल्म का अवार्ड अपने नाम किया है। बोंग इस कैटेगरी में जीत हासिल करने वाली देश की पहली फिल्म है।
फिल्म ने इस दौरान डिज्नी की लीलो एंड स्टिच और जुटपिया 2 जैसी ग्लोबल ब्लॉकबस्टर फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। बूम की कहानी मणिपुर के सुदूर गांव के इर्द-गिर्द बुनी गई है। वहां दुनिया की लाग लपेटे से दूर एक छोटा सा लड़का बूंग अपने मां-बाप के साथ रहता है। सब कुछ ठीक चल रहा होता है कि एक दिन उसके पिता अचानक कहीं गायब हो जाते हैं। बिना कुछ कहे एकदम से लापता। लोगों का कहना है कि उसके पिता की निधन हो गई है।
मगर उसकी मां की आंखें अपने पति के इंतजार में गहराने लगती है। वही इंतजार उस बच्चे के दिल के अंदर घर कर जाता है। वो अपनी मां को दुनिया का सबसे अच्छा तोहफा देना चाहता है और वो तोहफा है अपने पिता को वापस घर लाना। बस यही सोचकर वह अपने दोस्त राजू के साथ निकल पड़ता है एक अंतहीन खोज में। आगे क्या कुछ होता है? फिल्म में उसे ही दिखाया गया है। बोंग एक बच्चे के अपने पिता को ढूंढने भर की कहानी नहीं है बल्कि ये उसके प्यार, उम्मीद और हिम्मत की दास्तान भी है।
यह कहानी है दोस्ती के उस रिश्ते की भी जो नन्ही सी उम्र में ही खून से ज्यादा गहरा हो गया है। 2024 में इस मूवी को टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर किया गया था। 2026 में इसने बाफटा में इतिहास रच दिया है। बता दें कि इस मूवी को फिल्म मेकर लक्ष्मी प्रिया देवी ने लिखा और डायरेक्ट किया है। वह उनके करियर की पहली फीचर फिल्म है। इससे पहले उन्होंने कुछ शॉर्ट मूवीज बनाई है। वो राजकुमार हिरानी के पीके और फरहान अख्तर की लक्ष्य में असिस्टेंट डायरेक्टर रह चुकी है। बूम को प्रोड्यूस करने का जिम्मा भी फरहान अख्तर ने ही उठाया था।
डेडलाइन से हुई बातचीत में फरहान बताते हैं कि उन्होंने इस मूवी को इसलिए सपोर्ट किया क्योंकि वह मणिपुर की कहानी को सबके सामने लाना चाहते थे। उनकी मदद से ही बूंग इंटरनेशनल सर्किट में भाग ले पाई थी। वो बाफटा के मंच पर भी लक्ष्मी प्रिया के साथ मौजूद थे। फिल्म में बूम का रोल 12 साल के गुगुन किगन ने किया है। वहीं उनके दोस्त राजू का रोल अनगोम सना मानतु ने निभाया है। बूम की मां के किरदार में बाला हिजम नजर आई हैं। लक्ष्मी प्रिया ने मणिपुर के संघर्ष और उसकी वजह से हो रहे भेदभाव को छोटे बच्चों के नजरिए से पेश किया है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि राज्य के बिगड़े हालातों का सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को ही भुगतना पड़ रहा है। द प्रिंट से हुई एक पुरानी बातचीत में लक्ष्मी प्रिया कहती हैं, फिल्म में दिखाई गई कई घटनाएं बचपन में मेरे साथ भी हुई है। बड़े लोग अक्सर यह सोचते हैं कि बच्चों को अपनी छोटी उम्र के कारण कुछ समझ नहीं आता।
लेकिन सच यह है कि बच्चों का दुनिया को देखने का और समझने का अपना एक अलग नजरिया होता है। लक्ष्मी प्रिया ने बाफटा के मंच पर भी मणिपुर की मिट्टी और उसमें पड़ी दरारों को याद किया है। उन्होंने ग्लोबल स्टेज को खुरमजरी कहकर संबोधित किया है। मणिपुर में इसका मतलब नमस्ते होता है। रोचक बात यह है कि वह इस कहानी को पहले एक किताब के रूप में लिखना चाहती थी। मगर अपनी तथाकथित कमजोर अंग्रेजी के कारण वह ऐसा करने से रुक गई। उम्मीद है कि अब ब्रिटिश ऑस्कर के मन से बोला गया उनका यह एक मणिपुरी शब्द शायद आने वाले दिनों में राज्य के इर्द-गिर्द बनी खाई को फाटने के काम करें। अपनी विनिंग स्पीच में लक्ष्मी प्रिया ने कहा खुरम मजरी यहां तक पहुंचना ऐसा लगा जैसे हम किसी पहाड़ की चोटी पर पहुंच गए हो।
जबकि हमें तो पता भी नहीं था कि हम कब से उस पहाड़ पर चढ़ रहे हैं। वो आगे कहती हैं, मैंने बस इस मौके पर इतना कहना चाहती हूं कि हम मणिपुर में दोबारा शांति बहाल करने की प्रार्थना करते हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि जो बच्चे अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हैं। जिनमें फिल्म के चाइल्ड आर्टिस्ट भी शामिल हैं। वो फिर से अपनी खुशी, मासूमियत और सपनों को वापस पा सके। हम प्रार्थना करते हैं कि तकरार इतनी बड़ी ना हो जाए कि वह इंसान की सबसे बड़ी ताकत माफ करने की क्षमता को खत्म कर दे। इसलिए बाफ्ता का धन्यवाद जिन्होंने सिर्फ एक अवार्ड ही नहीं बल्कि हमें अपनी उम्मीद रखने का मंच भी दिया है। बूम की सफलता पर देश भर के लोग अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मणिपुर के लिए एक बेहद खुशी का पल बताया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म ने देश के क्रिएटिव टैलेंट को सबके सामने लाने का काम किया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा कि इस मूवी ने इतिहास रच दिया है।
उनके मुताबिक फिल्म ने बूम की पूरी टीम ने देश का नाम रोशन किया है। मणिपुर की सरकार ने इसे केवल एक फिल्म नहीं बल्कि मातृभूमि के लिए मेकर्स का एक ट्रिब्यूट बताया है। बूम पिछले दिनों स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म मूवी पर उपलब्ध थी। मगर फिलहाल यह किसी भी ओटीटी प्लेटफार्म पर अवेलेबल नहीं है। उम्मीद की जा रही है कि बाफटा विन के बाद मेकर्स इसे थिएटर्स में रिलीज़ करें। हालांकि मेकर्स की ओर से इस बाबत अब तक कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं की गई है।
