अगर मुझे मौका मिलता तो मैं अंतिम संस्कार… लखनऊ में पिता की जान लेने वाले अक्षत ने क्या बताया?

अगर मुझे मौका मिल जाता तो बचे हुए देह का भी मैं अकेले में अंतिम संस्कार कर देता। यह बयान लखनऊ में पिता को मारने के आरोपी अक्षत प्रताप सिंह का है। बाप बेटे के नाम पर इस कहानी के इर्द-गिर्द बेशुमार अंधेरा झांक रहा है। जब पुलिस बताती है कि अक्षत ने कबूला है कि उसने पिता को मारने के बाद देह के टुकड़े किए। यह जब यह सामने आता है कि उन को नीले ड्रम में भरा गया।

सिर को धड़ से अलग कर कार में रखा। 21 किमी दूर जाकर सुनसान इलाके में फेंक दिया। वह वापस घर लौटा तो कार को साफ किया गया। 20 फरवरी को हुई इस वारदात के बाद हर कोई सन है। घटना के तीन दिन बाद 23 फरवरी को अक्षत थाने पहुंचा और उसने अपने पिता की गुमशुदगी की एफआईआर दर्ज कराई। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मानवेंद्र सिंह की तलाश शुरू की।

जांच के दौरान उनकी आखिरी मोबाइल लोकेशन काकोरी इलाके में मिली। लेकिन वहां मोबाइल नहीं मिला। इसी बीच पुलिस को बेटे अक्षत पर शक हुआ। पुलिस ने अक्षत से पूछताछ की तो वह लगातार अपने बयान बदलता गया। शुरुआती बयान में उसने कहा कि पिता ने खुद अपनी जान दे दी। पुलिस का शक गहराने के बाद अक्षत से सख्ती से पूछताछ की गई। जिसके बाद उसने मारने की बात कबूल कर ली।

रिपोर्ट के मुताबिक अक्षत ने बताया कि 20 फरवरी की सुबह तकरीबन 4:30 बजे पिता से उसका विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि उसने गुस्से में पिता की लाइसेंसी

साधन उठा ली और उनके सिर में मार दी। इससे मौके पर ही उनकी जान गई। परिवार वालों के मुताबिक अक्षत का कहना है कि उससे धोखे से दग गई। इसके बाद उसने अपने बचाव के लिए पिता के देह के टुकड़े कर दिए क्योंकि पूरे शरीर को एक साथ ले जाना उसके लिए संभव नहीं था।

परिवार वालों ने यह भी बताया कि अक्षत बचे हुए देह को ठिकाने लगाने के लिए गाड़ी को पोर्च में ले आया था। लेकिन तभी दरवाजे पर किसी के आ जाने से वह ऐसा नहीं कर पाया। आरोपी ने यह भी कहा कि अगर उसे मौका मिल जाता तो वो बचे हुए देह का अकेले में अंतिम संस्कार कर देता।

वहीं घटना पर अक्षत के रिश्तेदार एस के सिंह भदोरिया का कहना है कि यह एक प्रीप्लान केस है। यह प्रीप्लान किया है उसने बेटे ने। क्या उसको ईगो हर्ट था? क्या प्रॉब्लम थी मुझे नहीं पता लेकिन प्रीप्लान है। वो शादी से लौटे हैं। 1:30 बजे जो मुझे बताया गया क्योंकि मैं झांसी में रहता हूं। तो बताया गया कि 1:30 बजे वो लौटे हैं। इसके बाद उसने जो है मार दी है। किस टाइम की? 2:00 बजे की, 2:30 बजे की, 3:00 बजे की। उसने जो है से मार दी है उनको।

इसके बाद सबके कई कर करके इधर-उधर फेंका है और धड़ को सबसे नीचे वाले फ्लोर में ले जाकर के एक नीले ड्रम में डाल के उसने रखा था। बहन जो लड़के की है वो बहुत सदमे में है। वो भी उस वक्त यहीं पर थी क्योंकि इसी कमरे में थी और बेटी के सामने ही यह सारी वारदात हुई है। बेटी के सामने बेटी के सामने सारी वारदात हुई है। और बेटी का यह कहना है कि हमको डरा दिया गया था भाई द्वारा।

कह दिया गया था कि तुम किसी से कहना नहीं तुमको भी मार देंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अक्षत ने पुलिस को यह भी बताया कि उसके पिता चाहते थे कि वो नीट क्वालीफाई करके एमबीबीएस करें लेकिन उसको एमबीबीएस करने का मन नहीं था। वो पिता से कहता था कि पैथोलॉजी लैब की जगह लॉन या रेस्टोरेंट खोल दिया जाए। इसी बात को लेकर 20 फरवरी को अक्षत और उसके पिता की बहस हुई।

बता दें कि मानवेंद्र सिंह जालौन के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड हैं। सालों पहले वह लखनऊ शिफ्ट हो गए। करीब 9 साल पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था। तब से मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति के साथ लखनऊ के घर में रहते थे।

आरोपी अक्षत बीकॉम का स्टूडेंट है। कृति 11वीं की पढ़ाई कर रही हैं। आरोप है कि जब अक्षत ने अपने पिता की जान ली तब कृति भी वहीं मौजूद थी। लेकिन घटना के बाद अक्षत ने कृति को डराया दी कि उसने किसी को बताया तो वह उसे देगा। से इसके बाद अक्षत ने कृति को घर में ही कैद रखा। फिलहाल पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है। अक्षत से पूछताछ जारी है।

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