राजपाल यादव फाइनली जेल से बाहर आ गए हैं और जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने इस केस के बारे में डिटेल में बात की। जहां एक तरफ उन्हें पैसे देने वाले माधव गोपाल अग्रवाल ने बताया कि राजपाल यादव को उन्होंने कई सारे चांसेस दिए लेकिन फिर भी उन्होंने पैसा नहीं दिया।
माधव बच्चों की तरह रोए अपने ही पैसों के लिए फिर भी उन्हें पैसा नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ अब राजपाल यादव ने माधव गोपाल अग्रवाल के साथ उनकी बात किस इंसिडेंट से बिगड़ी उस बात का खुलासा किया है।
एक्चुअली यह बात राजपाल यादव के वकील ने बताई है जिसने कहा है कि अतापता लापता फिल्म के लिए माधव गोपाल अग्रवाल ने पैसे दे दिए थे। राजपाल यादव और माधव गोपाल के रिश्ते बिल्कुल सही थे। फिर फिल्म का म्यूजिक लॉन्च इवेंट होता है और इस इवेंट पर अमिताभ बच्चन आते हैं। माधव गोपाल अग्रवाल क्योंकि वो फिल्म के फाइनेंसर थे तो वह भी इस इवेंट में शामिल होना चाहते थे और अमिताभ बच्चन के साथ स्टेज शेयर करना चाहते थे। लेकिन राजपाल यादव की टीम ने उन्हें रोक दिया। उन्हें बुलाया ही नहीं। बस यहीं से माधव गोपाल अग्रवाल राजपाल यादव से नाराज हो गए और उन्होंने अता पता लापता फिल्म के रिलीज से पहले ही उस फिल्म पर कोर्ट में स्टे मांग लिया। इधर राजपाल यादव की टीम का कहना है कि अमिताभ बच्चन म्यूजिक लॉन्च इवेंट में आ रहे थे। वो इस इवेंट में बिना पैसे आने के लिए राजी हुए थे।
वह कोई फायदा लेकर नहीं आ रहे थे। यही वजह है कि उनकी प्रेजेंस को राजपाल यादव कमर्शियलाइज नहीं कर सकते थे। बस इसीलिए उन्होंने माधव गोपाल अग्रवाल को इस इवेंट में आने से रोका। दोनों के बीच ईगो क्लैशेस यहीं से शुरू हुए। माधव गोपाल अग्रवाल का कहना था कि फिल्म तो मेरी है। पैसा मैंने लगाया है। तो मेरे हिसाब से कुछ चीजें हो सकती थी। वहीं राजपाल यादव का मानना है कि बिग बी को अगर राजपाल यादव अपनी फिल्म के ऑडियो रिलीज़ पर लेकर आए हैं तो उसके लिए राजपाल यादव ने सालों इंडस्ट्री में काम करके कांटेक्ट्स बनाए हैं। उनके दम पर आए हैं। तो फिर दूसरों को इसमें इनवॉल्व क्यों करना? बस यहीं से दोनों के बीच ईगो की टक्कर शुरू हो गई। राजपाल यादव के इस रीजन को सुनने के बाद लोग और राजपाल यादव को ही गलत ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि यह कोई बड़ी डिमांड थी ही नहीं।
यह कोई बड़ी बात थी ही नहीं। इवेंट में इतने लोग होते हैं। एक माधव अग्रवाल अगर स्टेज पर होते और फोटो क्लिक हो जाती तो क्या बड़ी बात हो जाती। राजपाल यादव को यह पंगा नहीं लेना चाहिए था। उनकी फिल्म को फाइनेंस किया था माधव गोपाल अग्रवाल ने और उस फाइनेंस के बदले उन्होंने यह जो रिक्वेस्ट थी यह बहुत ही छोटी मिनिमम रिक्वेस्ट थी जिसे अगर राजपाल यादव मान लेते तो शायद इतना बखेड़ा ही नहीं होता।
