अक्सर हम इंटरनेट पर जानवरों के वीडियोस देखकर मुस्कुराते हैं। उनकी शरारतों पर हंसते हैं। लेकिन आज मैं आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूं वो आपको हंसाएगी नहीं बल्कि शायद आपकी आंखों में आंसू ला देगी। जापान के एक चिड़ियाघर से कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियोस सामने आए हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का दिल तोड़ दिया है। एक नन्हा सा बंदर जो अपनी मां की गोद में नहीं बल्कि एक बेजान खिलौने से चिपक कर अपनी पूरी दुनिया खोज रहा है। क्या है इस मासूम की कहानी और क्यों इंटरनेट पर लोग इसे देखकर इतना भावुक हो रहे हैं। नमस्कार, मैं हूं सिद्धार्थ प्रकाश। आज हम बात करेंगे पंचकून की।
यह 7 महीने का एक छोटा सा मकैक यानी एक प्रकार का बंदर है जो इन दिनों जापान के इचीकावा सिटी ज़ में रहता है। पंचकून कोई साधारण बंदर नहीं है जो अपनी उछल कूद या करतबों के लिए मशहूर हुआ हो। वो मशहूर हुआ है अपने अकेलेपन और एक अरेंगटेन के खिलौने के प्रति अपने अटूट प्यार के लिए। [संगीत] पंचकून की कहानी सोशल मीडिया पर तब वायरल हुई जब लोगों ने उसे एक स्टफ्ड टॉय यानी रुई से भरे हुए एक नकली अरेंगटेन को कसकर पकड़े हुए देखा।
वो सिर्फ उसके साथ खेलता नहीं है। वो उसे सीने से लगाकर सोता है। उसे घसीटते हुए अपने बाड़े में इधर-उधर ले जाता है। और जब उसे डर लगता है या कोई दूसरा बंदर उसे धक्का देता है तो वो ढाल की तरह उस खिलौने के पीछे छिप जाता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स और Instagram पर जब यह तस्वीरें आई तो लोगों का रिएक्शन देखने लायक था।
किसी ने लिखा कि इसे खिलौने को घसीटते हुए देखना क्यूट तो है लेकिन साथ ही यह बेहद दुखद भी है। तो किसी ने कहा कि जब भी मैं पंचकून को देखता हूं मेरा दिल बैठ जाता है। लोग सिर्फ वीडियो ही नहीं देख रहे। वो उस नन्ही सी जान का दर्द महसूस कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर पंचकून को इस खिलौने की इतनी लत क्यों लगी? इसकी वजह काफी भावुक कर देने वाली है। पंचकून का जन्म जुलाई 2025 में हुआ था। लेकिन कुदरत का खेल देखिए।
जन्म के कुछ समय बाद उसकी मां ने उसे त्याग दिया। हम सब जानते हैं कि जानवरों के बच्चों के लिए, खासकर बंदरों के लिए, अपनी मां से चिपके रहना सिर्फ प्यार नहीं बल्कि एक जरूरत है। मां का स्पर्श उन्हें गर्मी देता है, सुरक्षा का एहसास कराता है और उन्हें इमोशनली स्टेबल रखता है। लेकिन पंचकून को यह नसीब नहीं हुआ। उसे शुरू से ही ज़ के कर्मचारियों ने पाला। उसकी इसी घबराहट और अकेलेपन को दूर करनेके लिए कीपर्स ने उसे कुछ कंबल और कुछ सॉफ्ट टॉयज दिए। उन खिलौनों में से एक ओरिंगटन वाला स्टफ टॉय पंच को इतना पसंद आया कि उसने उसे ही अपनी मां, अपना दोस्त और अपनी दुनिया मान लिया। वो उसे ऐसे पकड़ कर लेटता है जैसे वो दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह हो। और सोशल मीडिया की ताकत देखिए। जैसे ही पंच के वीडियो वायरल हुए, जापान के उस चिड़ियाघर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
लोग सिर्फ उस नन्हे बंदर और उसके खिलौने को अपनी आंखों से देखने के लिए लंबी लाइनों में लगने लगे। 15 फरवरी को चिड़ियाघर प्रशासन को बाकायदा एक बयान जारी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह इतनी भारी भीड़ देखकर हैरान हैं और लोगों को गेट पर हुए इंतजार के लिए माफी भी मांगी। यह भीड़ किसी तमाशे को देखने नहीं आई थी। बल्कि एक साझा हमदर्दी एक शेयरर्ड टेंडरनेस को महसूस करने आई थी। लेकिन क्या पंच हमेशा उस खिलौने के सहारे ही रहेगा? अच्छी खबर यह है कि अब धीरे-धीरे हालात बदल रहे हैं। जनवरी के बीच में चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने पंच को दूसरे बंदरों के ग्रुप में शामिल करना शुरू किया। शुरुआत बहुत मुश्किल थी। दूसरे बंदर उसे धक्का देते, उसे इग्नोर करते और पंच डर कर वापस अपने खिलौने के पास भाग आता। लेकिन 6 फरवरी को एक बहुत ही सुखद अपडेट आया। जू ने बताया कि पंच अब धीरे-धीरे दूसरे बंदरों के साथ घुलमिल रहा है। अब दूसरे बंदर उसकी ग्रूमिंग करते हैं। उसके बालों से जुएं निकालते हैं और कभी-कभी उसे डांटते भी हैं और कभी उसके साथ खेलते हैं। अब पंच उस खिलौने को पकड़े तो रहता है लेकिन उसके पीछे छिपता नहीं है। वो अब दुनिया का सामना करना सीख रहा है। आपको याद होगा कुछ समय पहले थाईलैंड की मू डेंग नाम की एक नन्ही हिप्पो बहुत वायरल हुई थी। वो अपने नखरों और शरारतों के लिए मशहूर थी। उसने हमें हंसाया था।
लेकिन पंच की कहानी में कोई स्वैग नहीं है। कोई कॉमेडी नहीं है। इसमें एक खामोश उदासी है। अगर मू डेंग ने दुनिया को हंसाया तो पंच ने दुनिया को रुलाया है। यह वीडियो वायरल इसलिए होते हैं क्योंकि इनमें एक यूनिवर्सल सच छिपा होता है। एक बच्चा चाहे वह इंसान का हो या जानवर का। जब वह डरकर किसी कोमलता को तलाशता है तो भाषा की दीवारें टूट जाती हैं।
हमें उसमें अपना अकेलापन, अपनी उम्मीद और संघर्ष दिखाई देता है। पंच अभी भी अपना खिलौना साथ रखता है। लेकिन अब वह अकेलेपन से निकलकर दोस्ती की ओर बढ़ रहा है। जापान से लेकर भारत तक हम सब यही दुआ कर रहे हैं कि पंचकून को जल्द ही असली दोस्तों का साथ मिल जाए और उसे उस बेजान खिलौने की जरूरत ना पड़े।