अमिताभ की वजह से चिढ़े थे लोन देने वाले माधव अग्रवाल

राजपाल यादव अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर है। उनके चेक बाउंस और लोन ना चुकाने का केस अभी कोर्ट में है। इस केस से जुड़े कई अपडेट सामने आ रहे हैं। अब राजपाल के वकील भास्कर उपाध्याय ने केस से जुड़े अपने पक्ष की बात रखी है। उनका आरोप है कि राजपाल यादव को लोन देने वाले माधव गोपाल अग्रवाल इस बात से चिढ़ गए थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ बैठने को नहीं मिला।

राजपाल यादव के वकील भास्कर ने इस केस के बारे में बताया। भास्कर बोले सितंबर में अमिताभ बच्चन मूवी लॉन्च के लिए आए और माधव अग्रवाल उनके साथ स्टेज शेयर करना चाहते थे।

राजपाल की टीम ने मना कर दिया क्योंकि अमिताभ बच्चन ने आने के बदले में कुछ भी नहीं लिया था। माधव अग्रवाल इस बात पर चिढ़ गए। वह सितंबर 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट चले गए और एग्रीमेंट के आधार पर बकाया चुकाने तक फिल्म पर स्टे की मांग रखी। केस दिसंबर 2012 तक खींचा जब पहला ₹60350 का चेक डिपॉजिट किया गया है। जिस पर बैंक से पैसे रिलीज हुए। वकील ने बताया कि माधव ने फिल्म से स्टे हटाने का अनुरोध करते हुए एक हलफनामा जमा किया और दोनों पक्षों ने 2013 में एक सहमति समझौते पर दस्तखत किए जिसके मुताबिक पिछले सभी समझौते अमान्य माने जाने थे। 2016 में एक नया समझौता बना और कानून यह दोनों पार्टीज की तरफ से बदला नहीं जा सकता था।

उसके मुताबिक 10 करोड़ 40 लाख का अमाउंट बाकी था। शिकायतकर्ता ने उस समझौते पर साइन किए थे कि अगर उनको यह पैसा दिया जाता है तो पुराना एग्रीमेंट रिवाइज नहीं किए जाएंगे। हाई कोर्ट ने भी कहा कि इस पैसे की रिकवरी कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही की जानी चाहिए। भास्कर ने बताया कि 2016 में वसूली की याचिका दी गई थी और शिकायत्तकर्ता को ₹1 करोड़990 लाख दिए गए थे। बाकी पैसे के लिए एक और ग्रांटर मिस्टर अनंत दत्ताराम आ गए। राजपाल यादव ने माधव अग्रवाल को अपनी 15 करोड़ की प्रॉपर्टी जमानत के तौर पर रखने के लिए कहा और बाकी अमाउंट एक महीने में वापस लौटाने की इजाजत मांगी।

माधव अग्रवाल ने यह ऑफर ठुकरा दिया और राज्यपाल को जेल भेजने की ठान ली। भास्कर आगे बताते हैं इसी वजह से मामला अब तक चल रहा है। ताजा घटनाक्रम में उनकी ओर से अदालत से अनुरोध किया गया है कि उनकी दलीलें भी सुनी जाए और मामले का निपटारा मेरिट के आधार पर किया जाए।

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