चेहरा ढके हुए, सिर झुकाए, पुलिस की पकड़ में यह दो लोग पति-पत्नी हैं। देखने में आम लोग, लेकिन करतूत ऐसी कि सुनकर रूह कांप जाए। यह वही दंपति है जो मासूम बच्चों को अपने जाल में फंसाते थे। उनके साथ दरिंदगी करते थे। वीडियो और फोटो बनाते थे। फिर डार्क के जरिए विदेशों में बेचते थे। यह वो लोग हैं जिन्होंने बच्चों की मासूमियत को बाजार बना दिया और इसी से लाखों रुपए कमाए।
उत्तर प्रदेश के बांदा की पोक्सो कोर्ट ने 20 फरवरी को इन दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए। के मुताबिक मामला अक्टूबर 2020 का है। को इंटरपोल की तरफ से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति तीन मोबाइल नंबरों से सात से लेकर 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड करता है। साथ ही एक पेनड्राइव भी मिली थी। उसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटोस थी।
यह बच्चे बांदा चित्रकूट समेत आसपास के जिलों के रहने वाले थे। उस नंबर को ट्रेस किया गया तो पता चला कि राम भवन अपनी पत्नी के साथ मिलकर यह गंदा काम कर रहा था। रामभवन सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। वो चित्रकूट की एसडीएम कॉलोनी में पत्नी दुर्गावती के साथ रहता था। दोनों की कोई संतान नहीं थी। रामभवन अपनी पत्नी के साथ मिलकर गरीब घरों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। जांच में पता चला कि कई बच्चों के साथ जबरन शारीरिक किया गया जिससे उनके निजी अंगों पर चोटें आई।
इस दौरान अगर कोई बच्चा विरोध करता था तो पति-पत्नी उसे मारते पीटते थे। चिल्लाने पर उनका मुंह दबा देते थे। फिर पैसे या खिलौने, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट देने का लालच देकर उसकी जुबान बंद करा देते थे। कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कुछ बच्चों की आंखों में तिरछापन यानी भीगापन भी हो गया। आज भी कई पीड़ित बच्चे इस घटना के कारण मानसिक सदमे यानी से गुजर रहे हैं। आरोपी साल 2010 से 2020 के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट इलाके में सक्रिय थे। 31 अक्टूबर 2020 को सीबीआई ने रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया और फिर 17 नवंबर 2020 को ने रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के वक्त तमाम उपकरण भी बरामद किए गए थे। जिसमें और विदेशों में बेचने के अहम सुराग मिले थे। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 10 फरवरी 2021 को रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 26 मई 2023 को अदालत ने आरोप तय किए। फैसला सुनाते समय अदालत ने इस अपराध को रेस्ट ऑफ द रेयर यानी सबसे दुर्लभ और जघन्य मामलों में से एक माना। अदालत ने कहा कि 33 बच्चों के साथ सुनियोजित तरीके से किया गया यह अपराध बेहद और अमानवीय है। इतने बड़े स्तर पर और इतने गंभीर तरीके से बच्चों का शोषण किया गया कि इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। इसीलिए अदालत ने सबसे कड़ी सजा सुनाई। कोर्ट के सरकारी अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने मामले पर क्या बताया सुनिए।
दरअसल ये अक्टूबर 2020 से सीबीआई को एक इंटरपोल के द्वारा एक सूचना दी गई थी कि एक व्यक्ति तीन नंबरों से छोटे-छोटे बच्चों के सात से लेकर के 1820 के बच्चे हैं उनके जो है सेक्शन साल्ट करते हुए पूर्ण वीडियो बना करके उसको इंटरनेट पे लोड रखा है और करीब 34 बच्चे थे एक पेन ड्राइव भी सूचना देने वालों ने दी थी जिसमें 34 बच्चों के वीडियोस थे और 679 सन्यासी 679 फोटो जो उसमें थे उसको लेकर जब पेन ड्राइव मिला तो फिर केस रजिस्टर किया नई दिल्ली में सीबीआई ने क्योंकि जुरडिक्शन यहीं का था बच्चे यहीं के थे और जो ये एक्यूज़्ड है राम ये जलकर विभाग में जेई था तो इनके नंबर से जब केस हुआ तो इसको गिरफ्तार किया गया गिरफ्तारी के बाद फिर इनको फरवरी इसको और इसकी पत्नी को दोनों जो दोनों गिरफ्तार करते हुए और इनको फरवरी में इनको चार्जशीट लगाई साक्षी लगाने के बाद ये केस चलता रहा।
काफी चार साल तक चलता रहा। 74 यानी 74 साक्षी सीबीआई के द्वारा पेश किए गए थे। धारा सिंह साहब इसकी जो है वो कर रहे थे प्रोसक्यूट कर रहे थे इसको और दो डिफेंस विटनेस पेश किए थे। अंतत आज फाइनली इनको दोनों को मृत्युद से जो पॉक्सो कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश है प्रदीप कुमार मिश्रा उसमें राम भवन को फांसी की सजा 5 सी में दिया गया जो की धारा उसमें अन्य में भी सजाएं दी है मृत्यु में आजीवन कारावास भी दिया है ।
लेकिन अबकि फाइनली उन्होंने ₹1 लाख जुर्गाना उसमें भी कहा है तो पांच वर्ष वो की सजा इनको और दुर्गावती को भी 120 का दोषी पाती उनको भी फांसी की सजा दी और यह लिखा है कि जब तक इनकी मृत्यु ना हो जाए तब तक इनको अंतिम सांस तक फांसी लटकाया जाए और यह भी कि बच्चों के पुनर्वास और राहत के लिए डीएम को एक पत्र लिखा लिखा जाए कि ये 10 ₹1 लाख केंद्र और राज्य सरकार आपसी सहमति से बच्चों को दें और ये जो धनराशि जो मिलेगी इसकी तो वो धनराशि भी पीड़ितों को आपस में ने कहा है कि वो बच्चों के और से जुड़े मामलों की पहचान जांच और कानूनी कारवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
