हो रंबा हो वाले गाने पर कल्पना अय्यर की वो एनर्जी आज भी वैसी ही है जैसे सालों पहले थी। हाल ही में फिल्म धुरंधर में उनके इस पुराने गाने का इस्तेमाल हुआ और गाना नई जनरेशन की जुबां पर चढ़ गया। इसी बीच एक शादी के फंक्शन से उनका एक डांस वीडियो वायरल हुआ जिसने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया।

साड़ी में भी जिस ग्रेस के साथ वह थिरक रही हैं, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल है कि वक्त इतना आगे निकल गया। [संगीत] उनकी अदाएं और चेहरे के एक्सप्रेशन बता रहे हैं कि वह आज भी बॉलीवुड की असली डांसिंग क्वीन हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं। लेकिन दोस्तों इस मुस्कान इस वायरल वीडियो और स्टारडमके पीछे एक ऐसी कहानी है जो किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं है। यह कहानी है एक ऐसी लड़की की जिसने 12 साल की उम्र में घर का बोझ उठाया।
उधार के जूतों में चलकर दुनिया जीती और दिल टूटने के बाद भी अकेले दम पर जिंदगी का सामना [संगीत] किया। कल्पना अय्यर का जन्म 26 जुलाई 1956 को मुंबई में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से तमिलनाडु का था। उनके पिता का नाम पद्मानाभन अय्यर और मां का नाम वेदवल्ली उर्फ़ तारा था। कल्पना का बचपन बहुत मुश्किलों में बीता। उनके जन्म के कुछ समय बाद उनके पिता ने एंग्रेस नाम की एक महिला से दूसरी शादी कर ली। घर के हालात बहुत अच्छे नहीं थे। चार भाई-बहनोंकविता, करुणा और रवि में सबसे बड़ी कल्पना के कंधों पर बहुत कम उम्र में जिम्मेदारियां आ गई। स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं थे।

इसलिए 12 साल की उम्र में ही उन्हें काम पर निकलना पड़ा। उनके संघर्ष का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि जब उन्होंने काम शुरू किया तो उनकी पहली कमाई कोई चेक या नगद राशि नहीं थी बल्कि मेहनताना के तौर पर उन्हें ग्लूकोस बिस्किट का एक पैकेट मिला था। बाद में उन्हें 50 और ₹75 मिलने लगे जिससे वह अपने परिवार का पेट पालती थी। फिल्मों में आने से पहले जब वह स्ट्रगल कर रही थी, उस दौर में उनका नाम मशहूर कलाकार जूनियर महमूद के साथ भी जुड़ा। यह उनके जीवन का वह निजीपन्ना है जिस पर बहुत कम बात होती है। लेकिन यह उनके सफर का हिस्सा था। उनकी किस्मत तब बदली जब कॉलेज के एक फंक्शन में लेजेंड्री सिंगर मुकेश जी की नजर उन पर पड़ी। मुकेश जी ने उस बच्ची के हुनर को पहचाना और उन्हें अपने म्यूजिक ट्रूप में शामिल कर लिया।

1978 में उन्होंने मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। उस वक्त उनके हालात ऐसे थे कि रैंप पर चलने के लिए उनके पास खुद के कपड़े और जूते तक नहीं थे। सब कुछ उधार का था। उधार के जूतों में चलकर वो मिस इंडिया की रनर अप बनी और मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट में जाकर भारत का प्रतिनिधित्व किया और टॉप 15 में अपनी जगह बनाई। इसी दौरान उनकी जिंदगी में एक बहुत बड़ा फैन मोमेंट आया जिसे वह आज तक नहीं भूल पाई। जब वो अपने पहले इंटरनेशनल शो के लिए फ्लाइट से जा रही थी तो उनकी सीट के पास ही उस दौर के उभरते हुए सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और उनकी नई नवेली दुल्हन जया बच्चन बैठे थे। एक 1920 साल की लड़की के लिए जो अभी दुनिया देख रही थी। अमिताभ और जया के साथ सफर करना किसी सपने के सच होने जैसा था।

उसे एक सफर ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वह भी सितारों की दुनिया का हिस्सा बन सकती हैं। फिल्मों में उनका सफर छोटे-मोटे रोल से शुरू हुआ। इम्तिहान, प्लेबॉय और प्रेम जाल जैसी फिल्मों में उन्होंने बहुत छोटे रोल किए। लेकिन उन्हें पहला बड़ा ब्रेक देवानंद साहब ने फिल्म लूटमार में दिया। गाने के बोल थे जब छाए तेरा जादू। यहां महबूब स्टूडियो का वो मशहूर किस्सा आता है जो इतिहास में दर्ज हो गया। जिस दिन कल्पना महबूब स्टूडियो में अपने करियर का यह पहला बड़ा गाना शूट कर रही थी, ठीक उसी वक्त उसी स्टूडियो के दूसरे फ्लोर पर डांसिंग क्वीन हेलन जी अपने करियर का आखिरी गाना शूट कर रही थी। मानो कुदरत खुद एक दौर खत्म करके दूसरे दौर की शुरुआत कर रही थी। हेललेन जी का वो आशीर्वाद आज भी उनके साथ है। वह आज भी कल्पना को उनके जन्मदिन पर फूल भेजती हैं। 80 का दशक आते-आते कल्पना अय्यर बॉलीवुड की जरूरत बन गई। हरि ओम हरि रंभा हो कोई यहां नाचे नाचे हर बड़ा गाना उनकी झोली में था। उनकी कैट आइज और बोल्ड अंदाज ने उन्हें उस दौर की सबसे ग्लैमरस वैंप बना दिया। लेकिन दुनिया जिसे ग्लैमर समझती थी उसके पीछे एक दर्द भी [संगीत] था। फिल्म इंडस्ट्री में कल्पना का नाम शोले के गब्बर सिंह यानी अमजद खान के साथ जुड़ा। आर्टिकल्स और पुराने इंटरव्यूज बताते हैं कि कल्पना अमजद खान को बेइंतहा चाहती थी। वो उनसे शादी करना चाहती थी, लेकिन अमजद खान पहले से ही शादीशुदा थे और यह रिश्ता किसी मुकाम तक नहीं पहुंच पाया। कल्पना का प्यार इतना गहरा था कि अमजद खान के गुजर जाने के बाद भी उन्होंने कभी किसी और पुरुष को अपनी जिंदगी में जगह नहीं दी।
उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं इतनी बोल्ड नहीं थी कि समाज से लड़कर बिना शादी के मां बन सकूं। इसलिए उन्होंने शादी का ख्याल छोड़ दिया और अपनी ममता अपनी बहन के बच्चों पर लुटा दी। कल्पना अय्यर को दुनिया सिर्फ एक आइटम गर्ल या वैंप मानती रही। लेकिन उन्होंने बार-बार साबित किया कि वह एक मंझी हुई अभिनेत्री भी हैं। 1994 में आई फिल्म अंजाम में जब वह एक क्रूर जेल वार्डन बनकर पर्दे पर आई तो उनकी एक्टिंग देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए थे। उस किरदार में उन्होंने माधुरी दीक्षित जैसी सुपरस्टार के सामने अपनी एक अलग और खौफनाक छाप छोड़ी। वहीं टीवी की दुनिया में मशहूर सीरियल चंद्रकांता में उन्होंने एक नेगेटिव रोल निभाया जिसे आज भी याद किया जाता है और अगर आपको लगता है कि वह सिर्फ वम थी तो फिल्म तो मुझे जान का वो रोमांटिक गाना तुम्हारा प्यार चाहिए मुझे जीने के लिए जरूर सुनिए। इसमें उनका एक ऐसा कोमल रूप दिखा था। जो उनकी इमेज से बिल्कुल अलग था। लेकिन इस चकाचौंध और ग्लैमर के पीछे बहुत शारीरिक और मानसिक दर्द छिपा था। 1996 में आए राजा हिंदुस्तानी के मशहूर गाने परदेसी परदेसी में बंजारन बनी कल्पना को नंगे पैर पत्थरों और उबर खाबर जमीन पर नाचना पड़ा था। शूटिंग खत्म होते-होते उनके पैरों में भयानक छाले पड़ गए थे। खून निकल रहा था। लेकिन चेहरे पर उन्होंने दर्द की एक लकीर तक नहीं आने दी। यही हाल साउथ की फिल्म में होता था। वहां परफेक्शन की मांग इतनी होती थी कि डांस करते-करते उनके घुटने और पैर सूझ जाते थे, लेकिन वो उफ तक नहीं करती थी। इसी राजा हिंदुस्तानी के सेट पर एक प्यारा किस्सा भी है। वहां करिश्मा कपूर से मिलने उनकी छोटी बहन नन्ही करीना कपूर अक्सर आया करती थी।
उस वक्त उस बच्ची को देखकर ही कल्पना ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह लड़की बड़ी होकर बहुत बड़ी सुपरस्टार बनेगी। और आज हम जानते हैं कि वह बात कितनी सच साबित हुई। लेकिन इंडस्ट्री की राजनीति और अफवाहों ने उनसे कई बड़े मौके छीन भी लिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि फिल्म गुलामी का सुपरहिट गाना जियाले मस्किन शूट करने के लिए वह जयपुर तक पहुंच गई थी। लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें बिना बताए वो गाना किसी और को दे दिया गया। वहीं करण अर्जुन के ब्लॉकबस्टर गाने राणा जी माफ करना के वक्त किसी ने इंडस्ट्री में झूठी अफवाह फैला दी कि कल्पना बहुत ज्यादा पैसे मांग रही हैं। नतीजन वो आइकॉनिक गाना उनके हाथ से निकल गया। उन्होंने दिग्गज दिलीप कुमार साहब की फिल्म कलिंगा में भी काम किया था जो दुर्भाग्य से कभी रिलीज नहीं हो पाई। लेकिन कल्पना कहती हैं कि दिलीप साहब के साथ काम करके उन्होंने जिंदगी में गरिमा यानी डिग्निटी का पार्ट सीखा जो आज भी उनके साथ है। 1999 का साल उनके करियर का एक अजीब और भावुक पड़ाव साबित हुआ। उन्होंने सूरज प्रजात्या की फिल्म हम साथ-साथ है में काम किया। नियति का खेल देखिए। उनका करियर शुरू हुआ था राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म मनोकामना से और उनका बॉलीवुड का सफर थमा भी राजश्री की ही फिल्म पर। यह उनकी जिंदगी का एक पूरा चक्र था। हालांकि तकनीकी रूप से उनकी आखिरी रिलीज फिल्म तमिल भाषा की काधिलार धिनम थी। उस दौर में टीवी और फिल्म इंडस्ट्री एक फैक्ट्री की तरह काम करने लगी थी। काम के बदले पेमेंट लेने के लिए उनकी बहन कविता को प्रोड्यूसर्स के ऑफिस के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। यह बात कल्पना के स्वाभिमान को चुभ गई। उन्हें लगा कि अब यहां कलाकारों की वह इज्जत नहीं रही जो पहले थी। निराश होकर उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको चौंका दिया। वह मुंबई के चकाचौंध छोड़कर हमेशा के लिए दुबई चली गई। [संगीत] जिस स्टार ने कभी मिस वर्ल्ड के मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वो दुबई के एक रेस्टोरेंट द मुगल रूम में हॉस्पिटिटी का काम संभालने लगी। वहां उन्होंने मेहमानों की खातिरदारी की। एक आम नौकरी की और इसमें उन्हें कोई शर्म महसूस नहीं हुई। आज दुबई में उनकी सबसे अच्छी दोस्त पुरानी अभिनेत्री पद्मिनी कपिला है। कल्पना को आज बस एक अफसोस है कि पैसे कमाने की दौड़ में वह बचपन में अपने भाई-बहनों के साथ समय नहीं बिता पाई। इसलिए अब वह अपनी पूरी जिंदगी अपनी बहन और अपने बच्चों के नाम कर चुकी हैं।
आज जब उनका वह डांस वीडियो वायरल हुआ है तो एक उम्मीद फिर जागी है। वो कहती हैं कि आज के दौर में रितिक रोशन को डांस करते देख उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं। प्रभु देवा और रितिक जैसे कलाकार उन्हें आज भी प्रेरित करते हैं। कल्पना अय्यर आज भी काम करना चाहती हैं। लेकिन उनकी एक शर्त है। वह ओटीटी पर मौजूद गालियों और अश्लीलता का हिस्सा नहीं बनेंग।
वो साफ कहती हैं, मुझे ऐसा रोल चाहिए जिसे मैं अपने घर के बच्चों के साथ बैठकर देख सकूं। दुबई में बैठी यह लेजेंड आज भी उसे एक फोन कॉल का इंतजार कर रही है जो उन्हें वापस उनके पहले प्यार यानी कैमरे के सामने ले आए। ग्लूकोस बिस्किट से शुरू हुआ उनका यह सफर हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे भी हो इंसान का जज्बा और उनका स्वाभिमान कभी नहीं हारता।
