वंदे भारत ट्रेन में खाने के पैकेट को लेकर महिला ने उठाए सवाल, स्टाफ की बोलती बंद, वीडियो वायरल।

यह पैकेट को माइक्रोवेव कर सकते हैं डायरेक्टली? जी, बिलकुल। बताइए कहां लिखा है? लिखा हुआ नहीं है। यहां पे यह लिखा है कि स्टोर करने के लिए लिखा हुआ है। नहीं नहीं आपने कहा कि इसको माइक्रोवेव में रखा राइट? आपने इसको माइक्रोवेव में रखा, राइट? हां, बिलकुल। रखा। तो इसमें कहां लिखा हुआ है कि इसको अपन माइक्रोवेव में डाल सकते हैं। वीडियो मत बनाइए। नहीं, आप वीडियो में क्या प्रॉब्लम है? आपने पूरी ट्रेन को खाना खिलाया है। कंप्लेन करना है? मैं कंप्लेन तो कर ही रही हूं। वीडियो में आपको क्या प्रॉब्लम है? आपने खाना सबको सर्व किया है। आप खुद से बोल रहे हैं कि इसको माइक्रोवेव किया है। बिल्कुल किया है। तो फिर क्या प्रॉब्लम है? सुना आपने? अभी तो सुनना बाकी है। पूरा वीडियो दिखाएंगे उससे पहले मामला समझा देते हैं।

दरअसल विवाद की जड़ है वंदे भारत ट्रेन का खाना। जिस पर सवाल उठा तो बवाल मच गया। दरअसल जिस महिला की आवाज आप सुन रहे हैं, उन्होंने खुद इस वीडियो को साझा किया है और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जिसके बाद आईआरसीटीसी ने माफी भी मांगी है। आईआरसीटीसी भारतीय रेलवे की एक सहायक कंपनी है जो ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग, खानपान और पर्यटन सेवाएं प्रदान करती है। यानी कि ट्रेन के अंदर मिलने वाले खाने की देखरेख आईआरसीटीसी करता है और उसने माफी तो मांग ली लेकिन अब लोगों ने सवाल उठाए हैं कि लाखों यात्रियों की जिंदगी खतरे में डालकर ऐसे खाने कैसे परोसे जा सकते हैं? अब चलिए पूरा मामला जानते हैं।

अवनी बंसल नाम की पैसेंजर हैं जो कि सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं और वकील से बचकर निकल पाना नामुमकिन है। उन्होंने सॉरी तो बुलवा लिया साथ में वीडियो में सवाल पूछकर कई लोगों के कान खड़े कर दिए। दरअसल अवनी बताती हैं कि आज मैं वंदे भारत इलाहाबाद से दिल्ली से यात्रा कर रही हूं और कल राजधानी दिल्ली से इलाहाबाद तक यात्रा कर चुकी हूं। मुझे रोटियां कचौरी सील बंद प्लास्टिक पैकेट के अंदर ही गर्म करके परोसी गई। राजधानी में मुझे बहुत भूख लगी थी इसलिए मैंने गर्म कचौरी तुरंत खा ली। बाद में ध्यान आया कि रुकिए यह गर्म कैसे हो सकती है? क्या यह सील पैकेट में नहीं थी? पैकेट को सीधे कैसे गर्म किया गया? कैसे प्लास्टिक के साथ खाना गर्म किया जा सकता है?

इसी पर पूरा बवाल था। जरा पूरा ये वीडियो सुनिए। तो इसको अपन ने माइक्रोवेव में गरम किया। आपको ठंडा चाहिए। नहीं नहीं मेरे को ठंडा नहीं चाहिए। अपन ने इसको माइक्रोवेव में गरम किया। हां जस्ट इसको माइक्रोवेव में गरम किया ना अपन ने? गरम किया। तो जितनी भी प्लेट्स हैं सबको माइक्रोवेव में गरम करते हैं। राइट? जी। अब इसमें लिखा हुआ है कि स्टोर इन कूल एंड ड्राई प्लेस। हां एक सेकंड नहीं क्यों व्हाई नॉट? बट यू आर गिविंग ये खाना आप सबको सर्व कर रहे हैं पब्लिक ट्रेन में। नहीं ऑथोराइजेशन क्या है इसमें? कोई प्राइवेट इनफार्मेशन थोड़ी नहीं है। इसमें यहां लिखा हुआ है स्टोर इन अ कूल एंड ड्राई प्लेस। अभी आपने कहा कि आप इसको माइक्रोवेव कर रहे हैं। स्टोर क्या एक सेकंड। यहां पे कहां लिखा हुआ है कि इसको अपन माइक्रोवेव कर सकते हैं।

ये पैकेट को माइक्रोवेव कर सकते हैं डायरेक्टली? बताइए कहां लिखा है? लिखा हुआ नहीं है। यहां पे ये लिखा स्टोर करने के लिए लिखा हुआ है। नहीं नहीं आपने कहा कि इसको माइक्रोवेव में रखा राइट। आपने इसको माइक्रोवेव में रखा राइट? हां बिल्कुल रखा। तो इसमें कहां लिखा हुआ है कि इसको अपन माइक्रोवेव में डाल सकते हैं। ये मैम जो आप देख रहे हो ना ये सेफ्टी पर्पस के लिए लिखा हुआ है। स्टोन लिप वूल। आप मेरे को ये बताओ इस पैकेट पे कहां लिखा हुआ है कि इसको माइक्रोवेव में रख सकते हैं। तो इसको आपको नहीं लग रहा एक बेसिक बात समझो। ये प्लास्टिक का है। इसको यदि अपन सीधे माइक्रोवेव में रख देंगे। हां। तो इसमें कहां ये आईआरसीटीसी का बना हुआ है। इसको कहां कहां लिखा हुआ है कि माइक्रोवेव डायरेक्टली कर सकते हैं इसको।

इसमें लिखा नहीं है। मैं तो बोल तो रहा हूं कि लिखा नहीं है। हां तो फिर कैसे माइक्रोवेव कर रहे हैं अपन इसको? गरम देने के लिए शॉर्टकट करने के लिए अपन सीधे। वीडियो मत बनाइए। नहीं मैं आप वीडियो में क्या प्रॉब्लम है? आपने पूरी ट्रेन को खाना खिलाया है। करना है। मैं कंप्लेन तो कर ही रही हूं। वीडियो में आपको क्या प्रॉब्लम है? आपने खाना सबको सर्व किया है। आप खुद से बोल रहे हैं कि इसको माइक्रोवेव किया है। बिल्कुल किया है। तो फिर क्या प्रॉब्लम है? मैंने ठीक है। ठीक है। जहां मुझे कंप्लेंट रेज करना है मैं आपको कर ही रही हूं और मैं करूंगी। बिल्कुल करूंगी।

सुना आपने अवनी ने यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर दिया है। जिसके बाद आईआरसीटीसी का जवाब सामने आया है। इसको माइक्रोवेव में गरम किया ना? पहले गरम किया है। तो जितनी भी प्लेट्स है सबको माइक्रोवेव में गरम करते हैं। राइट? जी जी। इस वीडियो की रिप्लाई में आईआरसीटीसी ने कहा मैडम कृपया अपनी पीएआर संख्या और मोबाइल नंबर साझा करें ताकि आपकी शिकायत पर आगे कार्यवाही की जा सके। आपका जवाब हमें आपकी सहायता शीघ्रता से करने में मदद करेगा। जिसके बाद अवनी ने जवाब दिया कहा माफ कीजिए। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मेरा पीएनआर क्यों आवश्यक है। कृपया इसका कारण स्पष्ट करें। क्या यहां मुद्दा उन लाखों लोगों से जुड़ा नहीं है जो ट्रेनों में यही भोजन कर रहे हैं। आप सीधे स्पष्टीकरण क्यों नहीं जारी करते? इसके साथ ही अवनी ने लिखा त्वरित प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। इसकी सराहना करती हूं। लेकिन यह मेरा व्यक्तिगत मुद्दा नहीं है। कृपया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि क्या सील बंद पैकेट गर्म करके परोसे जा रहे हैं या किन-किन ट्रेनों में हो रहा है? कब से हो रहा है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इस पर आईआरसीटीसी ने कहा कि मैडम हुई असुविधा के लिए हम सिंसियरली क्षमा चाहते हैं। कृपया हमें अपना पीएनआर और मोबाइल नंबर डीएमएस साझा करें ताकि हम इस मामले का समाधान कर सकें। तो

इस तरह से यह पूरा मामला सामने आया है। माफी तो मांग ली गई है लेकिन लोगों का गुस्सा फूटा है। लोगों ने क्या कुछ कहा? एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, यह एक गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा है। कोई आश्चर्य नहीं है कि हमारे देश में खास सुरक्षा मजाक बनकर रह गई है। आईआरसीटीसी ऑफिशियल आप एक सार्वजनिक चिंता के लिए व्यक्तिगत विवरण क्यों मांग रहे हैं? कृपया इस पर स्पष्टीकरण दें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं। वहीं एक यूजर ने लिखा ईमानदारी से कहूं तो हमारा देश वेंटिलेटर पर है। हालात बहुत खराब हैं। कॉमन सेंस जैसे गायब हो गया है। जहां भूख मरी हो फ्री राशन पर लोग निर्भर हो वहां दूसरों को खाना परोसते समय प्लास्टिक के जहर की चिंता कौन करेगा?

बाहर का खाना और सरकारी प्रशासन दोनों को दूर से नमस्ते। वहीं एक ने लिखा इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे को उठाने और जानकारी देने के लिए धन्यवाद। प्लास्टिक वास्तव में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और कुछ प्रकार के प्लास्टिक से निकलने वाले रसायन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। संभव है कि यह भी भारत में बीमारी में बढ़ते मामलों के कारणों में से एक कारक होगा। व एक ने लिखा हमें फिर से अपनी पुरानी आदतों की ओर लौटना चाहिए। आईआरसीटीसी या किसी भी विक्रेता से खाना खरीदने के बजाय अपना भोजन स्वयं साथ लेकर चलना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में पोषण स्तर या स्वच्छता के मानकों का सही-सही पता लगाना लगभग असंभव है।

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