हिंदू बेटियों को लेकर धीरेंद्र शास्त्री का चौकाने वाला बयान।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान एक बड़ा बयान जिसमें उन्होंने बुर्खा वाली नहीं बनना तुम दुर्गा बनना मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना विचार है, निजी विचार है। 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा, संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है। और इस बीच में जो बिगड़ जाएगा वो कभी सुधर नहीं सकता है।

इसलिए जितने भी बच्चे बैठे हैं तुम संगत के चक्कर में दूसरों को कुछ लोग कहते हैं गुरुजी हम क्या बताएं। हम तो ठीक थे हमारी सहेली बेकार थी हमारे सहेला बेकार था अरे नक्कटू चंडी दुर्गा काली त्रिपुर सुंदरी बेटियों तू दुर्गा बन तू काली बन पर कभी ना बुर्के वाली बन हां हमारी प्रार्थना है बेटियों ये सहेली सहेला के चक्कर में मत पड़ो कि वो ऐसा है तो मैं भी ऐसी हो जाऊं।

वो वैसा है मैं भी वैसा और बच्चों से भी प्रार्थना है। वो मेरा मित्र ऐसा कर रहा है। मैं भी फूंकू मैं भी ये करूं। मेरे बच्चों याद रखना पढ़ने वाले बच्चों एक बात हमारी तुम याद रखना कोई किसी को नहीं बिगाड़ सकता। खुद में यदि खोट ना हो। याद रखना रामचरितमानस के दो पात्रों को तुम पढ़ लेना।

राम के राज्य में रहकर के मंथरा सुधरी नहीं और रावण के राज्य में रहकर विभीषण बिगड़ा नहीं। विभीषण रावण के खानदान में पैदा हुआ पर रावण बिगाड़ नहीं पाया। राम भजन से विमुख नहीं कर पाया। और आज के बच्चे कहते हैं कि हम नहीं बिगड़े हमारे मित्र बिगड़े। क्या था? लिपटे रहत भुजंग चंदन से सांप लिपटे रहते हैं। चंदन अपनी शीतलता देता है। लेकिन कभी भी सांप का जहर नहीं लेता है। [संगीत] इसलिए तुम कितने भी गलत संगत में रहो, कितनी भी गलत जगह रहो पर अपने आप को कंट्रोल रखो।

अपने आचरण को शुद्ध रखो। अपने मन को कंट्रोल रखो। आज की कथा की बात यही तुम्हें जीवन में घर पर लेकर जानी है। और सुनो बच्चों, दौड़ते हुए घोड़े, उगते हुए सूर्य का चित्र लगाने से सफलता नहीं मिलती है। सूर्य के पहले जगना पड़ता है और घोड़ों की तरह दौड़ना पड़ता है। तब सफलता प्राप्त होती है। तुम हमारी बात कान खोलकर सुन लो। तुम हमें मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना। अभी समय है। हम आपको आचरण की बात कहे। आचरण पर चर्चा चल रही आचरण की। अभी समय है। जितने युवान बच्चे बैठे हैं हमारा बहुत पुराना विचार है। निजी विचार है। 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा, संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है। और इस बीच और बड़ी खबर इस वक्त पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान।

एक बड़ा बयान जिसमें उन्होंने बुर्खा वाली नहीं बनना तुम दुर्गा बनना। मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना। विचार है, निजी विचार है। 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा, संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है। और इस बीच में जो बिगड़ जाएगा वो कभी सुधर नहीं सकता है। इसलिए जितने भी बच्चे बैठे तुम संगत के चक्कर में दूसरों को कुछ लोग कहते गुरु जी हम क्या बताएं हम तो ठीक थे हमारी सहेली बेकार थी हमारी सहेला बेकार था अरे नक्कु चंडी दुर्गा काली त्रिपुर सुंदरी बेटियों तू दुर्गा बन तू काली बन पर कभी ना बुर्के वाली बन हां हमारी प्रार्थना है बेटियों ये सहेली सहेला के चक्कर में मत पड़ो कि वो ऐसा है तो मैं भी ऐसी हो जाऊं वो वैसा है मैं भी वैसा और बच्चों से भी प्रार्थना है वो मेरा मित्र ऐसा कर रहा मैं भी सिगरेट फूंकू मैं भी ये करूं मेरे बच्चों याद रखना पढ़ने वाले बच्चों एक बात हमारी तुम याद रखना कोई किसी को नहीं बिगाड़ सकता खुद में यदि खोट ना हो याद रखना रामचरितमानस के दो पात्रों को तुम पढ़ लेना राम के राज्य में रहकर के मंथरा सुधरी नहीं और रावण के राज्य में रहकर विभीषण बिगड़ा नहीं।

विभीषण रावण के खानदान में पैदा हुआ पर रावण बिगाड़ नहीं पाया। राम भजन से विमुख नहीं कर पाया और आज के बच्चे कहते कि हम नहीं बिगड़े हमारे मित्र बिगड़े क्या था? लिपटे रहे भुजंग चंदन से सांप लिपटे रहते हैं। चंदन अपनी शीतलता देता है। लेकिन कभी भी सांप का जहर नहीं लेता है। इसलिए तुम कितने भी गलत संगत में रहो, कितनी भी गलत जगह रहो पर अपने आप को कंट्रोल रखो, अपने आचरण को शुद्ध रखो। अपने मन को कंट्रोल रखो। आज की कथा की बात यही तुम्हें जीवन में घर पर लेकर जानी है। और सुनो बच्चों, दौड़ते हुए घोड़े, उगते हुए सूर्य का चित्र लगाने से सफलता नहीं मिलती है। सूर्य के पहले जगना पड़ता है और घोड़ों की तरह दौड़ना पड़ता है। तब सफलता प्राप्त होती है। तुम हमारी बात कान खोल कर सुन लो। तुम हमें मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना।

अभी समय है। हम आपको आचरण की बात कहे। आचरण पर चर्चा चल रही आचरण की। अभी समय है। जितने युवान बच्चे बैठे हैं हमारा बहुत पुराना विचार है। निजी विचार है। 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा, संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है। और इस बीच और बड़ी खबर इस वक्त पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बड़ा बयान। एक बड़ा बयान जिसमें उन्होंने बुर्खा वाली नहीं बनना तुम दुर्गा बनना मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना विचार है। निजी विचार है। 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है और इस बीच में जो बिगड़ जाएगा वो कभी सुधर नहीं सकता है।

इसलिए जितने भी बच्चे बैठे तुम संगत के चक्कर में दूसरों को कुछ लोग कहते गुरुजी हम क्या बताएं हम तो ठीक थे हमारी सहेली बेकार थी हमारी सहेला बेकार था अरे नक्कटु चंडी दुर्गा काली त्रिपुर सुंदरी बेटियों तू दुर्गा बन तू काली बन पर कभी ना बुर्के वाली बन हां हमारी प्रार्थनाएं बेटियों ये सहेली सहेला के चक्कर में मत पड़ो कि वो ऐसा है तो मैं भी ऐसी हो जाऊं वो वैसा है मैं भी वैसा और बच्चों से भी प्रार्थना है वो मेरा मित्र ऐसा कर रहा मैं भी फूंकू मैं भी ये करूं मेरे बच्चों याद रखना पढ़ने वाले बच्चों एक बात हमारी तुम याद रखना कोई किसी को नहीं बिगाड़ सकता खुद में यदि खोट ना हो याद रखना रामचरितमानस के दो पात्रों को तुम पढ़ लेना राम के राज्य में रहकर के मंथरा सुधरी नहीं और रावण के राज्य में रहकर विभीषण बिगड़ा नहीं।

विभीषण रावण के खानदान में पैदा हुआ पर रावण बिगाड़ नहीं पाया। राम भजन से विमुख नहीं कर पाया और आज के बच्चे कहते कि हम नहीं बिगड़े हमारे मित्र बिगड़े। क्या था? लिपटे रहित भुजंग चंदन से सांप लिपटे रहते हैं। चंदन अपनी शीतलता देता है। लेकिन कभी भी सांप का जहर नहीं लेता है। इसलिए तुम कितने भी गलत संगत में रहो, कितने भी गलत जगह रहो पर अपने आप को कंट्रोल रखो, अपने आचरण को शुद्ध रखो।

अपने मन को कंट्रोल रखो। आज की कथा की बात यही तुम्हें जीवन में घर पर लेकर जानी है। और सुनो बच्चों, दौड़ते हुए घोड़े, उगते हुए सूर्य का चित्र लगाने से सफलता नहीं मिलती है। सूर्य के पहले जगना पड़ता है और घोड़ों की तरह दौड़ना पड़ता है।

तब सफलता प्राप्त होती है। तुम हमारी बात कान खोलकर सुन लो। तुम हमें मानो या ना मानो पर मां-बाप को जरूर मानना। अभी समय है। हम आपको आचरण की बात कहे। आचरण पर चर्चा चल रही। आचरण की अभी समय है जितने युवान बच्चे बैठे हैं हमारा बहुत पुराना विचार है निजी विचार है 18 से 25 वर्ष के बीच में जो बालक बालिका सुधरा रहेगा संभला रहेगा वो कभी बिगड़ नहीं सकता है और इस बीच

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