गोरखपुर में आंख की ट्रीटमेंट कराने गए मरीजों की आंखें क्यो निकालनी पड़ीं?

अस्पताल में एडमिट ये लोग आई कैंप में आंखो कि ट्रिटमेंट कराने आए थे। लेकिन ऑपरेशन के बाद इनको नया इनफेक्शन हो गया। अब यह सब अपना शहर छोड़कर दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के हॉस्पिटल्स में अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें से नौ लोगों की आंखों में इंफेक्शन इतना ज्यादा बढ़ गया कि उनकी आंखें निकालनी पड़ी।

सवाल था कि इस पूरे प्रकरण का जिम्मेदार कौन है? वो हॉस्पिटल जिसने आई कैंप आयोजित किया था या वो डॉक्टर जिन्होंने आंख का ट्रीटमेंट किया। मामला उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का है। न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल ने आई कैंप का आयोजन कराया था। यह प्राइवेट हॉस्पिटल है। आज तक के गजेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट के मुताबिक 1 फरवरी को यहां आयोजित आई कैप में 30 लोगों का आंख का ट्रीटमेंट हुआ था। लेकिन 24 घंटों के बाद ही सभी की हालत बिगड़ने लगी। 18 लोगों की आंखों में इंफेक्शन हो गया। उन्हें गोरखपुर से बाहर दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रेफर किया गया।

जिनकी आंखों में इंफेक्शन है उनके परिजनों ने क्या बताया वो सुनिए। तो वहां पे आंख ऑपरेशन करवाई थी। तो वहां पर उनका ऑपरेशन हुआ। फिर उसके बाद ऑपरेशन होने के बाद शाम तक वो घर पे आए। फिर रात होते होते उनका बहुत दर्द हो रहा आंख से। फिर हम लोग 11 12:00 बजे फिर दोबारा रात में लेकर गए। वहां डॉक्टर नहीं था। कोई कंपाउंडर था तो मतलब सुई लगवाया थोड़ा आराम मिला।

फिर उसके बाद सुबह डॉक्टर जब आया तो दिन भर वहां पे थे। फिर उसके बाद शाम तक भेज दिया गोरखपुर। गोरखपुर वहां मतलब बढ़िया इलाज नहीं मिला। फिर फोन किया कि भाई वो वहां मत ले जाओ और ले चले गए। दिल्ली ले चले जाओ। हम लोग वहां दिल्ली एम से मिले गए हैं। वहां उनका दो दिन भर्ती करवाया वहां पे।

फिर तीसरे दिन मतलब उनका आके पूरा निकाल दिया गया। एक दूसरे शख्स जो अपनी भाभी का ऑपरेशन कराने आए थे उनको भी इनफेक्शन हुआ है और अब दिल्ली एम्स में उनका इलाज चल रहा है। आंख का ऑपरेशन हुआ। वहां से आई तो इनका पानी जो है बंद ही नहीं हुआ है आंख से। तो दिखाने के लिए यहां से जब उनका तयत खराब हो गया तो दिखाने के लिए गोरखपुर ले गए। डॉक्टर बोला यहां के बस का बात नहीं और इसको आगे कहीं पे लेके जाइए।

तो उन्होंने रेफर कर दिया डायरेक्ट दिल्ली के लिए और दिल्ली में गया तो उनका जो है आग बहुत ज्यादा खराब हो गया था तो डॉक्टर लास्ट पोजीशन में उनको जो है बताया कि आंख निकालेंगे तभी यह बच सकती हैं। खबर बाहर आई तो स्वास्थ्य विभाग ने संज्ञान लिया। एक टीम जांच के लिए गोरखपुर पहुंची। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में इनफेक्शन की बात सामने आई है। जिन डॉक्टर्स ने मोतियाबिंद का ट्रीटमेंट किया था उनके खिलाफ मजिस्ट्रियल इंक्वायरी सेटअप हुई है।

जिन लोगों का ऑपरेशन हुआ है और जिन डॉक्टर्स ने ऑपरेशन किया है उन सभी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले पर गोरखपुर के सीएमओ डॉक्टर राजेश झा ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। हम लोग को 4 तारीख को ही पता लगा के एक तारीख को करीब 30 ऑपरेशंस हुए थे सीकरीगंज में जिसमें उन लोगों को इनफेक्शन हो गया है। उसके आधार पर तुरंत ही एक जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई जिसमें दो आई सर्जन एक बी आरडी से और एक डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल से लिए गए और दो हमारे सीनियर ऑफिशियल उसमें थे और इन लोगों ने उसकी उसी दिन से हम लोगों ने इस पर काम करना शुरू किया लेकिन दुर्भाग्यवश इसमें कई लोगों की आंखें खराब हो गई। आप लोग देख ही रहे हैं।

अभी तक नौ लोगों की आंख निकालने की सूचना है और इसमें लगातार उन पेशेंट्स के साथ भी फॉलो किया जा रहा है। एक तारीख को जब ये घटना हुई जैसा कि इन लोगों ने बताया अपने बयान में कि दो तारीख को इन लोगों ने सभी मरीजों को जिनको प्रॉब्लम हुई थी अलग-अलग अस्पतालों में कुछ को दिल्ली कुछ को बीएचयू और कुछ लोगों को लोकल में ही जो अच्छे हॉस्पिटल थे उन हॉस्पिटल में संदर्भित किया गया। उसके बाद हम लोगों ने इस पे कारवाई करते हुए छ तारीख को जो हमारी टीम थी हमने वहां विजिट किया। विजिट करने के बाद इन्होंने उसके माइक्रोबोलॉजिकल टेस्ट के लिए कहा तो हम लोगों ने उसके ओटी का टेस्ट भी हम लोगों ने बी आरडी मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट से कराया है और उसके बाद फिर इस पर अभी मैजिस्टरियल जांच कर रहे हैं। आज या कल में हम लोग को इसकी रिपोर्ट मिल जाएगी। तद अनुसार जो भी होगा नियमानुसार कारवाई की जाएगी।

गोरखपुर के डीएम दीपक मी ने कहा कि तत्काल प्रभाव से हमने हॉस्पिटल को बंद करवा दिया है। एकद दिन में इंक्वायरी रिपोर्ट आ जाएगी। उसके आधार पर आगे की कारवाई की जाएगी। न्यू सिगरीगंज में जो हॉस्पिटल है इसमें एक दिन में कैटेगराइट ऑपरेशंस हुए जिसमें इनफेक्शन की बात सामने आई है और वो लोग अलग-अलग जगह ट्रीट हो रहे हैं और कईयों में इनफेक्शंस बढ़ा भी है तो तत्काल प्रभाव से हमने हॉस्पिटल को बंद करवा दिया है।

। सील कर दिया है और इसमें एक मजिस्ट्रियल इंक्वायरी सेटअप कर दी है। एक या दो दिन में उसे इंक्वायरी रिपोर्ट भी आ जाएगी। उससे आगे की कारवाई की जाएगी और कहीं भी कोई दोषी होगा तो उसके हिसाब से उनका रजिस्ट्रेशन कैंसिल और अग्रिम कारवाई भी की जाएगी। इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा मुख्य नगरी गोरखपुर में लोगों की आंखों की रोशनी छीन रही है और कोई चैन से बैठकर गाल बजा रहा है। मुख्यमंत्री जी जब गोरखपुर आते हैं तो क्या और कोई भी देखभाल या हिसाब किताब करते हैं या फिर केवल जोड़गांट के चले जाते हैं। इस बार जनता इन्हें गोरखपुर से भी हराएगी और बताएगी कि चिराग तले अंधेरा क्या होता है।

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