क्यों 16 साल से गायब है इस एक्ट्रेस का शरीर?

भारतीय हिंदी सिनेमा के गुजरे उस ब्लैक एंड वाइट सुनहरे दौर की एक ऐसी बेमिसाल अभिनेत्री की है। जिसके बेहद आकर्षित सौंदर्य रंग रूप ने पूरी दुनिया के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी सिनेमाओं के मशहूर लोगों को अपना दीवाना बनाया। हिंदी सिनेमा के 40 से 50 के दशक की इस अभिनेत्री की खूबसूरती का ऐसा जादू था लोगों के दिलों पर कि उस दौर की बड़ी-बड़ी नामचीन अभिनेत्रियों के साथ-साथ सौंदर्य की देवी कही जाने वाली मधुबाला को भी होने लगी थी इस अदाकारा की खूबसूरती से चलन बातें करने कोई आपसे सीखें।

दोस्तों जब भारत देश गुलामी की जंजीरों में बंधा था और भारतीय महिलाओं को जहां घूंघट से बाहर देखने की भी आजादी नहीं थी। तो ऐसे में इस महान और हुस्न की मल्लिका ने कराया ऐसा बोल्ड फोटोशूट जिसे देखकर उस दौर के बड़े-बड़े अभिनेताओं, अभिनेत्रियों के साथ-साथ फिल्मी हस्तियों को आ गए थे पसीने। तो इसी फोटो शूट के बाद क्यों दुनिया ने कहा इस अभिनेत्री को हिंदी सिनेमा की फैशन क्वीन गोरे गोरे खोबा के छोरे कभी मेरी गली आया करो दोस्तों क्या आप यह जानते हैं कि दुनिया भर में मशहूर यह अदाकारा जिसे दुनिया भर का ऐशो आराम धन दौलत और प्यार नसीब हुआ क्यों उसी अभिनेत्री को अकेलेपन और तनहाई के दर्द ने पहुंचा दिया दुनिया के उस अंधकार में जहां से आज तक वापस नहीं आ पाई है यह मशहूर और खूबसूरत अभिनेत्री दुनिया से नरक है ईद वफा जब यूं ही दोस्तों इस अदाकारा के साथ उनकी जिंदगी में ऐसा क्या हुआ कि दो-दो शादी करने के बाद भी क्यों यह अदाकारा रही जिंदगी भर अकेले क्यों जिंदगी की तनहाई और लाचारी को झेल रही यह खूबसूरत अदाकारा अभी तक तरसती रही औलाद के लिए।

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इस अभिनेत्री के साथ ऐसा क्या हुआ था कि जिस अदाकारा के आसपास नौकर चाकर के साथ-साथ बड़ी-बड़ी हस्तियों का जमावड़ा लगा रहता था। वो अभिनेत्री क्यों अपनी मौत के वक्त रह गई थी? अपने बंगले में लाचार, बेबस और अकेली। कि दोस्तों क्या आप यह भी जानते हैं कि दुनिया भर में लोकप्रिय और चर्चित इस अदाकारा की निधन के बाद इनका शरीर कई दिनों तक इनके ही बिस्तर पर सड़ता रहा। और क्यों उसी शरीर को खा गए थे कीड़े? मुझसे बिछड़ के। तो वहीं इनकी मौत के बाद इनकी लाश के साथ क्या हुआ? यह सवाल आज तक बना हुआ है एक रहस्यमय पहेली। देर ना करना कहीं आंसू टूट जाए, सांस छूट जाए।

दोस्तों कैसे इस अभिनेत्री का घर ही बन गया इनका बर्बादी का कारण। बताएंगे आपको और भी बहुत कुछ इस शानदार यादगार खूबसूरत अभिनेत्री के बारे में वो सब कुछ जिसे जानकर आप हो जाएंगे हैरान। तो आप सभी बने रहिए हमारे साथ इस वीडियो के अंत तक। मेरा नाम मुंह पर लाना नमस्कार आदाब आभार आप सभी दोस्तों का आज हम अपने इस शो में बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा की उस अभिनेत्री की जिसने कदम तो रखा था एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर लेकिन अपने अभिनय और खूबसूरती के बल पर वो बन गई ब्लैक एंड वाइट दुनिया की सबसे खूबसूरत फैशन क्वीन और हिंदी सिनेमा के इतिहास में इनको जाना पहचाना गया। बेमिसाल खूबसूरती की रानी नलिनी जयवंत के नाम से। कौन है नलिनी जयवंत? कहां से यह आई थी? क्यों थी इनकी बदनसीब किस्मत में दर्द ही दर्द? यह सब मैं आपको बताऊंगी। लेकिन उससे पहले जान लेते हैं नलिनी जयवंत की शुरुआती पढ़ाई लिखाई और उनके परिवार के बारे में। नजर लागी राजा तोरे बंगले पर नजर लागी राजा नमस्कार आप सभी का स्वागत है नदिनी जयवंत का जन मुंबई के गांव गिरगांव में एक मराठी परिवार में 18 फरवरी साल 1926 को हुआ था। इनके पिता और माता और दो भाई को लेकर कहीं भी कोई भी पुख्ता जानकारी हासिल नहीं है। नलिनी जयवंत अपने बचपन के दिनों से ही काफी चंचल थी। उनको नृत्य कला काफी आकर्षित करती थी। इसलिए नलिनी जयवंत ने मोहन कल्याणपुर से नृत्य की शिक्षा ली थी। नृत्य के साथ-साथ नलिनी की आवाज काफी मधुर और सुरीली थी। इसलिए नलिनी ने गायन के क्षेत्र में भी हीराबाई जवेरी से संगीत की शिक्षा दीक्षा प्राप्त की। नलिनी जयवंत के मन में था कि वह भी हिंदी सिनेमा का हिस्सा बने।

उसमें भूमिका अदा करें। लेकिन नलिनी जयवंत के पिता हिंदी सिनेमा के खिलाफ थे। उनकी सोच में हिंदी सिनेमा अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था और उस वक्त फिल्मों में काम करने वाली अभिनेत्रियों को वेश्या समझा जाता था। हालांकि इस सोच के बावजूद नंदिनी जयवंत की चचेरी बहन शोभना समर्थ पहले ही हिंदी सिनेमा में काम करने लगी थी। शोभना समर्थ मशहूर फिल्म अभिनेत्री नूतन और तनुजा की मां हैं। तो वहीं आज की मशहूर अभिनेत्री काजोल की नानी भी हैं। जब नन्ही थोड़ी बड़ी हुई तो यह एक बार अपने घर के पास फिल्म देखने थिएटर पहुंच गई।

जहां पर उस वक्त के मशहूर फिल्म निर्माता चमन लाल देसाई और उनके बेटे वीरेंद्र देसाई भी आए हुए थे। पिता पुत्र की नजर उस भीड़ में एक लड़की पर पड़ी जो उस तमाम भीड़ में अपनी चमक और दमक बिखेर रही थी और यह लड़की कोई और नहीं बल्कि नलिनी जयवंत ही थी।

उस समय नलिनी लगभग 13 या फिर 14 साल की थी। जब चमन लाल और वीरेंद्र ने नलिनी को पहली नजर में देखा और मन ही मन इनको अपनी फिल्म की हीरोइन चुनने का मन बना लिया। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण नलिनी जयवंत पिक्चर हॉल से बाहर निकल गई। चमन लाल और वीरेंद्र देसाई को पता ही नहीं चला। लेकिन कुछ समय बाद चमन लाल और वीरेंद्र देसाई शोभना समर्थ के जन्मदिन पर उनके घर पहुंचे जहां नलिनी जयवंत पहले से मौजूद थी। नलिनी को वहां देख चमन लाल और वीरेंद्र देसाई बेहद खुश हुए और उन्होंने इस बार बिना वक्त गवाए नलिनी जयवंत के सामने अपनी एक फिल्म को करने का प्रस्ताव रख दिया। नलिनी तो काम करना चाहती थी लेकिन वो अपने पिता की सोच और नजरिए से अच्छी तरह से वाकिफ थी। इसलिए नलिनी ने उनको अपने पिता से बात करने को कहा क्योंकि नलिनी के पिता तो सिनेमा के खिलाफ थे। लेकिन नलिनी जयवंत के परिवार की उस वक्त आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी और परिवार पैसों की कमी से गुजर रहा था। इसलिए नलिनी जयवंत के पिता के सामने चमनलाल ने एक अच्छी खासी बड़ी रकम रख दी और उनको काफी समझाने और बुझाने के बाद आखिरकार नलिनी को फिल्मों में काम करने की इजाजत मिल गई। मैं कोई बच्चा हूं अब की दिवाली में पूरे 15 बरस की हो जाऊंगी। हालांकि इस फिल्म से पहले नलिनी जयवंत कई नाटकों में काम कर चुकी थी। साल 1941 में नलिनी जयवंत के अभिनय से सजी फिल्म राधिका को लोगों के सामने प्रदर्शित किया गया। इस फिल्म की एक खास बात और थी कि इस फिल्म के 10 गानों में से सात गाने खुद नलनी ने गाए थे। खाए वो कैसे खिलाए वो कैसे खाए वो कैसे खिलाए वो कैसे और इस तरह से नलनी जयवंत ने राधिका फिल्म से अभिनय और संगीत की अच्छी शुरुआत की। नलिनी जयवंत की राधिका फिल्म के बाद उसी साल महबूब खान के निर्देशन में नलिनी जयवंत की एक और फिल्म बहन रिलीज हुई।

इस फिल्म में नलिनी जयवंत के बचपन का किरदार मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी ने निभाया। जिनको उस वक्त हिंदी सिनेमा में बेबी मीना के नाम से जाना पहचाना जाता था। इस फिल्म में नलिनी जयवंत ने अपने अभिनय से लोगों का दिल जीत लिया था और इस फिल्म में भी नलिनी जयवंत ने चार गीतों को अपनी आवाज दी थी। िया बहन फिल्म के बाद नलिनी जयवंत की वीरेंद्र देसाई के निर्देशन में बनी फिल्म निर्दोष और आंख में चोली आई और इन फिल्मों में भी नलनी ने अपनी आवाज में गीत गाए थे। मिचोली फिल्म उस दौर की बेहद सफल फिल्म साबित हुई। नंदिनी जयवंत को लोगों का खूब प्यार मिला और इस फिल्म की कामयाबी के साथ नंदिनी अब सफल अभिनेत्रियों की श्रेणी में आ चुकी थी। एक पकड़ मोरे मैया पकड़ मोरे मैया नलिनी चर्चित हो रही थी। कामयाबी के रास्ते पर थी और ऐसे में नलिनी के साथ ब्लैक एंड वाइट दुनिया के उस दौर के सभी अभिनेता और अभिनेत्री और फिल्म निर्माता निर्देशक साथ काम करने की कोशिश करने लगे। तेरे आगे बोलना दुखवार हो गया। हाय मुझे पै प्यार। नलिनी जयवंत जब फिल्म आंख निचोली कर रही थी तो वक्त फिल्म के निर्माता वीरेंद्र देसाई नलिनी जयवंत के आगे अपना दिल हार गए। वीरेंद्र देसाई वही है जो नलिनी जयवंत को हिंदी सिनेमा में लेकर आए।

नलिनी जयवंत जब कमसिन उम्र में थी तो वीरेंद्र देसाई और नलिनी एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। लेकिन इस रिश्ते में हैरान कर देने वाली बात यह थी कि वीरेंद्र देसाई पहले से ही शादीशुदा थे और बच्चों के पिता थे और नलिनी जयवंत से वह उम्र में काफी बड़े थे। नलिनी जयवंत और वीरेंद्र देसाई के इस प्रेम संबंध के खिलाफ और विरोध में समाज और परिवार के सदस्य दोनों ही खड़े थे। क्योंकि फिर उसके छीन जाने का डर होने लगता। अगर ये डर मैं दूर कर दूं तो। तुम्हें हंसते खेलते अपना सब कुछ लुटा दूं। लेकिन इन सबके बावजूद साल 1945 में इन दोनों ने सारी मर्यादाओं और सीमाओं को तोड़ते हुए किसी की भी परवाह किए बिना प्रेम विवाह कर लिया था। मुझे याद नहीं जिंदगी में इतनी खुशी पहले कब हुई थी। इस प्रेम विवाह और संबंधों के चलते वीरेंद्र देसाई के परिवार ने सख्त रुख अपनाया। इस विवाह को कभी ना अपनाने का फैसला सुना दिया और वीरेंद्र देसाई को सारी धन संपत्ति से हमेशा के लिए बेदखल कर दिया गया। रह के हमें रोना आया क्या कहिए। अब इन दोनों के पास ना तो कोई घर था ना ही कोई काम।

लिहाजा इन दोनों ने फिल्मस्तान स्टूडियो में ₹2000 प्रति महीने के हिसाब से एक कॉन्ट्रैक्ट को साइन करते हुए नौकरी कर ली। क्योंकि वीरेंद्र देसाई के पिता चमन लाल बड़े फिल्म निर्माता थे। लिहाजा उनके दबाव में नलिनी जयवंत और वीरेंद्र देसाई को 2 साल तक एक भी फिल्म नहीं मिली। जिसका नतीजा यह हुआ कि नलनी जयवंत और वीरेंद्र देसाई के बीच मनमुटाव और लड़ाई झगड़े होने लगे और घर में तनाव का माहौल पैदा हो गया। हे भगवान अगर ऐसा ही करना तो भलाया ही क्यों? वक्त गुजरा लेकिन इन दोनों के रिश्ते ठीक ना हो सके और साल 1948 में इन दोनों ने एक दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया और तलाक के रूप में अपनी मोहब्बत को खत्म कर दिया। आज तुम मेरी नजर में मेरे गंदे से गंदे गह से भी ज्यादा गए गुजरे हो। तुमने मुझे अपने प्यार का धोखा देकर अपना मतलब निकाला था। नलिनी जयवंत ने वीरेंद्र देसाई की पहली पत्नी का घर उजाड़ा था। लिहाजा नलिनी उनका घर उजाड़ कर अपना घर भी नहीं बसा पाई और यह अपनी जिंदगी में अकेले और तनहा रह गई। तुम्हें क्या पता मैंने क्या-क्या खोकर कितने दिनों तक मैंने आंसू बहाए हैं।

इस रिश्ते के टूटने के बाद नलिनी जयवंत की किस्मत ने एक बार फिर से कामयाबी के रास्ते पर कदम रखा और साल 1948 में नलिनी की उनके जीवन की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर एक फिल्म आई अनोखा प्यार जो इनके जीवन में एक मील का पत्थर साबित हुई। क्या इशारों को नहीं समझ सकते? पर वो मेरे इशारों को क्यों समझे? जब मेरी किस्मत ही खराब है तो उनका क्या दोष? इस फिल्म में नलिनी ने हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार दिलीप कुमार और मशहूर फिल्म अभिनेत्री नरगिस जी के साथ अभिनय किया था। इस फिल्म को दर्शकों ने दिल खोलकर प्यार दिया और जो नलिनी अभी तक शादी टूटने के दर्द से गुजर रही थी, उनकी जिंदगी बदल गई ।

इस फिल्म की कामयाबी के बाद। नलिनी जयवंत ने साल 1948 से लेकर साल 1950 के बीच अभिनेता दिलीप कुमार के अलावा अशोक कुमार, देवानंद, भारत भूषण और प्राण जैसे चर्चित और मंझे हुए सुपरस्टार्स के साथ काम किया। ये रूप की दौलत वाले कब सुनते हैं दिल के नाम। और इन्हीं कुछ अभिनेताओं के साथ नन्ही जयवंत ने गुंजन, टकोरी, आंखें, मुकद्दर, समाधि और संग्राम जैसी सफल फिल्में दी जिनको आज भी लोग खूब पसंद करते हैं। मुड़ के जो देख तो बचपन बुलाए, साल 1950 नलिनी जयवंत के जीवन का स्वर्णिम युग बना। नलिनी ने अभिनेता अशोक कुमार के साथ समाधि और संग्राम में मुख्य भूमिका में काम किया। यह दोनों ही फिल्म उस दौर की ब्लॉकबस्टर फिल्में साबित हुई।

दिल ही हुआ दीवाना अब होश जो आया तो दिल ही और इन दोनों ही फिल्मों को मिली अपार सफलता ने नलिनी जयवंत को टॉप एक्ट्रेस की लिस्ट में सबसे उच्च स्थान पर पहुंचा दिया था। रोजरोज़ मुलाकात अच्छी नहीं प्यार में ऐसी बात अच्छी नहीं। नलिनी और अशोक कुमार की जोड़ी को लोगों ने खूब पसंद किया। जिसके बाद अशोक कुमार और नलिनी की काफिला और मिस्टर एक्स जैसी सफल फिल्में लोगों को देखने को मिली। के पेड़ तले मिलेंग जवा। इन फिल्मों की कामयाबी ने इन दोनों की जोड़ी को उस दौर की सबसे सफल और लोकप्रिय जोड़ी के रूप में प्रसिद्ध कर दिया था। नलिनी जयवंत ने अशोक कुमार दिलीप कुमार के बाद सदाबहार अभिनेता देवांद के साथ फिल्म राही मुनीम जी काला पानी जैसी फिल्मों में काम करके अपने नाम को चार चांद लगाए तमन्ना देख और लोग नलनी जयवंत को फिल्मों की सफल होने की अब गारंटी मानने लगे थे। नलिनी जयवंत का फिल्मी सितारा सातवें आसमान पर चमक रहा था। नलिनी की फिल्मों की कामयाबी ने जहां बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कई पुराने रिकॉर्ड्स तोड़े तो कई नए रिकॉर्ड्स भी बनाए। नलिनी जयवंत के स्टारडम का यह आलम था कि उस वक्त की लगभग सभी मैगजीनंस में नलिनी के फोटोस और चर्चे होते थे।

नलिनी जयवंत की सुंदरता का चारों तरफ शोर था। साल 1952 में मशहूर सिनेमैगजीन फिल्म फेयर द्वारा आयोजित सबसे खूबसूरत सर्वे में आज तक की सबसे खूबसूरत सौंदर्य देवी कही जाने वाली मधुबाला को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान नलिनी ने प्राप्त किया था और इसके बाद तो नलिनी जयवंत के आगे पीछे अभिनेताओं और फिल्म निर्माताओं की एक लंबी कतार लग गई। हर कोई नलिनी को अपनी-अपनी फिल्म की हीरोइन बनाना चाहता था और अब नलिनी सबकी पहली पसंद बन चुकी थी। सागर में जिंदगी को उतारें। एक तरफ नलिनी का फिल्मी सफर उफान पर था तो वहीं फिल्म अभिनेता अशोक कुमार नलिनी के प्रेम में पड़ गए। इस प्रेम की खबर हर तरफ हो रही थी। कहा जाता है कि दोनों ही एक दूसरे के इतने करीब आ गए थे कि दोनों हिंदुस्तान को छोड़कर शादी करने के लिए नेपाल जाने वाले थे। लेकिन इसी बीच अशोक के करीबी कहे जाने वाले फिल्म निर्माता निर्देशक शशिधर मुखर्जी को सब कुछ पता चल गया और उन्होंने इस शादी को रुकवा दिया। कि तुम अपने और मेरे प्रेम की इज्जत करके मेरे साथ चलोगे। अब तुम किस मुझसे प्रेम की इज्जत का दावा करते हो? कांता तुम मेरी थी। Lऐसी बातें करते तुम्हें शर्म नहीं आती? साल 1951 से लेकर साल 1960 के बीच नलिनी जयवंत की लगभग 41 फिल्में रिलीज हुई और इन्हीं 41 फिल्मों में से अधिकतर में इन्होंने मुख्य भूमिका में काम किया और लगभग सभी फिल्में सफल फिल्में साबित हुई और इन्हीं सफल फिल्मों में नलिनी ने कुछ गीतों को अपनी आवाज भी दी थी।

नलिनी फिल्मों के अलावा अपनी असल जिंदगी में बेहद बोल्ड अभिनेत्री रही। खूबसूरती में मधुबाला को पीछे छोड़ने के बाद साल 1951 में नलिनी ने वो कर दिखाया उस वक्त के हिसाब से जो बेहद सराहनीय कदम रहा। नलिनी ने लाइफ मैगजीन के लिए जेम्सबर्ग के द्वारा मुंबई के जूहू बीच पर बिकनी में बेहद बोल्ड फोटो शूट करा डाला और जब यह फोटोस लोगों ने देखे तो सभी हैरान रह गए क्योंकि यह बोल्ड फोटोशूट उस वक्त कराया गया था जब हिंदुस्तान ने आजादी का स्वाद चखा था और हिंदुस्तान की महिलाओं को घूंघट से बाहर आने की मनाही होती थी और ऐसे में नलिनी जयवंत ने उन सभी महिलाओं की बंदिशों को तोड़कर महिलाओं के लिए नई मिसाल पैदा की। नलिनी की लोकप्रियता तो हर तरफ से उन्हें मिल रही थी लेकिन नहीं मिला तो वो था सच्चा प्यार जिसके लिए वह हमेशा तरसती ही रहीं। नलिनी जयवंत साल 1961 में एक फिल्म कर रही थी जिसका नाम था अमर रहे यह प्यार। इस फिल्म को अपने जमाने के मशहूर चरित्र अभिनेता राधाकिशन मेहरा ने किया था।

इस फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी राधाकिशन मेहरा ने अपने करीबी दोस्त प्रभु दयाल को सौंपी थी और प्रभु दयाल नलिनी जयवंत के साथ फिल्म मुनीम जी में काम कर चुके थे। इस फिल्म के समय प्रभु दयाल और नलिनी जयवंत एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। इन दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी और दोनों आगे चलकर शादी करने का फैसला करते हैं। नलिनी जयवंत ने इस बार बहुत सोच विचार करके दूसरी शादी कर ली थी। शादी के बाद नलिनी की अमर रहे यह प्यार फिल्म रिलीज हुई। लेकिन यह फिल्म एक फ्लॉप फिल्म साबित हुई। इस फिल्म को बनाने में राधाकिशन मेहरा ने अपनी पाईपाई लगा दी थी। लिहाजा फिल्म फ्लॉप हो जाने से उनको बहुत बड़ा नुकसान हुआ।

जिसका नतीजा यह हुआ कि राधाकिशन मेहरा इस दर्द को झेल नहीं पाए और छत से कूद कर अपनी जिंदगी को समाप्त कर दिया। हरियाली को बर्बाद करने के लिए तो पाला ही काफी था। तूने यह बिजली क्यों गिरा दी? राधाकृष्ण मेहरा के इस कदम से नलिनी जयवंत और प्रभु दयाल को काफी दुख हुआ था। खैर, समय गुजरा और अब शादी के बाद नलिनी जयवंत फिल्मों में कम दिखाई देने लगी। साल 1965 में उनकी फिल्म बॉम्बे रेस कोर्स रिलीज़ हुई और इस फिल्म के बाद ही नलिनी जयवंत हिंदी फिल्मों से दूर हो गई और अपने घर गृहस्ती में लग गई। नलिनी जयवंत ने यूं तो हिंदी फिल्मों में सभी तरह का अभिनय किया था लेकिन उनकी एक फिल्म देवानंद के साथ आई थी काला पानी। दिल लेके दगा देते हैं। एक रोग लगा देते हैं। इस फिल्म में जो किरदार नलिनी जयवंत ने निभाया था उसके लिए इनकी साल 1959 में फिल्मफेयर अवार्ड की तरफ से सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के तौर पर फिल्मफेयर अवार्ड से इन्हें सम्मानित किया गया।

जब नलिनी जयवंत घर गृहस्ती में लीन हुई तो लोगों को लगा कि अब नलिनी जयवंत कभी दिखाई नहीं देंगी। लेकिन एक लंबे अंतराल के बाद लगभग 18 साल बाद नलिनी जयवंत ने एक बार फिर से फिल्मों में वापसी की और साल 1983 में अमिताभ बच्चन की फिल्म नास्तिक में मुझे अमिताभ बच्चन की अंधी मां के किरदार में नजर आई। मेरा बेटा कभी मेरा सर नहीं झुकने देगा। वो औलाद किस काम की जिसकी मां चोर की मां कही जाए। हालांकि इस फिल्म के बाद नलिनी जयवंत चरित्र भूमिका और नहीं कर पाई क्योंकि उनको यह भूमिका रास नहीं आई थी और इस फिल्म के बाद अब नलिनी पूरी तरह से हिंदी सिनेमा में एकदम गायब हो गई और किसी ने भी नलिनी जयवंत को नहीं देखा। लेकिन 22 साल के बाद नलिनी एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई। जब 30 अप्रैल साल 2005 को मुंबई की जानीमानी संस्था दादा साहेब फाल्के अकाडमी ने फाल्के साहिब की 136वीं जयंती पर आयोजित समारोह में नलिनी जयवंत को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।

इस अवार्ड को लेने के बाद लोगों ने नलिनी को आखिरी बार यहीं देखा था। इसके बाद नलिनी फिर से लोगों की आंखों से ओझल हो गई। नलिनी जयवंत का फिल्मी सफर बेहद शानदार और यादगार रहा। लेकिन नलिनी की पर्सनल लाइफ बहुत दुख दर्द के साथ गुजरी। नलिनी जयवंत की दो-दो शादी हुई थी। लेकिन नलिनी को इन दोनों ही शादियों से कोई भी संतान का सुख नहीं मिला था। नलिनी जयवंत जिंदगी भर बेऔलाद के दुख दर्द से जूझती रही। नलिनी ने ना जाने ऐसा क्या किया था कि उनको भगवान ने यह दर्द दे दिया। नलिनी जयवंत के दुख कभी कम नहीं हुए। मैं जिंदा रहना नहीं चाहती। नलिनी जयवंत के दूसरे पति प्रभु दयाल भी अब इस दुनिया में नहीं रहे।

पति की निधन ने नलनी जयवंत की बची कुची जिंदगी को भी पूरी तरह से अंधकार के सागर और तकलीफों में धकेल दिया था। भगवान से मेरी मौत के लिए प्रार्थना करो। नलिनी जयवंत मुंबई के चेंबूर स्थित यूनियन पार्क में अपने 60 साल पुराने बेहद आलीशान बंगले में रहती थी। यह बंगला खुद नलिनी जयवंत ने खरीदा था। इस बंगले में नलिनी अकेले थी। नलिनी जयवंत के साथ उनके तीन कुत्ते भी रहा करते थे। जिनको नलिनी ने सड़क से उठाकर अपने घर में रखा था। नलिनी जयवंत के दूसरे पति की निधन के बाद नलिनी ने बाहरी दुनिया से अपने आप को बिल्कुल अलग कर लिया था। वो अपने पड़ोसियों से भी कोई ताल्लुकात नहीं रखती थी। बस अकेले-अकेले जीवन की तकलीफों और दर्द को झेल रही थी।

नलिनी जयवंत ने अपने आप को उस बंगले में कैद कर लिया था। समय गुजरा और एक दिन नलिनी जयवंत के घर के बाहर शोर मचाती एक एंबुलेंस आई तो लोगों को पता चला कि महान खूबसूरत लोगों की चहेती नलिनी अब इस दुनिया में नहीं रही। बताया जाता है कि नलिनी जयवंत की मौत 22 दिसंबर साल 2010 को हो गई थी।

यह कितना दुखद और हैरान कर देने वाली बात है कि वो नलिनी जयवंत जिसको देखने के लिए लोग पागल रहते थे। उनके दीवाने थे। वह नलिनी जयवंत तीन दिन से अपने घर में ही पड़ी रही और उनका शरीर सड़ चुका था। कीड़े पड़ चुके थे। इतने भयाभय मंजर ने सभी के होश उड़ा दिए। जिसने भी नलिनी जयवंत की यह दशा देखी तो आंखों से उसके आंसू निकल पड़े। किसी को यकीन नहीं हुआ कि यह महान अभिनेत्री आज हमेशा हमेशा के लिए अपना मुंह मोड़कर इस दुनिया से दुख दर्द के साथ अलविदा हो गई है। नलिनी जयवंत की निधन की खबर तो सभी तरफ आग की तरह फैल गई। लेकिन नलिनी जयवंत का अंतिम संस्कार कहां हुआ? किसने किया और उनके शरीर को कौन लेकर गया? इसको लेकर सिर्फ कुछ अनुमान ही लगाए जा रहे हैं। उनके अंतिम संस्कार कब हुए? कहां हुए? किसने किए? यह किसी को पता नहीं।

कुछ लोगों का मानना था कि नलिनी जयवंत के पार्थिव शरीर को उनके एक दूर का रिश्तेदार हॉस्पिटल में क्लेम करने के लिए लेकर गया था। क्योंकि नलिनी जयवंत दुनिया से दूर हो गई थी, उनका कोई भी रिश्तेदार पास नहीं था। इसलिए नलिनी जयवंत की मौत को लेकर जो अंदेशा जताया जा रहा था उसको पुलिस तक ले जाने की किसी ने कोई भी कोशिश नहीं की। देर ना करना कहीं सांस टूट जाए सांस छूट जाए। नलिनी जयवंत देखा जाए तो तनुजा और काजोल के रिश्तेदार थी। लेकिन यह कितनी हैरानी की बात है कि ना तो काजोल ना ही उनकी मां तनुजा ने नलिनी जयवंत के बारे में कुछ जानने की कोशिश की। नलिनी जयवंत की निधन के बाद मीडिया में बहुत कुछ ऐसा छपा जो शायद सभी को हैरान कर गया।

कुछ लोगों ने कहा कि नलिनी अपने अंतिम समय में एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गई थी और तनहाई में उनकी इलाज के अभाव में मौत हो गई। वहीं नलिनी जयवंत की मौत कैसे हुई? क्यों हुई? किसी ने भी जानने की जहमत नहीं की। बताया जाता है कि नलिनी जयवंत के आखिरी दिनों में उनके पास उनके वही कुत्ते थे जिनको वो सड़क से उठाकर लाई थी और उन्हीं कुत्तों की वजह से नलिनी की मौत का पता चला था। नलिनी जयवंत को लोग छोड़कर जा चुके थे। लेकिन उनके बेजुबान वफादार कुत्तों ने उनका अंतिम समय तक साथ निभाया था। हाय रे हाय दुश्मन हुआ जमाना। दोस्तों, यह कितना बड़ा दुर्भाग्य था नलनी जयवंत का कि लाखों करोड़ों चाहने वालों की भीड़ में नलनी जिंदगी भर अकेले और तन्हा रही। दुख दर्द ने कभी उनका दामन नहीं छोड़ा और जब अंत हुआ तो इतना भयानक हुआ। यह वही नलिनी जयवंत थी जिनको सौंदर्य की देवी मधुबाला से भी खूबसूरत माना गया। और वहीं नलिनी आज इतनी बदसूरती के साथ दुनिया से अलविदा हो गई।

नलिनी जयवंत की मौत हमेशा एक पहेली रहेगी जिनके जवाब शायद ही कभी मिल पाएंगे। अरे भगवान मुझे इतना क्यों? मैंने क्या किया था? दोस्तों आज भले ही नलिनी जयवंत हमारे बीच जिंदा नहीं है। लेकिन नलिनी जयवंत की फिल्में हमेशा उनकी याद दिलाती रहेंगी। युग बदलेगा लोग बदलेंगे और बदलेगा हिंदी सिनेमा लेकिन नहीं बदलेगी तो नलनी जयवंत की शानदार अभिनय की किताब जिसको दुनिया हिंदी सिनेमा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में याद करेगी। बॉलीवुड नवेल नलनी जयवंत जैसी महान अभिनेत्री को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

Leave a Comment