वैलेंटाइंस डे नजदीक है। इसलिए मुझे लगा कि आप लोगों तक यह प्रेम संबंधों की एक नई अजब गजब कहानी पहुंचाना बड़ा जरूरी हो जाता है। साहित्य समाज का आईना होता है और इन्हीं साहित्यों पर बनती हैं फिल्म्स और फिल्मों का समाज पर पड़ता है सीधा असर।
एक दूसरे से सभी जुड़े हुए हैं। और जो कहानी भोपाल से सामने आई उसे देखकर यह समझना मुश्किल है कि फिल्म देखकर ऐसा हुआ या यह कोई फिल्मी स्टोरी से मिलती जुलती घटना है। अगर मिलती भी है तो मात्र एक संयोग होगा। पतिप का रिश्ता जो बहुत ही नाजुक विश्वास और भरोसे की डोर से बंधा होता है।
उसमें कभी-कभी ऐसे मोड़ आ जाते हैं जिससे हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या इसमें बात विश्वास और भरोसे से आगे जा चुकी है। भोपाल में जो हुआ आपको जानना चाहिए। हालांकि आप यह अपने विवेक से तय कीजिएगा कि वहां क्या भरोसा या विश्वास क्या उसके पीछे कारण रहा, लालच कारण रहा, विश्वासघात कारण रहा। आगे आप समझ पाएंगे।
दरअसल एक दंपत्ति जिनका जीवन बड़ा सामान्य चल रहा था। दो प्यारे बच्चे और 10-15 साल से ज्यादा शादी को भी हो गए थे। लेकिन इसमें एक दिलचस्प मोड़ उस वक्त आया जब पत्नी को यह पता चला कि उसके पति का उसी के दफ्तर में काम करने वाली एक महिला अधिकारी से प्रेम प्रसंग चल रहा है। अब स्वाभाविक है आमतौर पर कोई भी महिला कोई भी पत्नी ये स्वीकार नहीं करेगी कि उसका पति किसी और महिला से कोई संबंध रखे।
अब यहां भी उस पत्नी ने उसी तरह से रिएक्ट किया जैसे कोई भी काम महिला रिएक्ट करती है। पत्नी ने अपने पति को रोका, समझाने की कोशिश की। कई तरह की काउंसलिंग हुई लेकिन वो नहीं माना। किसी और महिला के साथ संबंधों की बात जब पत्नी के सामने आई तो वो इस बात से काफी परेशान भी रहने लगी। लेकिन यहां दिलचस्पी इसलिए और बढ़ जाती है जब पता यह चला कि पत्नी पति को छोड़ने और उसे उसकी प्रेमिका के साथ जाने के लिए भी तैयार है। जाने देने के लिए वह पूरा एक्सेस देने को भी तैयार है। और पत्नी को इस बात से कोई दिक्कत नहीं होगी। बाद में सवाल यह कौन रहा था कि आखिर जो महिला विरोध कर रही थी वह अचानक तैयार कैसे हो गई? अब आपको पूरा मैटर समझाते हैं।
दरअसल पत्नी को इस बात से तब कोई दिक्कत नहीं होगी जब वो इसकी कीमत चुकाने को तैयार होगा। यह शर्त उसने अपने पति के सामने रखी। अधेड़ उम्र की इस प्रेम कहानी में रोमांस है, सस्पेंस है, ड्रामा है और फिर जुदाई। जहां भोपाल में कुटुंब न्यायालय में कार्यरत एक 42 वर्षीय कर्मचारी जिसकी उसी के दफ्तर में काम करने वाली उससे 10 साल उम्र बड़ी यानी लगभग 52 वर्षीय एक अधिकारी पर दिल आ गया और दोनों की रजाबंदी से दोनों रिश्ते में भी आ गए। पत्नी को ऐतराज था तो उसने ऐतराज कई बार किया। उस अधेड़ प्रेमी जोड़े की काउंसलिंग करवाई गई। लेकिन दोनों का प्रेम इतना सच्चा था कि वह एक दूसरे को छोड़ने तक को तैयार नहीं थे। पति की इस हरकत से आज ही जाकर के महिला ने सारा हिसाब लगाया, गणित बिठाया और पति के सामने यह शर्त रख दी।
शर्त थी कि अगर पति उसे और उसकी बेटियों को उसके भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए एक मकान और जीवन यापन करने के लिए एक मु्त कैश दे दे तो वो उनके बीच से हट जाएगी। केंद्रीय अधिकारी होने के नाते प्रेमिका महिला के पास भी पैसों की कोई कमी नहीं थी।
अब पति के पास तो पैसे थे नहीं। तो प्रेमिका ने अपने प्यार को खरीदना तय किया। डुप्लेक्स मकान दिया गया और ₹27 लाख कैश में यानी कुल लगभग ₹1.5 करोड़ में सौदा तय हुआ। पत्नी जो यह देख चुकी थी कि उसका पति अब वापस लौटने वाला नहीं है।
तो क्यों ना बच्चों के भविष्य को ही सुरक्षित कर लिया जाए और बच्चों के भविष्य के बदले सुहाग का बलिदान कर दिया जाए। प्रेमिका महिला जिसने अपने जीवन भर की कमाई अपने प्यार को खरीदने में लगा दी। अब दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से सब तय हो गया है।
पत्नी और बच्चों के लिए करीब ₹1.5 करोड़ जिसमें ₹27 लाख कैश शामिल है। महिला अधिकारी ने उसे दे दिए और अब पतिपत्नी अलग हो चुके हैं और एक नई प्रेम कहानी परवान चढ़ रही है।
