अह डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस फाइल्स हैं। एस्टीम पे हरदीप पुरी का नाम उसमें है। अनिल अंबानी का नाम उसमें है। स्पष्ट रूप से हरदीप पुरी के इस्तीफे की मांग कांग्रेस पार्टी कर रही है। इस्तीफा दो इस्तीफा दो इस्तीफा दो। में क्या कर रहे हैं। मोदी सरकार में मंत्री हरदीप सिंह पुरी का इस्तीफा तय है क्या? विपक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। कांग्रेस ने कह दिया है कि पूरी तो बस कठपुतली है। स्टीम फाइल्स में तो पूरी मोदी सरकार फंसी है।
पूरी का नाम तो बहुत पहले सामने आ गया था। पर चारों तरफ सन्नाटा था। कौन नाम ले? राहुल गांधी ने यह दुखती रथ छेड़ दी। वो भी संसद में। उसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गई। इस विवाद में जिनके नाम आ रहे हैं, दुनिया भर में उनके इस्तीफे होने लगे हैं। भारत में ऐसी बातें हो रही हैं कि जो सरकार के लिए जी का जंजाल बन सकती है। कांग्रेस ने कह ही दिया है कि वे यह मुद्दा घर-घर ले जाएंगे। राजधानी में आज बात एफstम फाइल से मोदी सरकार की बढ़ती मुसीबत और हरदीप पुरी की कुर्सी पर मंडराते खतरे की। नमस्कार, मैं हूं पंकज झा। राजधानी बेसन राजधानी बेसन स्वाद के लिए कुछ भी करेगा।
आज संसद की कारवाई शुरू होती उससे पहले ही विपक्षी सदस्यों ने मोर्चा संभाल लिया। हरदीप पुरी इस्तीफा दो। हरदीप पुरी इस्तीफा दो। दलाल इस्तीफा दो। इस्तीफा दो। क्या है? में क्या कर रहा है? दो। का दलाल इस्तीफा दो। इस्तीफा दो। पूरी जवाब दो। जवाब दो जवाब दो। पूरी जवाब दो जवाब दो जवाब दो संसद के बजट सत्र का पहला हिस्सा आज पूरा हो गया लेकिन कांग्रेस ने अब तैयारी संसद से लेकर सड़क तक की कर ली है मोदी जी के बारे में जो एक नाराज से उनका करियर शुरू किया इन्होंने दिल्ली का करियर घर-घर मोदी लेकिन आप फॉरेन पॉलिसी देखिए आप ट्रेड डील देखिए आप ऑपरेशन सिंदूर की परिस्थितियां देखिए सीज की तो जो चीज जो वाकया डर हर हर मोदी से शुरू हुआ घरघर मोदी से शुरू हुआ वो थरथर मोदी है तनाव है आंखों में भय है डर है मोदी जी क्यों डरते हैं.
आप हरदीप पुरी तो चलिए आप हटा भी देंगे इनको जाहिर सी बात है संसद का यह सत्र जवाब कम सवाल ज्यादा छोड़ गया है। सवाल सरकार के सामने बड़ा है कि बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत से पहले मोदी सरकार के एक मंत्री हरदीप सिंह पुरी का विकेट गिरेगा क्या?
राहुल गांधी ने संसद में उनके एब्सस्टीन कनेक्शन का जिक्र कर दिया था। वह भी बड़े महीन तरीके से। एफस्टीन शब्द जैसे ही राहुल की जुबान से निकला, सत्ता पक्ष अलर्ट मोड में आ गया। चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने राहुल को एफस्टीन से किसी का नाम संसद में ना जोड़ने को कहा और उन्हें टोका भी कई बार पर राहुल ने नाम तो ले ही लिया अनिल अंबानी और हरदीप पुरी का। यह कहते हुए भी कि मैं इनका नाम नहीं ले रहा। आई विल नॉट से द नेम एपस्टीन एंड आई विल नॉट से द नेम अनिल अंबानी एंड आई विल नॉट से द नेम। नहीं आई विल नॉट से सर।
देयर इज अ देयर इज अ बिज़नेसमैन कॉल्ड मिस्टर अनिल अंबानी। आई वांट टू आस्क द क्वेश्चन, व्हाई इज ही नॉट इन जेल? द रीज़न ही इज़ नॉट इन जेल इज़ बिकॉज़ हिज़ नेम इज़ इन द एफसीन फाइल्स। एक एक तो एक तो दैट वाइज नॉट इन जेल। राहुल जी, जो भी आई आल्सो लाइक टू आस्क मिस्टर हरदीप पुरी हु इंट्रोड्यूस हिम। मिस्टर चेयर टू एफस्टीन। मिस्टर राहुल राहुल ने साफ और सीधा कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एफस्टीन फाइल्स की वजह से डरे हुए हैं। और इसी कारण अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सरेंडर कर दिया है। सरकार के लिए मुसीबत खड़ी हो गई। आननफानन में हरदीप पुरी मीडिया के सामने अपना पक्ष रखने आए।
बोले आप हमें एस्टीन से दो एक मुलाकातों पर दोषी नहीं ठहरा सकते। द एस्टाइन फाइल्स द युवा नेता शुड नो आर अबाउट रोंग डूइंग क्रिमिनल ऑफेंसेस। द एप्स्टाइन फाइल्स आर अबाउट चार्जेस दैट ही हैड एन आइलैंड वेयर ही टू टेक पीपल टू इडल्ज इन इंडल्ज सेक्सुअल फैंटसी। चार्जेस ऑफ पीडोफिलिया एंड देयर आर विक्टिम्स ऑफ दिस। दोस विक्टिम्स हैव ब्रॉट केसेस अगेंस्ट द पीपल इन अथॉरिटी। माय इंटरेक्शन इस नथिंग टू डू विथ दैट। हरदीप पुरी को लगा था कि उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस से इस विवाद का पटाक्षेप यानी द एंड हो जाएगा। लेकिन पीसी के बाद उनकी मुसीबत और बढ़ गई। उनके एक-एक शब्द का कांग्रेस पोस्टमार्टम कर रही है।
पीड़िताओं को अंडर एज वुमेन कहना और एस्टीन से संबंधों पर सफाई देने को कांग्रेस ने पकड़ लिया है। कहते हैं कि हम में से कुछ को एस्टीन के क्रिमिनल रिकॉर्ड पर शक था। कि वो क्रिमिनल है या नहीं है। इस पर भी हरदीप पुरी कहते हैं कि हम में से कुछ लोगों को इस बात पर भी शक था कि एस्टीन क्रिमिनल है या नहीं। यह एफस्टीन ने खुद 2008 में फ्लोरिडा के कोर्ट में अपना गुनाह कबूल लिया था। सजा हो गई थी। तो क्या हरदीप पुरी जी भगवान खुद आकर आपको कहें कि हरदीप पुरी जी यह एस्टीन क्रिमिनल है या मोदी जी आकर कहे मोदी जी इनके भगवान हैं। कौन कहे तो आप मानेंगे। जब वह खुद कह रहा है कि हां मैंने यह क्राइम किया। हरदीप सिंह पुरी 2017 से ही मोदी सरकार में मंत्री हैं। पर शायद ही आपने उनको टीवी पर कभी इस तरह इंटरव्यू देते देखा होगा जैसे इन दिनों वे छाए हुए हैं। सफाई पर सफाई दी जा रही है।
2014 2015 में एफस्टीन से ईमेल पर उनकी बातचीत हुई जिसे लेकर पूरी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अपने ईमेल में वे एग्जॉटिक आइलैंड हैव फन जैसे शब्दों का जिक्र करते हैं। जिसका टीएमसी सांसद महुआ मोहत्रा से लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने चीरफाड़ कर दिया। किस हैसियत से हरदीप सिंह पुरी एफस्टीन से भारत सरकार से जुड़ी चीजों पर बात कर रहे थे? कांग्रेस ने ऐसी कई बातें गिनाई हैं। 13 नवंबर 2014 को रीड हॉफमैन को एपस्टीन ने एक मेल भेजा। जिसमें वो डिजिटल इंडिया के बारे में जानकारी दे रहे थे। तारीख याद रखना 13 नवंबर 2014 डिजिटल इंडिया शुरू कब हुआ? अनाउंस कब हुआ? वह डेट भी देख लीजिए जरा। डिजिटल इंडिया जुलाई 2015 में शुरू हुआ। यानी कि एस्टीन को भारत के नागरिकों से पहले डिजिटल इंडिया की जानकारी हमारे बाबू हरदीप पुरी दे रहे थे। देख रहे हैं आप? हम और आप इस गलतफहमी में हैं कि इस देश की सरकार को एक माई का लाल चला रहा है। इस देश की सरकार को एक दलाल चला रहा था अमेरिका में बैठकर। उस दलाल को पहले बताया जा रहा था कि डिजिटल इंडिया आ रहा है। कांग्रेस पार्टी ने 1 फरवरी को ही एफस्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाया था। जिसमें अनिल अंबानी और जेफरी एस्टीन के बीच 16 मार्च 2017 को भी बातचीत का स्क्रीनशॉट था।
जिसमें अनिल अंबानी ट्रंप और मोदी की मुलाकात के लिए एफस्टीन की मदद मांगते दिख रहे हैं। कांग्रेस सवाल कर रही है कि प्रधानमंत्री का विदेशी दौरा क्या एस्टीन की सलाह पर होता है? वो एफस्टीन जो मानव तस्करी नाबालिगों के यौन शोषण और बलात्कार का दोषी था। आज की तारीख में कहानी यह है कि मोदी सरकार एस्टीन फाइल्स के मसले को सिर्फ हरदीप सिंह पुरी तक ही रखना चाहती है। मोदी सरकार का कोई और मंत्री या फिर सांसद अब तक पूरी की तरफ से मीडिया में बैटिंग करता नजर नहीं आया। पुरी साहब को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया है। पर कांग्रेस खासकर राहुल गांधी कहां छोड़ने वाले? वे पुरी के बॉस पीएम मोदी को भी इस लपेटे में लेने की रणनीति पर हैं। वैसे भी एफस्टीन फाइल्स के खुलासों पर दुनिया भर में कोहराम मचा हुआ है। आज अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओवा के समय वाइट हाउस के मुख्य वकील रही कैथी रोमलेड ने गोल्डमैन सेक्स में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ब्रिटेन की सत्ताधारी लेबर पार्टी से इस्तीफे हो रहे हैं। सरकार गिरने तक की आशंका वहां जताई जा रही है। ब्रिटिश राज परिवार पहले ही शर्मिंदगीगी झेल रहा है।
एस्टीन फाइल्स में नाम आने की वजह से बिल गेट्स, नोम चमस्की, स्टीफन हॉकिंग जैसे सम्मानित लोगों की जिंदगी पर सवाल खड़ा हो गया है। अब मोदी सरकार इन फाइल्स की आंच में और जलेगी या फिर हरदीप सिंह पुरी की बलि लेकर मामले को कंट्रोल कर लिया जाएगा। कांग्रेस सरकार को थोड़ा भी मौका देगी क्या या फिर राहुल की बात घर-घर पहुंचाकर मोदी सरकार की कहानी और उलझने वाली है? बताइएगा जरूर कमेंट बॉक्स में।
