विमान हादसे पर मुंह बंद रखने के लिए एयर इंडिया दे रही है 20 लाख।

हुआ। यानी कि पायलट ने वो जो स्विच था उस स्विच को मैनुअली बंद किया। इस तरीके की बात जो है वह सामने आई कि यह जो कंपनी है एयर इंडिया वो केस को छोड़ने के लिए 10 20 लाख का ऑफर कर रही है। यानी कि आप 10 लाख लीजिए, 20 लाख लीजिए। लेकिन आप अपने परिजन की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है?

यह भूल जाइए। किसकी वजह से मर गए यह मत पूछिए। बस आप पैसा लीजिए और अपना मुंह बंद कर लीजिए। हमारे देश में लोगों की जान की कीमत ढेला बराबर हैआपकी जान चली जाएगी लेकिन आपको यह तक नहीं बताया जाएगा कि किनकी गलती और किनकी लापरवाहियों की वजह से आपकी जान गई। अहमदाबाद विमान हादसा कैसे हुआ? क्यों हुआ? इसकी जांच अभी चल रही है। लेकिन अखबार में इस बात की पुष्टि की गई है कि यह विमान हादसा पायलट ने जानबूझकर फ्यूल टैंक बंद कर दिया था।

उसकी वजह से हुआ। यानी कि पायलट ने जानबूझकर पूरे होशोवास में अपनी समझदारी से जो फ्यूल टैंक बंद किया था उसकी वजह से अहमदाबाद विमान हादसा हुआ। आप सभी को याद होगा कि यह विमान हादसा कितना खतरनाक था जिसमें 250 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। एक हॉस्टल पर यह विमान जाकर गिरा था और उसके बाद एक विभत्स तस्वीर सामने आई थी।

अहमदाबाद का यह विमान हादसा लोगों के जेहन में डर पैदा कर दिया था। जब भी लोग विमान का सफर करते थे उन्हें इस हादसे की तस्वीरें याद आती थी। वो तमाम लोग जिनके अपने जिनके परिजन अब इस दुनिया में नहीं है। वो यह जानना चाहते थे कि यह विमान हादसा क्यों हुआ? कौन सी तकनीकी कारण की वजह से हुआ? क्या इंजन फेल हो गया? किन कारणों की वजह से हुआ? वो कारण वो क्यों हुआ यह जानना हर उस परिजन के लिए जरूरी था जो इस विमान हादसे का शिकार हो गया था। लेकिन अभी जो है इटली की एक अखबार में इस खबर को प्रकाशित किया गया है कि पायलटों ने लगभग पक्का या जानबूझकर उन्होंने फ्यूल स्विच बंद किया था जिसकी वजह से यह विमान हादसा हुआ। अहमदाबाद विमान हादसा जब हुआ तब हमने इस पर तमाम कवरेज की थी।

हमने यह बात पहले ही अंदे से बता दी थी। लगभग ऐसा होगा। यह हमने अंदाजा लगा लिया था क्योंकि हमने आपको बताया था कि बोइंग इंजन जो है वह कंपनी करोड़ों में खेलती है। उसकी जो नेटवर्थ है वो करोड़ों की है। इसके अलावा जो एयरलाइंस बनाने वाली जो तमाम कंपनियां हैं जिन विदेश से ये इस एयरलाइन के पार्ट्स वगैरह आते हैं वो भी इसकी जिम्मेदारी नहीं लेने वाली हैं।

तो कहीं ना कहीं यह जो विमान हादसा है उसकी जिम्मेदारी पायलट के कंधे पर ही आएगी। क्योंकि पायलट आकर बता तो पाएगा नहीं। वो तो जिंदा ही नहीं बचा है कि बता पाएगा कि जो उस पर लादा जा रहा है, जो उस पर बोला जा रहा है, वह सब कुछ सच है। आप सभी को पता है कि यह विमान हादसा जो हुआ वो कुछ चंद सेकंड में हो गया। यह विमान हादसा विमान टेक ऑफ करता है और कुछ दूर ही जा पाता है। तभी जो है विमान नीचे की तरफ आने लगता है और यह विमान हादसा हो जाता है। मैंने इस पर बहुत सारी खबरें की हैं। आप भी इस विमान हादसे की पल-पल अपडेट जानते हैं कि विमान हादसा कितना खतरनाक था। लेकिन इस विमान हादसे के लिए पायलट को जिम्मेदार ठहरा देना यह कितना सही है। क्योंकि पायलट तो अपनी साक्ष देने के लिए आएंगे ही नहीं। वह बता ही नहीं पाएंगे कि जिस तरीके के आरोप उन पर मड़े जा रहे हैं, वह सच है या नहीं। लेकिन इटली की इस अखबार ने इस बात को प्रकाशित किया कि एयर इंडिया की 171 वाली जो विमान है, उसके पायलट की वजह से ही विमान जो है वह हादसे का शिकार हुआ।

इटली की यह जो अखबार है कोरियर डेला सेरा यह जो अखबार है उसने ही इस चीज को प्रकाशित करते हुए अपनी इस रिपोर्ट में यह बताया कि जो पश्चिमी विमान एजेंसी है सूत्रों के हवाले से यह बताया कि वह अपनी जांच में इस बात का खुलासा कर सकते हैं। अपनी जांचकर्ता में फाइनल रिपोर्ट यही पेश करेंगे कि पायलट ने लगभग पक्का या जानबूझकर फ्यूल स्विच जो है वह बंद किया। इस विमान को उड़ाने वाले दोनों पायलट कितने धुरंधर थे। कितने कितना लंबा इनका फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। यह सब आपको पता है। आपको पता है कि यह दोनों पायलट अपने इस प्रतिभा में माहिर थे। उनके पास लंबा फ्लाइंग एक्सपीरियंस था। सुमित संभ्रवाल और कुंदन ये जो दोनों पायलट थे इन दोनों का एक्सपीरियंस लंबा था। लेकिन इसके बावजूद भी यह कहा जा रहा है कि एक पायलट ने फ्यूल स्विच बंद कर दिया। जिसकी वजह से विमान के जो इंजन थे उनको फ्यूल नहीं मिल पाया और वह उड़ाई नहीं कर पाए। वह ऊंचाई पर नहीं जा पाए। पहले एक इंजन बंद हुआ फिर दूसरा इंजन बंद हुआ क्योंकि इंजन को फ्यूल नहीं मिल पा रहा था। अब इटली की इस अखबार ने जो बात प्रकाशित की है वो बात जो ऑडियो रिकॉर्ड हुई थी उस आधार पर कहा गया है। कॉक्रीट के वायर रिकॉर्डिंग में इस बात की पुष्टि भी हुई थी और जांच में यह बात सामने भी आ रही थी कि एक फ्लाइंग ऑफिसर ने दूसरे फ्लाइंग ऑफिसर से ये बात पूछी थी कि क्या तुमने इंजन बंद कर दिया है? तो दूसरे फ्लाइंग ऑफिसर ने यह जवाब दिया था कि नहीं मैंने ऐसा नहीं किया है। यह जो वायरलेस पर यह जो बात रिकॉर्ड हुई थी इसी के आधार पर इटली की इस अखबार ने इस बात को प्रकाशित किया है कि यह बात आगे जाकर जांच में सामने आएगी। पायलट को ही जिम्मेदारी दी जाएगी कि उन्होंने जो है वो फ्यूल स्विच बंद कर दिया था जिससे यह विमान हादसा हुआ। हालांकि इस पूरे दावे पर भारत का जो विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो है एएआईबी उसने अभी तक इस पर कोई भी जो है वह पुष्टि नहीं की है और हमारा नागरिक उद्यान मंत्रालय जो है उसने भी अभी तक कोई भी रिएक्शन इस मामले में नहीं दिया है इटली की यह जो अखबार में यह जो आर्टिकल प्रकाशित हुआ तो क्या पायलट को मोहरा बनाया जा रहा है? कोई भी कंपनी, कोई भी बड़ी कंपनी अपने साख पर आंच नहीं आने देना चाहती। इसलिए पायलट को बलि का बकरा बनाने की कोशिश हो रही है। हमने इस बात को पहले भी कहा था कि बहुत संभव है कि किसी पायलट के ऊपर ही यह जिम्मेदारी टाल दी जाए कि उसने ही यह विमान हादसा कराया है और आज इटली की अखबार की इस खबर ने इस बात को हमारे यह जो संदेह था उसको गहरा भी कर दिया है।

फिलहाल परिवार वालों ने यह कहा कि इस तरीके से आप जो है पारिवारिक मामलों को सामने नहीं ला सकते। अब यह कहा जा रहा है कि जो कैप्टन सुमित संभ्रवाल हैं उन्हीं पर ही यह अंदेशा ये उनके उन्हीं पर जो संदिग्ध लोगों के नजरिए हैं वो इसीलिए हैं क्योंकि बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से डिप्रेशन से पीड़ित थे और उनकी पत्नी से उनका डिवोर्स का कोई मामला चल रहा था। इसलिए उन्होंने ऐसा कर दिया। मतलब किसी का पर्सनल मैटर जो है वो किसी हादसे के लिए जिम्मेदार बनाया जाएगा और इस तरीके से ये सारी चीजें होंगी। यह सही नहीं लगता है।

पारिवारिक मामलों को सोशल मीडिया पर और और जगहों पर मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। फिलहाल सुमित कैप्टन सुमित के जो परिवार वालों परिवार वालों में से लोगों का यह कहना है कि यह जो भी आरोप उन पर लगाए जा रहे हैं वो ठीक नहीं है। उनके पिता ने क्या कहा वो मैं आपको बताती हूं। उनके पिता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए नई जांच की मांग की थी। क्योंकि जो एआईबी है। उसने भी शुरुआती जांच में समरवाल के पर ही सारे आरोप मरने की कोशिश की थी। तब उनके पिता ने सभी आरोप को खारिज करते हुए नई जांच की मांग करते हुए अपने बेटा के जो मेंटल हेल्थ के बारे में अटकलों का अंदाजा लगाया जा रहा था उसे खारिज करते हुए उन्होंने यह बात साफ कर दी थी कि तलाद की खबरें जो भी पर्सनल मुद्दे यह सब कुछ जो एंजाइटटी या डिप्रेशन के लिए बताया जा रहा है यह सब ठीक नहीं है। अगर आपको अहमदाबाद प्लेन क्रैश का मामला याद हो तो आपको याद होगा कि शुरुआती कुछ हफ्तों में लगातार नई-नई थ्यरियां सामने आ रही थी। कुछ टेक्निकल खराबी के मामले सामने आ रहे थे। इंसानी गलती की बात सामने आ रही थी और वक्त के साथ-साथ जांच का रुख जो है वो कहीं ना कहीं कॉकप्रीट के फ्यूल स्विच पर भी गया था। लेकिन अब पूरा मामला फिर वो बैक ब्लैक बॉक्स की भी चर्चा सामने आई थी कि ब्लैक बॉक्स का जो डाटा होगा उस बॉक्स से जो चीजें निकलेंगी उस आधार पर जो है वह जांच की जाएगी और टेक्निकल टीम इस बात की जांच भी कर रही थी। लेकिन जो ब्लैक बॉक्स था उसके डाटा के अनुसार यह पता चला कि विमान में कोई टेक्निकल खामी आई ही नहीं थी। किसी भी टेक्निकल खामी को सीरे से खारिज करते हुए यह बताया गया कि जो इंजन का इग्निशन था उसमें जो स्विच था वो मैनुअली मूवमेंट की तरफ ही इशारा करता है। यह बात साफ है कि जो प्लेन क्रैश हुआ वह दोनों इंजन के बंद होने की वजह से हुआ।

किसी टेक्निकली फौल्ट की वजह से नहीं बल्कि मानवीय भूल के कारण हुआ। यानी कि पायलट ने वह वो जो स्विच था उस स्विच को मैनुअली बंद किया। इस तरीके की बात जो है वो सामने आई। इटली की अखबार यह बात कहती है कि पायलट की गलती की वजह से विमान का हादसा हुआ। लेकिन लंदन के अखबार द इंडिपेंडेंट इस बात की पुष्टि करता है। द इंडिपेंडेंट के मुताबिक ये बात सामने आई है कि ये जो कंपनी है एयर इंडिया वो केस को छोड़ने के लिए 10 20 लाख का ऑफर कर रही है। अगर विमान में कोई तकनीकी प्रॉब्लम नहीं थी। यह विमान हादसा पायलट की गलती की वजह से हुआ। तो बताइए कि एयर इंडिया उन तमाम परिवार वालों को अतिरिक्त मुआवजा देकर केस से अपने आप को पीछे हटाने या केस से मुंह मोड़ने या पीछा छुड़ाने की कोशिश क्यों कर रहा है? यह बड़ा सवाल है। जांच में क्या कुछ सामने आया है? यह भारत की एजेंसियां नहीं बता पा रही हैं। हमारे समाचार अखबारों में इस बात को कहीं भी नहीं छापा जा रहा है। लेकिन कोई इटली में, कहीं अमेरिका में, कहीं लंदन में, किसी अखबार में यह छप रहा है। जबकि मरने वाले की संख्या भारतीयों की ज्यादा थी। आप सभी को पता है। तो भारत के अखबारों से यह अहमदाबाद प्लेन हादसे की खबरों को क्यों गायब कर दिया जा रहा है? क्यों इस तरीके की खबरें प्रकाशित नहीं की जा रही? इसका क्या मतलब है? और इस तरीके की खबरें नहीं छापने के पीछे की मंशा क्या है?

क्या आप बताना नहीं चाहते कि किसकी गलती की वजह से इतने अधिक लोगों की मौत हुई? विमान में कोई तकनीकी गलती थी, तकनीकी खामियां थी या पायलट की गलती थी, इस पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही है। अगर आप पायलट को दोषी मानते हैं तो पायलट के परिवार वालों को भी अपना पक्ष रखने की इजाजत मिलनी चाहिए और कोर्ट का दरवाजा वो जरूर खटखटाएंगे।

एक पायलट के पूरी जिंदगी और उसके नहीं रहने के बाद अगर किसी भी हादसे के लिए पायलट को जिम्मेदार ठहराया जाए यह ठीक नहीं है क्योंकि वो अपने आप को अपने आप को बचाने के लिए अपने आप के डिफेंस के लिए वो मौजूद नहीं होगा इसलिए सबसे आसान मोहरा वो है इसीलिए आप पायलट को जिम्मेदार ठहराना चाहते हैं यह एक सवाल जरूर जो है वो हो सकता है। अब लंदन का यह जो डी इंडिपेंडेंट अखबार है उसके मुताबिक यह बात सामने आई है कि एयर इंडिया हादसे में जिन लोगों की जान चली गई जान गवाने वाले परिजनों को अतिरिक्त मुआवजा देने के बदले केस ना करने का अधिकार केस को छोड़ने का प्रस्ताव रखा जा रहा है। यह अमाउंट 10 से लेकर ₹ लाख है। यानी कि यानी कि यह कि 10 लाख ले लो, 20 लाख ले लो लेकिन किसी भी तरीके का केस जो है वह आगे आप नहीं बढ़ाएंगे। एयरलाइंस परिवार वालों को अतिरिक्त पैसा देकर, अतिरिक्त धनराशि देकर समझौते की पेशकश कर रही है। हादसे से जुड़ा दावा वो भारत या भारत से बाहर के कहीं भी और नहीं कर सकते। सभी कानूनी जिम्मेदारियों को कंपनी से मुक्त करना होगा। यानी कि आप 10 लाख लीजिए, 20 लाख लीजिए। लेकिन आप अपने परिजन की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? यह भूल जाइए। किसी भी कोर्ट का दरवाजा मत खटखटाइए और यह मत पूछिए कि किस वजह से अहमदाबाद विमान हादसा हुआ। किस वजह से 250 लोगों की मौत हुई। वो लोग जो विमान में सवार थे और वो लोग जो उस हॉस्टल में थे वो किसकी वजह से मर गए यह मत पूछिए। बस आप पैसा लीजिए और अपना मुंह बंद कर लीजिए। इस तरीके की खबरें भी सामने आ रही हैं। तो एक तरफ एक तरफ इटली की अखबार यह बताती है कि इस हादसे के लिए पायलट जिम्मेदार है। दूसरी तरफ लंदन की एक अखबार यह बता रही है कि इस तरीके से पैसा देकर परिवार वालों को मैनेज करने की कोशिश हो रही है। तो बताइए अगर पायलट की गलती की वजह से विमान हादसा हुआ तो अतिरिक्त पैसा फेंकने की जरूरत क्यों है? क्यों परिवार वालों का मुंह बंद करने के लिए और यह कहने की कोशिश हो रही है कि आप भारत और भारत के बाहर किसी भी तरीके का कोई भी कानूनी दांव पेच नहीं करेंगे। कंपनी को इस दाव पेच से मुक्त रखेंगे। यह किस तरफ इशारा करता है। आप समझ ही रहे होंगे मैं क्या कहने की कोशिश कर रही हूं। हमारे देश में लोगों की जान की कीमत ढेला बराबर है। आपकी जान चली जाएगी लेकिन आपको यह तक नहीं बताया जाएगा कि किनकी गलती और किनकी लापरवाहियों की वजह से आपकी जान गई। सबसे ज्यादा सुरक्षित अगर कोई यात्रा का मूड होता है तो वह एयर बाय एयर ही माना जाता है। माना जाता है सड़क जो है वो हादसे का शिकार हो जाते हैं। सड़क में जो है वो गड्ढे हैं तो वो सुविधा के लिए ठीक नहीं है। ट्रेन लगातार पलटी जा रही हैं। ट्रेन पर तो सवाल ही मत कीजिए। अगर आप बस से सफर कर रहे हैं तो सड़कों में गड्ढे रोड लाइट नहीं होना। अभी नोएडा वाला केस तो आपको पता ही है। तो ये लोग किस तरीके से डायवर्जन वगैरह नहीं बनाते हैं तो लोगों की जान चली जाती है। अभी एक और केस आया था। एक लड़का बाइक से जा रहा था और गड्ढे में गिर कर मर गया। तो सड़क पर आप मरेंगे क्योंकि सड़क ठीक नहीं है। रेल दुर्घटना हादसे का शिकार होंगी क्योंकि पटरियां पुरानी है। पटरियां बदली नहीं गई। अच्छा ठीक है। अब आप और ज्यादा पैसा लगाकर अगर आसमान में उड़ रहे हैं तो अहमदाबाद विमान हादसे जैसी घटना हो जाएगी और आपको यह तक नहीं पता चल पाएगा कि किन कारणों की वजह से आपकी मौत हुई। फिलहाल ये अभी जांच का विषय है। ज्यादा बोलना ठीक नहीं है। जांच की जा रही है और हमारी जांच एजेंसियां इस बात को जानने और समझने की कोशिश कर रही है कि किसकी लापरवाही की वजह से अहमदाबाद विमान हादसा हुआ। बोइंग की वो फ्लाइट उस दिन आखिर क्यों नहीं उड़ पाई थी? क्या उसके लिए पायलट जिम्मेदार है?

या कोई तकनीकी कारण। फिलहाल इन दो अखबारों की कटिंग के आधार पर हम यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि विदेश में अलग-अलग देशों में इस पूरे विमान हादसे को अलग नजरिया देने की कोशिश हो रही है। इटली की अखबार पायलट को जिम्मेदार मानती है। जबकि लंदन के अखबार यह बताने की कोशिश हो रही है कि हमारी जो एयरलाइंस है, हमारी जो इंडिया एयरलाइंस है, वो कैसे केस को दबाने के लिए 10 20 लाख अतिरिक्त देने के लिए परिजनों को मनाने की कोशिश कर रही है। तो यह पूरी कहानी हमने आपको बताने की कोशिश की।

इस खबर पर अब बहुत ज्यादा चर्चा नहीं हो रही है क्योंकि जो चले गए वो चले गए लेकिन जिनके गए हैं ना उन लोगों की आंख आंखों के आंसू अभी भी सूख नहीं पा रहे हैं तो यह संवेदना हमें और आपको समझनी चाहिए कि जिसके अपने छूट जाते हैं वो पूरी जिंदगी सिर्फ इस आस में इंतजार करते रहते हैं कि आखिर मेरा अपना क्यों गया उसके लिए जिम्मेदार कौन है

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