लेकिन, एक वक्त था जब टाइम बहुत खराब चल रहा था। नहीं, टाइम तो कभी खराब नहीं चल रहा था, बॉस, टाइम अगर खराब चल रहा होता, तो आज यहां बैठे नहीं होते। टाइम तो कि जो आदमी चल सकता है, जो आदमी बोल सकता है, जो आदमी खड़ा हो सकता है, सोच सकता है, उसका टाइम अच्छा ही है।
जब आप तिहाड़ जेल में थे तब अपने आप को यही कह दिया। भैया टाइम तो उसको खराब बोलते हैं अगर आप टाटा के पास टाटा अस्पताल में चलिए टाइम खराब उसको बोलते हैं कि एक मोटरसाइकिल निकल गई दोनों पैर टूट गए टाइम खराब उसको बोलते हैं कि यहां से शरीर उठ नहीं रहा है। टाइम खराब उसको बोलते हैं कि ये डायग्नोस हो गया। ऐसे हो गए हैं। ये टाइम खराब है। जो आदमी बोल सकता है, चल सकता है, बैठ सकता है, उठ सकता है, उस आदमी का वो ब्लेस्ड है और उसका टाइम अच्छा ही है। चाहे वो जेल में हो, चाहे बेल में हो, चाहे कहीं इंटरवेल में हो। ठीक बात है। पर जब हम अता पता लापता की बात करते हैं तो यह प्रसंग आता है सामने।
चेक बाउंस मामला बोलते हैं इसको। और एक चेक बाउंस का मामला और एक झूठा हलफनामा। हम ये दो मामले हैं जिनके चक्कर में आप कानूनी मुकदमेबाजी में पड़े और आपको तिहाड़ जेल में भी रहना पड़ा। क्या आपकी मनोदशा थी? वो मामला क्या था? कैसे आपने अपने आप को संभाल के रखा? देखिए यह मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है। इसके बारे में जब मैंने 20 साल में हमारी कोई हमें आशीर्वाद दे रहे हो दे रहा हो तो उसको लेके हम हवा में भागे नहीं। और कोई हमें बदनाम कर रहा हो, गाली दे रहा हो तो हम उससे कभी जो है विचलन नहीं हुई। अगर ताली देख के मचलन नहीं हुई तो कभी भी बुराई देख के विचलन नहीं हुई। आपने अगर सीरियसली इस पर पूछ लिया है और लल्लन टॉप की ऑडियंस के सामने क्वेश्चन तो हम क्वेश्चन का आंसर मैं धन्यवाद देता हूं कोर्ट को आज भी कि अगर कोर्ट ना होता तो सामने वाले तो फांसी लगवा देते। कोर्ट ने बचाया है मुझे क्योंकि कोर्ट में कोई भी आदमी एक्टिंग नहीं कर सकता।
हां, कभी-कभी यह होता है कि किसी के पास 50 पेज होते हैं प्रूफ के सबूत के रूप में और किसी के पास मेरी जंग का डायलॉग होता है कि जज साहब जिनके पास सबूत नहीं होते वो क्या निर्दोष नहीं होते? मैं ये जो चीजें हैं मैं यह सिर्फ बताना चाहता हूं कि जो तस्वीर है वह बहुत अलग है। मैं मैं धन्यवाद देता हूं अगेन कि हमारी कोर्ट ने बात को बहुत कुछ समझा। और मैं कोर्ट की हर आज्ञा का पालन करने वाला हूंस्टब्लिश का्टक्स्ट फॉर आवर व्यूअर्स बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल उनसे ₹5 करोड़ लिए गए फिल्म बनाने के लिए फिल्म बनाने के लिए लिए नहीं गए उन्होंने इन्वेस्ट किए फाइनेंसर के तौर पे वो फाइनेंसर के तौर पे उनको उनको अपने पोते को हीरो बनाना था उनका पेता पोता बड़ा हो रहा उनके गुरु उन्होंने उनके गुरु थे आप डायरेक्टर थे फिल्म के मैं अता पता लापता का डायरेक्टर तो कभी नहीं था जी मैं डायरेक्टर एक्टर ना हूं और ना डायरेक्टर रहूंगा।
मैं एक्टर हूं। कभी कबभार 100 मैच खेलने होते हैं तो 95 मैच आदमी खेलता है। 95 अगर आप क्रिकेटर हो तो आप क्रिकेट खेलते हो और पांच मैच कभी कबभार आप फुटबॉल खेल लेते हो। तो हमारे लिए यह जो है क्रिएटिव एक एक्सपेरिमेंट था कि 70 एमएम पे एक म्यूजिक कॉस जो वो न्यूयॉर्क में चलता है ब्रॉडवे ब्रॉडवे ब्रॉडवे को कैसे 70 एमएम पे अपन क्रिएट करें उसकी कोशिश चल रही थी उसमें 200 अभिनेताओं ने और ढाई हजार पब्लिक ने काम किया था। आई थिंक अता पता लापता लोगों के लिए क्या वो है कि राजपाल ने क्या अता पता लापता बनाई लेकिन राजपाल यादव ने अगर अता पता लापता नहीं बनाई होती तो हमारा जिंदगी में हम ऊपर चले जाते हम एक दुनिया नहीं समझ पाते हमें लगता है।
जीवन में जब बोलते हैं कि सौरभ जी का पता बताइए तो बोले यार सौरभ जी का पता नहीं पता है तो बोले अता पता बताइए तो अता पता पूछ के जब पता मिलता है ना तो वो जिंदगी मुझे लगता है कि अता पता लापता मेरे जीवन का अता पता ला पता पता मिला है मुझे क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ा है पिछले 10 साल में लेकिन आप बहुत कुछ छीन छीनने की कोशिश कर सकते हो लेकिन जिस हंसी को भगवान ने बनाया उसको कौन छीन सकता है तिहाड़ में कैसी हालत है अंदर और बहुत मुश्किल रहा होगा देखिए साहब ऐसा है कौन सी सेल में थे आप कौन से जेएस नंबर सेवन सात नंबर हम नहीं लेकिन मैं मतलब हर कंडीशन में जहां पे भी रहने का हमें वो मिला मैं सबका धन्यवाद देता हूं कि हमारे साथ किसी ने चाहे कोर्ट हो चाहे सबका व्यवहार सबका व्यवहार ठीक बाहर जैसे सबका व्यवहार ठीक वैसे अंदर सब अपने-अपने डिसिप्लिन में थे और हम जो है हमें आती थी तो हम वहां वर्कशॉप करने लगे थे हमें परमिशन मिल गई थी क्या वर्कशॉप कर रहे थिएटर वर्कशॉप करते थे तिहाड़ के कैदियों के साथ हां सबके साथ जो मिल गए तो वहां पे करते थे और आई गॉट वेरी गुड चरित्र प्रमाण पत्र मुझे अच्छा लगा कि जब उस समय वो सुपरिडेंट साहब थे तो उन्होंने एक तो वो जितने दिन का था हमारा वो दिया और उसके साथ एक प्रमाण पत्र और दिया कि बहुत सारे लोग इधर देखे लेकिन मैं मुझे आपसे सीखने मतलब इंस्पिरेशन मिला मिला कि जीवन कितना पॉजिटिविटी से जीना चाहिए वो मुझे अच्छा लगा कि सब लोग जितने लोग थे तो सब ने वो टाइम जो था वो बेस्ट इसमें हमारा एक हमारा एक मतलब छोटे भाई जैसा है कुलदीप फैसला करने के लिए बात करने गया तो वो वो रिपोर्टें करवा रहा है कि आ रहे हैं तो मतलब राजपाल यादव के मैं अभिनेता तो था ये तो मुझे पता था पहले बचपन से लेकिन और कितना मैं हूं वो मुझे नॉलेज नहीं थी कि मैं अब अभिनय करने के बाद में यह भी सब काम करूंगा कि किसी को तो बहुत सारे ऐसे आरोप लगे जो शायद आरोप हम क्योंकि हमारे पिताजी 75 साल के हैं। शायद जिस एरिया में रहते हैं उनके नाम आज तक एक सिंगल रिपोर्ट नहीं है। एक सिंगल रिपोर्ट अगर आदमी स्वभाव कभी किसी के चेंज नहीं होता। अगर मैं हां चोर तो हूं मैं बचपन से लंबा चोर हूं। छलिया हूं। जिस महफिल में खड़ा हो जाता हूं लोगों के दिल चुराता हूं। और वो दिल चुराने की जो आदत है वो जीवन भर रहेगी। लेकिन इन हाथों से अगर इस शरीर को ₹5 करोड़ कमजोर कर दें। जी तो आई थिंक ये राज्यपाल को भी अंदर से खुद इच्छा होती है कि मैं इस चीज को सामने करूं तो कोशिश करूंगा अभी तक इस पे हमने हम 13 एपिसोड लिखे रखे हैं।
मैं आपको आज ये भी बात बता रहा हूं। लेकिन 13 एपिसोड पिछले तीन साल चार साल से इसलिए नहीं बनाए थे कि ताकि ऑडियंस को ये ना लगे कि सिंपैथी मांग रहा है। जब भूल भुलैया आर् ये सब रिलीज हो गई। अभी मेरे भगवान की दुआ से हमारे पास तीन दर्जन प्रोजेक्ट हैं जिसमें डेढ़ दर्जन ऑलरेडी वेब सीरीज और वेब फिल्में और जो सिनेमा फिल्में साइन है तब भी अभी उसको वो नहीं बनाया है ताकि कोई ये ना बोले सिंपैथी मांग रहे हैं। लेकिन एक बार पब्लिक के सामने जिस दिन हमें कोर्ट जिस चीज का आदेश करेगा उसके बाद में पब्लिक के सामने कि एक्चुअल किस्सा क्या था ये और अगर कोर्ट नहीं होता तो सच में इन लोगों ने चक्कर में डाल दिया था। थैंक यू कोर्ट।
